हकीकत / जिनके लिए बनाईं स्कीम उन्हें जानकारी ही नहीं, इसलिए खर्च ही नहीं हो पा रहा करोड़ों का बजट



budget of crores is not being spent
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budget of crores is not being spent

  • सरकारी विभागों को योजनाओं के प्रचार के लिए राशि मिलती है, लेकिन लोगों तक पहुंचती नहीं

Dainik Bhaskar

Aug 30, 2019, 05:40 AM IST

रायपुर (राकेश पांडेय/मनोज व्यास). हर साल सरकारी विभागों को योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए बड़ी राशि मिलती है। लेकिन फ्लैगशिप योजनाओं को छोड़ अधिकांश योजनाएं लोगों तक पहुंच ही नहीं पातीं। दैनिक भास्कर ने ऐसी ही कुछ योजनाओं का स्कैन किया जिनका बजट तो करोड़ों का है लेकिन उनमें हितग्राहियों की संख्या शून्य या न के बराबर है। और ये सभी ऐसी योजनाएं हैं जिनके लिए आवेदन प्रक्रिया सरल की गई, इसके बावजूद जानकारी के अभाव में लोग इनका फायदा नहीं उठा पा रहे। प्रस्तुत है ऐसी ही कुछ योजनाओं की रिपोर्ट जिनके हितग्राही नहीं मिल रहे... 

केस-1: उरला इंडस्ट्रियल एरिया के कुसमी गांव के दिलहरण यादव। इनके दो बेटे सिलिकोसिस पीड़ित थे। इन्हें पता ही नहीं था कि सिलिकोसिस पीड़ितों को 3 लाख रुपए की मदद मिलती है। बेटों के इलाज के लिए घर-खेत बेचना पड़ा, फिर भी एक बेटे को नहीं बचा सके।


केस-2: मोवा में 13 साल का राजू देवार स्कूल नहीं जाता, कचरा बीनता है। माता-पिता भी यही काम करते हैं। लेकिन इन्हें पता ही नहीं कि रैग पिकर्स को छोटा-मोटा रोजगार शुरू करने के लिए प्रति व्यक्ति 3700 रुपए मिलते हैं। 

 

जानकारी के अभाव में इन योजनाओं का बजट खर्च ही नहीं हो पाता 

 

  • सिलिकोसिस: श्रमिकों को सिलिकोसिस की पुष्टि पर 3 लाख मिलते हैं। 1 लाख खाते में और 2 लाख एफडी के रूप में। 2017 में रायपुर में 28 मजदूरों की मौत हुई, 4 को आर्थिक मदद मिली, जबकि यह देने का प्रावधान है। परिजन ने पूंजी लगाकर इलाज कराया था।
  • नि:शक्त हॉस्टल: समाज कल्याण विभाग ने 40% से ज्यादा नि:शक्त विद्यार्थी जो दूसरे शहरों में रहकर पढ़ते हैं, उनके लिए यह योजना शुरू की। 5 विद्यार्थियों के समूह को ए श्रेणी के शहर के लिए 10 हजार, बी श्रेणी के के लिए 7 हजार और सी के लिए 5 हजार किराया मिलना था। लेकिन हितग्राही नहीं हैं।
  • क्षितिज-अपार: इस योजना में दिव्यांगों को पीएससी/यूपीएससी प्री पास करने पर 20 हजार, मेंस पर 30 हजार और क्वालीफाई होने पर 50 हजार मिलते हैं। पर आवेदक नहीं पहुंचते। केंद्र सरकार द्वारा ट्यूटोरियल्स के लिए भी योजना है, लेकिन इसके अंतर्गत कोई संस्था रजिस्टर्ड नहीं है।
  • गंभीर बीमारी: प्रदेश में 19 लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड मजदूर हैं। इनके लिए श्रम विभाग ने इलाज के लिए 20 हजार रुपए देने का प्रावधान किया था। श्रम कल्याण मंडल की रिपोर्ट के मुताबिक योजना के अंतर्गत 99 मजदूरों ने योजना का लाभ लिया। इन्हीं मुख्यमंत्री अटल पेंशन योजना भी है।
  • रेग पिकर्स कल्याण: कचरा बीनने वालों को रोजगार शुरू करने के लिए 3700 रुपए देने की योजना बनाई। वार्डवार सर्वे कर प्रति व्यक्ति को राशि मिलनी थी, लेकिन अब तक किसी को नहीं मिली। रेग पिकर्स के लिए 2017-18 में 201.36 लाख मंजूर किए गए थे, जो खर्च नहीं हुए।

 

इनका भी बुरा हाल

राजमिस्त्री प्रशिक्षण, निर्माण मजदूर बीमा, मंथली सीजन टिकट कार्ड योजना, पंडो एवं भुजिया जनजाति विकास योजना, टाइपिंग बोर्ड, राज्य साक्षरता कार्यक्रम, राज्य प्रशिक्षण योजना, युवा शक्ति योजना, स्वस्थ पंचायत योजना, खलिहान अग्नि दुर्घटना योजना, टपक सिंचाई योजना।

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