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राजनीति / भाजपा ने कहा- जीते हुए प्रत्याशी जुलूस न निकालें, प्रमाणपत्र लेकर ठाकरे परिसर पहुंचें



Chhattisgarh BJP says winning candidates did not procession
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Chhattisgarh BJP says winning candidates did not procession

  • बड़े नेताओं की निगरानी में रहेंगे नए विधायक, एक-एक सीट को लेकर है जद्दोजहद

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2018, 02:49 AM IST

रायपुर. भाजपा ने चौथी बार सरकार सरकार बनाने की संभावनाओं पर रणनीति तय कर ली है। उसके  विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार रहे नेता जीत का सर्टिफिकेट हासिल करने के बाद ही काउंटिंग स्थल से निकलेंगे। वे विजय जुलूस नहीं निकालेंगे। बल्कि वे सीधे राजधानी का रूख करेंगे। जीतने वाले प्रत्याशी सीधे पार्टी के मुख्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर पहुंचेंगे। वहां वे वरिष्ठ नेताओं की निगरानी में रहेंगे।

 

प्रदेश में 11 दिसंबर को विधानसभा चुनाव के वोटों की गिनती है। चुनाव कश्मकश भरे हैं इसलिए भाजपा ने विधायकों को समेटकर रखने का फैसला किया है। एक-एक सीट की जद्दोजहद है। इसलिए उम्मीदवारों अंतिम मौके तक मतगणना स्थल पर डटे रहेंगे। शुक्रवार को एकात्म परिसर में 90 विधानसभाओं के उम्मीदवारों, चुनाव संचालकों, प्रदेश पदाधिकारियों व जिला अध्यक्षों की क्लास ली। इसमें चुनाव को लेकर सीट वार रिपोर्ट ली गई। प्रत्याशियों व सहयोगियों को शुक्रवार को ईवीएम का परदे पर 


प्रजेंटेशन करके बताया कि काउंटिंग की क्या-क्या प्रक्रिया होगी। उन्हें किस तरह एक-एक चीज पर नजर रखनी है।  बैठक को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री सौदान सिंह और प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने संबोधित किया। तीनों नेताओं ने पार्टीजनों को भरोसा दिलाया कि हम सरकार बनाने जा रहे हैं। 


कांग्रेस जो ईवीएम को लेकर भ्रम फैला रही है वो सफल नहीं होगी। बताते हैं कि बैठक में किसी भी उम्मीदवार से कोई राय या सुझाव या शिकायतें नहीं ली गई। किसी को भी बोलने का मौका नहीं दिया गया। इशारे ही इशारों में कह दिया गया कि ये सब बातें बाद में देखेंगे।

 

बैठक करीब ढाई घंटे चली। प्रदेश प्रभारी डॉ. अनिल जैन बैठक में शामिल नहीं हो सके। बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि भाजपा उम्मीदवारों को काउंटिंग में क्या सावधानी बरतनी है इसकी जानकारी बैठक में दी गई है। राम विचार नेताम, श्रीचंद सुंदरानी, संजय श्रीवास्तव, विजय शर्मा, देवजी पटेल, नंदे साहू, चंद्रशेखर साहू, बर्नाड राड्रिक्स, डॉ. सलीम राज, दिलीप सिंह होरा, सुभाष राव, सुभाउ कश्यप, अनुराग सिंहदेव, समेत कई नेता शामिल हुए।

 

चेहरे की चमक बता रही है भाजपा की सरकार बनने की उम्मीद है

 

जोगी के बारे में क्या बोलूं : मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने कहा कि उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं के चेहरों की चमक बता रही है कि राज्य में चौथी बार भाजपा की सरकार बन रही है। हम राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के दिए लक्ष्य के करीब पहुंचेंगे। (जोगी मदद से सरकार बनने पर मुस्कुराते हुए) जोगी...अब जोगी के बारे में क्या बोलूं।

 

ईवीएम के साथ सो जाएं : प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि कांग्रेसी बिना वजह ईवीएम मशीनों को लेकर हल्ला मचा रहे हैं। तरह-तरह के आरोप चुनाव आयोग पर लगा रहे हैं। कांग्रेसी चाहे तो ईवीएम मशीनों को लेकर सो जाएं। पार्टी अब तक के सभी चुनावों से ज्यादा सीटें लेकर सत्ता में आ रही है। 

 

कल्पना में जी रहे हैं भूपेश आैर कांग्रेस के सभी नेता : पंचायत मंत्री अजय चंद्राकर ने कहा कि भूपेश बघेल फैंटेसी में जी रहे हैं। वो सपने में हैं और ये उनकी बातों में झलक भी रहा है। बघेल अब सपना देखते हैं, सीडी देखते हैं …क्या देखते हैं ये मैं नहीं जानता, लेकिन वो फैंटसी में हैं। सब कुछ बन गया है उनका। सरकार भी बन गयी है उनकी। मंत्रालय भी बन गया है उनका।


कृषिमंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि :  जोगी क्या हैं सब जानते हैं। वे किसके लिए काम करते हैं। पहले किसके साथ थे। उनका क्या हश्र हुआ। पहले वे जिनके साथ और अलग हुए उन दोनों के कारण हम फिर से सरकार बना रहे हैं। हमें किसी के सहारे की जरूरत नहीं। हम पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने जा रहे हैं। 

 

एक दूसरे से पूछते रहे तोर सीट निकलत हे कि नहीं... भाजपा कार्यालय एकात्म परिसर में शुक्रवार को अलग ही नजारा था। चुनावी थकान मिटाने के बाद मिले नेताओं ने आपसी अनुभव साझा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कमियों के साथ ही चुनावी जंग मे हुई खूबियों पर भी बात होती रही।

 

सारे नेताओं की आपसी बातचीत का लब्बोलुआब यह था कि अब चुनाव झंडे-पोस्टर व बैनर के नहीं रह गए हैं। चुनाव अब केवल नगदी का रह गया है। प्रदेशभर से पहुंचे नेता एक दूसरे से गले मिलकर या हाथ मिलाकर मिलते रहे। एक-दूसरे की विधानसभा के हालात पूछते रहे... तोर सीट निकलत हे कि नहीं..? लगभग सभी ने कहा कि वे जीत रहे हैं।

 

कोई कोने में जाकर बात करता रहा तो कोई समूहों में चर्चा करते रहे। एेसे नेताओं ने साफ कहा कि मैदानी जंग में कोई मुद्दे नहीं चले। किसी को घोषणा पत्र से भी मतलब नहीं था। गांव-गांव व शहरों में ज्यादातर लोग यही बोलते थे कि हमारे लिए क्या लाए हो? नेताओं की राय यह भी कि चुनाव आयोग को ध्यान देना चाहिए। कश्मकश वाली सीटों पर कई प्रत्याशियों में बहस चलती रही। कुछ चेहरे तनाव में भी थे। यह देखकर एक प्रत्याशी ने माहौल को हलका करने की कोशिश की। राजकपूर की फिल्म के गाने की पंक्तियां सुना दी कि ... निकल पड़े खुली हवा में अपनी सीना ताने। जाने मंजिल कहां होगी यह ऊपर वाला (वोटर) जाने।। उनके इतना कहते ही जोरदार ठहाके लगे। चुनाव संचालक और अन्य लोग आपस में खुसर-पुसर भी करते रहे।

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