विरोध / एनआईए एक्ट को असंवैधानिक घोषित कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंची छत्तीसगढ़ सरकार; मनमोहन सरकार में बना था

2008 में जब एनआईए कानून बना तब केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार थी। उस समय कानून बनाने के दौरान मुंबई में हुए 26/11 हमले को आधार बनाया गया था। (फाइल फोटो) 2008 में जब एनआईए कानून बना तब केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार थी। उस समय कानून बनाने के दौरान मुंबई में हुए 26/11 हमले को आधार बनाया गया था। (फाइल फोटो)
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2008 में जब एनआईए कानून बना तब केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार थी। उस समय कानून बनाने के दौरान मुंबई में हुए 26/11 हमले को आधार बनाया गया था। (फाइल फोटो)2008 में जब एनआईए कानून बना तब केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार थी। उस समय कानून बनाने के दौरान मुंबई में हुए 26/11 हमले को आधार बनाया गया था। (फाइल फोटो)

  • छत्तीसगढ़ सरकार ने याचिका दाखिल कर कहा- केंद्र सरकार का यह कानून राज्य पुलिस से जांच के अधिकार को छीनता है
  • एनआईए एक्ट को चुनौती देने वाला पहला राज्य बना छत्तीसगढ़, कल केरल सरकार ने भी सीएए को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी

दैनिक भास्कर

Jan 15, 2020, 04:38 PM IST

रायपुर. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में बने एनआईए (नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी) एक्ट 2008 को असंवैधानिक घोषित करने की मांग कांग्रेस नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ सरकार ने की है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका डालकर राज्य सरकार ने कहा- यह कानून राज्य पुलिस से जांच के अधिकार को छीनता है। भाजपा विधायक भीमा मंडावी की मौत मामले की जांच को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट से निराशा हाथ लगने के बाद प्रदेश सरकार ने यह कदम उठाया है। मंगलवार को केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सीएए के खिलाफ याचिका दी थी।

याचिका में कहा- अधिनियम का प्रावधान राज्य और केंद्र के बीच समन्वय नहीं बनाता

छत्तीसगढ़ सरकार का कहना है कि एनआईए एक्ट राज्य पुलिस के जांच और सर्च करने के अधिकार को छीनता है। वहीं, केंद्र का अक्षम, विवेकहीन और मनमानी शक्तियां भी रखने का अधिकार देता है। इसके चलते राज्य की पुलिस को जांच करने का मिला संवैधानिक अधिकार प्रभावित होता है। याचिका में कहा है कि इस नए एक्ट की वजह से लोकल पुलिस जो सर्च ऑपरेशन करती है, उनसे वो अधिकार छीन लिया गया है। सरकार का कहना है कि फिलहाल राज्य की पुलिस इस एक्ट के दायरे में नहीं है।

राज्य सरकार ने कहा कि अधिनियम का प्रावधान राज्य और केंद्र सरकार के बीच किसी भी रूप में समन्वय और सहमति की पूर्व शर्त के लिए कोई जगह नहीं छोड़ता है। यह स्पष्ट रूप से संविधान के तहत राज्य संप्रभुता के विचार के खिलाफ है। फिलहाल सरकार की ओर से दाखिल याचिका को लेकर सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है। हालांकि अगर छत्तीसगढ़ सरकार को लगता है कि इस मसले पर जल्द सुनवाई होनी चाहिए तो वह चीफ जस्टिस से अपील कर सकती है।

छत्तीसगढ़ सरकार अधिनियम को चुनौती देने वाली पहला राज्य है। यह कदम केरल सरकार की ओर से संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत नागरिकता संशोधन अधिनियम को चुनौती दिए जाने के ठीक एक दिन बाद आया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने भी अनुच्छेद 131 के तहत एक मूल मुकदमा दायर किया है। यह अनुच्छेद राज्य को केंद्र के खिलाफ विवाद के मामलों में सीधे सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने का प्रावधान करता है।

2008 में जब एनआईए कानून बना तब केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार थी। उस समय कानून बनाने के दौरान मुंबई में हुए 26/11 हमले को आधार बनाया गया था। अब इस कानून को चुनौती देने वाले राज्य छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस की ही सरकार है। केंद्र सरकार ने भारत की संप्रभुता, सुरक्षा और अखंडता को प्रभावित करने वाले, राज्य की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संधियों के तहत आतंकी मामलों की जांच के लिए नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) का गठन किया था।

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