छत्तीसगढ़ / वन भूमि पर कब्जे को लेकर 3 गांवों के बीच झड़प, रेंजर और वनकर्मी से मारपीट



मारपीट के बाद ग्रामीणों को समझाते पुलिसकर्मी मारपीट के बाद ग्रामीणों को समझाते पुलिसकर्मी
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मारपीट के बाद ग्रामीणों को समझाते पुलिसकर्मीमारपीट के बाद ग्रामीणों को समझाते पुलिसकर्मी

  • गीदम क्षेत्र में ग्राम पंचायत समलूर और भूतपदर व जपोड़ी गांव के बीच चल रहा है सीमा विवाद
  • जपोड़ी व भूतपदर के ग्रामीणों से 93 फावड़ा और 6 कुल्हाड़ी जब्त, मारपीट को लेकर एफआर

Dainik Bhaskar

Nov 08, 2019, 08:41 PM IST

दंतेवाड़ा. छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में सीमा विवाद को लेकर शुक्रवार को तीन गांवों के ग्रामीण आपस में भिड़ गए। ग्राम पंचायत समलूर और भूतपदर व जपोड़ी गांव के बीच चल रहा विवाद हिंसक हो गया। दो गुटों में बंटे ग्रामीण एक-दूसरे से मारपीट करते रहे। जो कोई बीच में आया उसे भी नहीं छोड़ा। इस
दौरान बीच-बचाव करने पहुंचे गीदम रेंजर सतीश गुरला, समलूर के बीट गार्ड गोपीनाथ मौर्य और रास्ते से गुजर रहे बिंजाम निवासी ग्रामीण सुरेश नेताम से ग्रामीणों ने मारपीट की। बाद में गीदम थाने से पहुंची पुलिस फोर्स ने मामला शांत करवाया।

तीर-धनुष और पारंपरिक हथियार लेकर पहुंचे ग्रामीण, किया चक्काजाम

  1. कासोली ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम भूतपदर, जपोड़ी व ग्राम पंचायत समलूर के लोगो के मध्य विवाद हो गया और विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों ही तरफ के लोग अपने अपने पारंपरिक औजार, तीर-धनुष के साथ विवादास्पद जगह पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने राष्ट्रीय राजमार्ग 63 पर चक्काजाम कर दिया। समलूर के लोगों का कहना है कि भूतपदर,जपोड़ी व बड़े कारली के लोग हमारी देव भूमि में
    अवैध कटाई कर जबरदस्ती कब्जा कर रहे हैं। वन प्रबंधन समिति समलूर रिजर्व फॉरेस्ट 1341 की देख रेख करती है। यही आरोपी दूसरे गांव के लोग उनपर लगा रहे हैं।

  2. ग्रामीण जिसे अपनी जमीन बता रहे, वन विभाग उसे रिजर्व फॉरेस्ट का एरिया कह रहा

    दरअसल, समलूर से लगी वन विभाग की जमीन को भूतपदर व जपोड़ी गांव ग्रामीणअपना बता रहे हैं। उनका कहना है कि यह गांव उनकी देव सरहद में आता है। वहीं समलूर वासी इसे अपने गांव की सरहद का हिस्सा बताकर आपत्ति जता रहे थे। जिसको लेकर सारा विवाद हुआ। उधर, वन विभाग का कहना है कि वह रिजर्व फॉरेस्ट का एरिया है। इस हिस्से में 3 लोगों को वन भूमि पट्टा जारी होने का दावा ग्रामीण कर रहे हैं, जबकि विभाग के पास इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। अतिक्रमण की कोशिश में वन विभाग ने ग्रामीणों से 93 फावड़ा और 6 कुल्हाड़ी जब्त की है।

  3. आबकारी मंत्री का सुझाव भी नहीं सुलझा पाया समस्या

    कुछ माह पहले समलूर पहुंचे प्रदेश के आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने जमीन विवाद को सुलझाने के लिए पारंपरिक तरीका अपनाने का सुझाव दिया। उनके  अनुसार, समलूर के ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से गांव की दैवीय सीमा का निर्धारण किया था, लेकिन इस प्रक्रिया में विरोधी पक्ष के ग्रामीण शामिल नहीं हुए। इसके चलते विवाद सुलझ नहीं पाया। यह विवाद कई सालों से चल रहा
    है। विवाद नहीं सुलझने के कारण शुक्रवार को कब्जे को लेकर इसने हिंसक रूप ले लिया।

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