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राजिम. छत्तीसगढ़ का प्रयागराज और त्रिवेणी संगम राजिम की पहचान पहले से ही आस्था, धर्म और संस्कृति नगरी के रूप में है। अब शासन ने इसे और भी विकसित करने का निर्णय लिया है। शासन ने राज्य के जिन स्थलों से श्री राम वन गमन किए थे, उन्हें चिह्नांकित किया गया है। इनमें राजिम भी शामिल है। राम वन गमन के दौरान श्रीराम पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ लोमश ऋषि आश्रम में ठहरे थे। साथ ही पंचकोशी धाम के स्थलों से भी गुजरे थे। अब राज्य सरकार इन स्थलों को राम वन गमन पर्यटक परिपथ के रूप में विकसित करने जा रही है।
गुरुवार को मुख्य सचिव आरपी मंडल की अगुवाई में मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी तथा पर्यटन सचिव पी अलबलगन ने राजिम का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भगवान राजीव लोचन मंदिर में पूजा अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि की कामना की। इस दौरान अधिकारियों ने राजिम में उन स्थलों को चिन्हित करते हुए कलेक्टर श्याम धावड़े, एसपी एमआर आहिरे, जिला पंचायत सीईओ विनय लंगेह एवं वनमंडलाधिकारी के साथ चर्चा की। इस दौरान कुलेश्वर मंदिर और राजीव लोचन मंदिर तथा लोमश ऋषि आश्रम का सौंदर्यीकरण करने तथा वहां जरूरी सुविधाएं विकसित करने पर चर्चा की। वहीं 25 किमी परिधि के अंतर्गत पंचकोशी धाम यात्रा के प्रमुख स्थलों के मार्गों पर संकेतांक और मूलभूत सुविधाएं जैसे पेयजल, यात्री प्रतीक्षालय, पर्यटन सुविधा केंद्र स्थापित करने पर भी चर्चा की। मुख्य सचिव ने पर्यटन विभाग को 10 दिन के भीतर इस पर विस्तृत कार्य योजना बनाकर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। पूरे कार्य के समन्वय के लिए वन संरक्षक एसएसडी बढ़गैया को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
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