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रायपुर / कैश, सोने-चांदी के कागजात हुए तो छोड़ना होगा तुरंत, वर्ना ऐसे अफसर की शिकायत के लिए पहली बार टोल-फ्री नंबर



सड़कों पर पूरे तामझाम से जांच, तस्वीर तेलीबांधा चौक की। सड़कों पर पूरे तामझाम से जांच, तस्वीर तेलीबांधा चौक की।
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सड़कों पर पूरे तामझाम से जांच, तस्वीर तेलीबांधा चौक की।सड़कों पर पूरे तामझाम से जांच, तस्वीर तेलीबांधा चौक की।
  • कारोबारियों, आम लोगों को प्रदेश निर्वाचन आयोग ने दी राहत
  • कैश-जेवर के दस्तावेज पेश करने पर थाने नहीं लाया जाएगा

Dainik Bhaskar

Oct 12, 2018, 11:15 PM IST

रायपुर. चुनाव की वजह से कारोबारियों तथा आम लोगों का अपने साथ कैश, सोना-चांदी या गहने लेकर चलना मुश्किल हो गया है, लेकिन उन्हें राहत देने के लिए प्रदेश निर्वाचन अमले ने शुक्रवार को बड़ी पहल की है।

 

आयोग ने सभी सरकारी जांच एजेंसियों को साफ कर दिया है कि अगर जांच में ज्यादा कैश या गहने-जेवर के साथ कोई कारोबारी पकड़ा जाए और वह मौके पर ही सभी संबंधित चीजों के सबूत पेश कर दे तो उसे वहीं छोड़ना होगा, उसे थाने तक लाने की कोई जरूरत नहीं है।

 

जो अफसर ऐसा नहीं करेंगे, उनकी शिकायत के लिए आयोग पहलीबार टोल-फ्री नंबर जारी कर रहा है। इस नंबर पर फोन कर अगर किसी कारोबारी या व्यक्ति ने शिकायत की कि सबूत दिखाने के बाद भी नहीं छोड़ा जा रहा है, तब संबंधित अफसर से तुरंत पूछताछ कर ली जाएगी। 

 

पिछले पांच दिन से राजधानी-प्रदेश में कैश, सोना-चांदी और गिफ्ट की जांच तेज हो गई है तथा रोजाना ही दो-तीन लोग पकड़े जा रहे हैं। इस कार्रवाई का व्यापारी संगठनों ने कड़ा विरोध कर रखा है। लगातार विरोध के बाद ही मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुब्रत साहू आयोग ने व्यापारियों को भरोसे में लेने के लिए शुक्रवार को अचानक बड़ी बैठक बुला ली है। इसमें तय किया गया है कि सही कारोबारियों को राहत देने के लिए अतिरिक्त गाइडलाइन में काम किया जाएगा।

 

मुख्य चुनाव अायुक्त रावत से शिकायत

व्यापारियों को कैश ले जाने पर हो रही परेशानियों की जानकारी  व्यापारिक संगठनों ने केंद्रीय मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत तक पहुंचा दी। शिकायत की कॉपी पीएमओ दफ्तर को भी ऑनलाइन दी गई। इसके बाद ही केंद्रीय चुनाव आयोग हरकत में आ गया। छत्तीसगढ़ निर्वाचन आयुक्त को निर्देश दिए गए कि चुनाव में किसी को भी परेशानी नहीं हो चाहिए चाहे वे व्यापारी ही क्यों न हो? मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सख्ती के बाद निर्वाचन आयुक्त के अफसरों ने शुक्रवार को सुबह ही सभी व्यापारी संगठनों से कहा कि वे अपनी परेशानियों के साथ बैठक के लिए आयोग के दफ्तर पहुंचे। बैठक में तत्काल ही पुलिस, प्रशासन और आयकर विभाग के अफसरों को भी बुलवा लिया गया।

 

सभी कारोबारी संगठन साथ

छत्तीसगढ़ चैंबर और कैट में लगातार प्रतिस्पर्धा के बाद ये पहला मौका है जब दोनों संगठन के पदाधिकारी एक जुट होकर आयोग दफ्तर पहुंचे और राहत की मांग की। चैंबर चुनाव के बाद पहली बार अध्यक्ष जितेंद्र बरलोटा और अमर पारवानी किसी बड़े मुद्दे पर एक साथ दिखाई दिए। हाल ही में कैट के भारत बंद के दौरान चैंबर के कई पदाधिकारियों ने समर्थन देने के बाद भी बंद का विरोध कर दिया था। इस वजह से दोनों संगठनों में दूरियां और बढ़ गई थी।

 

व्यापारी संगठनों ने बताई ये दिक्कतें, आयोग ने कहा-ऐसे दी जाएगी राहत
 व्यापारी : त्योहारी खरीदी के लिए कारोबारियों के पास बड़ी रकम रहती है। जांच में फंस जाते हैं। 
 आयोग : रकम की बैंक स्लिप या खातों का ब्योरा रखें। संचालकों के फोन नंबर रखें ताकि बात हो। 
 व्यापारी : व्यापारी खरीदी-पेमेंट के लिए पैसे लेकर गांवों में जाते हैं। 50 हजार रु. से ज्यादा रखते हैं। 
 आयोग : कोई दिक्कत नहीं, रकम का पता होना चाहिए कि कहां से आई? व्यापार करने से नहीं रोकेंगे। 
 व्यापारी : सीजन में दिन में एक-दो बार ही कैश घर वगैरह भेजते हैं। वह भी काफी ज्यादा होता है। 
 आयोग : दुकान के लैटरपैड में रोजाना का हिसाब रखें। सील-हस्ताक्षर के साथ इसे कैश के साथ भेजें।
 व्यापारी : बैंकों में हर दिन व्यापारी कैश लेकर जाते हैं, जमा-विड्राल भी होता है। उसमें भी फंसते हैं। 
 आयोग : फर्म की जमा और चेक बुक साथ रखें। नोटों की डीटेल भरें। मिलान हुआ तो तुरंत छोड़ेंगे।

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