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रायपुर. 22 साल से राज्यसभा में कांग्रेस के सदस्य रहे मोतीलाल वोरा को कांग्रेस ने इस बार मौका नहीं दिया है। इसके साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि 48 साल के लंबे कैरियर के बाद अब 92 वर्षीय वोरा सक्रिय राजनीति से बाहर हो सकते हैं। दरअसल पिछले कुछ दिनों से एआईसीसी के गलियारे में यह खबरें चर्चा में थी कि वयोवृद्ध होने के कारण वोरा को इस बार मौका नहीं दिया जा रहा है। कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ से वोरा के स्थान पर अध्यक्ष फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी को उम्मीदवार बनाया है। इससे पहले साेनिया गांधी ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पीसीसी चीफ माेहन मरकाम अाैर प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया के साथ मीटिंग करके दाेनाें नामाें काे फाइनल किया। तुलसी फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं। वे राजीव गांधी हत्याकांड केस में वकील रहे हैं और उनकाे साेनिया गांधी का करीबी माना जाता है।
बता दें कि जिस समय कांग्रेस ने राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की उस समय वोरा राज्यसभा में थे। टिकट कटने के बाद भास्कर से बातचीत में मोतीलाल वोरा ने कहा कि उन्होंने कभी भी टिकट के लिए मना नहीं किया था, लेकिन हाईकमान ने जो निर्णय लिया है। उसे हम पूरी तरह स्वीकार करते हैं। इसमें दो मत नहीं हैं। हाई कमान का फैसला सर्वोपरि होता है। छत्तीसगढ़ में हम सभी मिलकर काम करेंगे। केटी तुलसी और फूलोदेवी नेताम को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने पर वोरा ने कहा कि तुलसी बहुत अच्छे आदमी हैं। मैं उनको भली भांति जानता हूं। वे मेरे साथ राज्य सभा में रहे हैं। हाईकमान ने जो फैसला ले लिया उसपर और कोई चर्चा नहीं होती है। वह फाइनल निर्णय होता है। फूलोदेवी नेताम को टिकट देने पर वाेरा ने कहा कि आदिवासी महिला है। बहुत समय से संघर्ष कर रही है। लोकसभा का चुनाव पहले लड़ी थी। आदिवासी महिलाओं में उसकी अच्छी पकड़ है और अच्छी वक्ता है।
निर्विरोध निर्वाचन तय
कांग्रेस के पास विधायकों की संख्या दो तिहाई से अधिक (69) होने के चलते दोनों ही सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों का निर्विरोध निर्वाचन तय है। एक सीट के लिए 34 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। केटीएस तुलसी हाईकमान की पसंद हैं। आदिवासी वर्ग को साधने के लिए फूलोदेवी को टिकट दिया गया है।
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