सीजीपीएससी / सिविल जज परीक्षा और परिणाम को हाईकोर्ट ने किया निरस्त, बिना फीस लिए दोबारा परीक्षा कराने के आदेश

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  • छत्तीसगढ़ लोकसेवा आयोग की ओर से 39 पदों के लिए 7 मई 2019 में हुई थी ऑनलाइन परीक्षा
  • परीक्षा के अगले दिन जारी की गई थी आंसर की, अधिकांश प्रश्नों में त्रुटि के चलते दाखिल हुई थी याचिका

दैनिक भास्कर

Nov 15, 2019, 03:55 PM IST

बिलासपुर. बिलासपुर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला देते हुए छत्तीसगढ़ लोकसेवा आयोग (सीजीपीएससी) की सिविल जज परीक्षा और परिणाम को निरस्त करने का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने सीजीपीएससी को उन्हीं छात्रों की बिना फीस लिए दोबारा परीक्षा कराने के भी आदेश दिए हैं। इस परीक्षा को लेकर छात्रों की ओर से याचिका लगाई गई थी। इसमें कहा गया था कि आयोग की ओर से ली गई परीक्षा के अधिकांश प्रश्नों में त्रुटी थी। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की जस्टिस गौतम भादुड़ी की सिंगल बेंच ने यह फैसला दिया है।

आयोग ने आंसर की पर आपत्ति मांगी, लेकिन बिना निराकर किए परिणाम जारी कर दिए

दरअसल, छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने 6 फरवरी 2019 को विधि एवं विधायी कार्य विभाग के तहत सिविल जज के 39 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया था। इसके बाद 7 मई 2019 को ऑनलाइन प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन किया गया। परीक्षा के अगले ही दिन 8 मई को आयोग की ओर से मॉडल आंसर की जारी की गई। इसके बाद 24 मई को ऑनलाइन ही दावा आपत्ति मांगी गई थी। परीक्षा देने वाले सव्यसाची चौबे ने याचिका लगाई और इसमें कहा कि मॉडल आंसर पर की गई आपत्तियों का निराकरण किए बिना ही नतीजे जारी कर दिए गए हैं। 

सीजीपीएससी की ओर से सिविल जज के 39 पदों के लिए परीक्षा ली गई थी।  कोर्ट में लगी याचिका में कहा गया था कि परीक्षा में पूछे गए 100 में से 70 प्रश्नों में स्पेलिंग मिस्टेक है। वहीं 15-20 प्रश्नों में मटेरियल मिस्टेक था। आयोग के नियमानुसार, 20 फीसदी प्रश्नों में अगर मटेरियल मिस्टेक है तो परीक्षा रद्द की जा सकती है। इससे पहले भी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सीजीपीएससी सहित अन्य को नोटिस जारी करने के साथ ही अगली सुनवाई तक मुख्य परीक्षा के लिए प्रक्रिया शुरू करने पर रोक लगा दी थी। 

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