रायपुर / डीकेएस में बिल बढ़ाने का खेल, डॉक्टर जो जांच नहीं लिख रहे उसका भी टेस्ट

Dainik Bhaskar

May 17, 2019, 02:41 AM IST



bill-raising game in DKS Hospital
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bill-raising game in DKS Hospital

  • डॉ. मरीज को हीमोग्लोबिन जांच लिख रहे हैं तो लैब में कंपलीट ब्लड काउंट सीबीसी जांच की जा रही है

रायपुर. दाऊ कल्याण सिंह (डीकेएस) सुपर स्पेश्यालिटी अस्पताल में पैथालॉजी जांच की आउटसोर्सिंग करने वाली कंपनी का फर्जीवाड़ा फूटा है। सरकारी छत के नीचे जांच करने वाली प्राइवेट कंपनी के जिम्मेदार अपना बिल बढ़ाने के लिए वो जांच भी कर रहे हैं जो डाक्टर नहीं लिख रहे हैं। गुप्त शिकायत के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच करवायी गई। उसमें फर्जीवाड़ा फूटा। अब लाल पैथलैब को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गय है। नोटिस में कहा गया है कि ये गड़बड़ी करने के लिए क्यों न आपके हर महीने किए जाने वाले भुगतान में पांच से 10 फीसदी की कटौती कर ली जाए। खून जांच के एवज में प्रबंधन हर माह वेंडर को 30 लाख रुपए का भुगतान कर रहा है।


डीकेएस में नए तरह के घोटाला सामने आने से प्रबंधन भी हैरान है। डीकेएस में ज्यादातर सुविधाएं आउटसोर्सिंग पर प्राइवेट कंपनी को दी गई है। सोनोग्राफी, एमआरआई और केटरिंग से लेकर पैथालॉजी जांच तक सारी सुविधा पीपीपी मोड पर चल रही है। पैथालॉजी इनमें शामिल है। इसमें मशीन तो सरकारी यानी डीकेएस की है, लेकिन जांच प्राइवेट वेंडर्स कर रहे हैं। जांच के एवज में प्रबंधन हर माह वेंडर को भुगतान करता है। पैथोलॉजी, बायो केमेस्ट्री व माइक्रो बायोलॉजी जांच का ठेका लाल पैथ को दिया गया  है। यह विश्वसनीय लैब माना जाता है, लेकिन बिलिंग जांच में गड़बड़ी सामने आई है। 


क्या कर रहे हैं लैब वाले : डॉक्टर मरीज को हीमोग्लोबिन जांच करवाने के लिए लिख रहे हैं तो लैब में कंपलीट ब्लड काउंट सीबीसी जांच की जा रही है। इससे जांच शुल्क में 100 रुपए से ज्यादा अंतर आ रहा है। हीमाेग्लोबिन जांच का शुल्क 21 रुपए व सीबीसी का 150 रुपए से ज्यादा है। 

 

इसी तरह लंग फंक्शन टेस्ट एलएफटी व रीनल फंक्शन टेस्ट आरएफटी में अलग-अलग शुल्क लिया जा रहा है। दूसरी जांच में भी इस तरह की गड़बड़ी की जा रही है। दरअसल प्रबंधन ने जब बिलों की बारीकी से जांच की, तब यह गड़बड़ी सामने आई। अब हर बिल की बारीकी से जांच कर ही वेंडर को भुगतान किया जा रहा है।


5 से 25 फीसदी पेनाल्टी का प्रावधान
जांच में किसी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर वेंडर पर 5 से 25 फीसदी पेनाल्टी लगाने का प्रावधान है। एमओयू में इसका उल्लेख है। हालांकि प्रबंधन ने पहले नोटिस में वेंडर को 5 से 10 फीसदी पेनाल्टी लगाने की चेतावनी दी है। 

 

सीटी स्कैन जांच में भी मरीजों की जेब काटी जा रही
डीकेएस में आउटसाेर्स करने वाले टेंडरों में सीटी स्कैन का ठेका लेने वाले भी शामिल हैं। डीकेएस शुरू होने के समय हुए अनुबंध का उल्लंघन करते हुए वेंडर ने 128 के स्थान पर 16 स्लाइस यानी बेहद कम पावर वाली मशीन लगा दी है। उच्च स्तर की मशीन नहीं होने से जांच प्रभावित हो रही है। अस्पताल प्रबंधन केवल नोटिस जारी करने की औपचारिकता निभा रहा है।

 

दरअसल वेंडर कम स्लाइस की मशीन लगाने के बाद भी जांच शुल्क 128 स्लाइस मशीन वाला शुल्क ले रहा है। इससे मरीज व प्रबंधन दोनों का नुकसान हो रहा है। 16 स्लाइस वाली मशीन में इमेज ठीक नहीं आता। इसलिए डॉक्टर 128 स्लाइस मशीन से जांच कराने की सलाह देते हैं। गौरतलब है कि अंबेडकर में छह साल पहले ही एडवांस मशीन लग चुकी है।

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