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छत्तीसगढ़  / कांग्रेस 12 सीटें बचाने, भाजपा 6 का आंकड़ा बढ़ाने के लिए कर रही संघर्ष



Chhattisgarh Election: Congress struggles to save 12 seats, increase BJP 6
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Chhattisgarh Election: Congress struggles to save 12 seats, increase BJP 6

  • पहले चरण की 18 सीटों पर थमा चुनाव प्रचार, दोनों दलों के लिए चुनौती
  • भाजपा में सीएम डॉ. रमन सिंह, दो मंत्री, एक सांसद की प्रतिष्ठा दांव पर 

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 09:51 AM IST

कौशल स्वर्णबेर/मनोज व्यास। रायपुर. राज्य में पहले चरण की 18 सीटों पर शनिवार को चुनाव प्रचार थम गया। 18 में से कांग्रेस के पास 12 और भाजपा के पास 6 सीटें हैं। यही दोनों के लिए चुनौती भी हैं। कांग्रेस 12 सीटें बरकरार रखने के लिए जद्दोजहद कर रही है तो भाजपा 6 के आंकड़े से बढ़ने के लिए उठापटक कर रही है।

 

18 सीटों में भाजपा के मुख्यमंत्री और स्टार प्रचारक डॉ. रमन सिंह समेत दो मंत्री केदार कश्यप और महेश गागड़ा व सांसद विक्रम उसेंडी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है तो कांग्रेस से स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला, उप नेता प्रतिपक्ष कवासी लखमा और कांग्रेस अजजा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनोज मंडावी प्रतिष्ठा बचाने में लगे हैं। 

बस्तर पर फोकस : इस बार भी भाजपा के लिए विकास ही सबसे बड़ा मुद्दा 

  1. 2003 और 2008 के मुकाबले 2013 में भाजपा को बस्तर से बड़ा झटका लगा था। 11 सीटों से सिमटकर भाजपा चार पर रह गई थी। इस वजह से भाजपा ने तीसरी बार सरकार बनाने के बाद से ही बस्तर पर फोकस किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से लेकर तमाम केंद्रीय मंत्रियों के दौरे हुए। राष्ट्रीय योजना का शुभारंभ हुआ। इस बार भी भाजपा के लिए विकास ही सबसे बड़ा मुद्दा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपनी चुनावी सभा में जगदलपुर में एयरपोर्ट और रेललाइन पर ही जोर दिया। अपने कार्यों और योजनाओं को लेकर ही भाजपा जनता के बीच पहु़ंच रही है। 

  2. नक्सली बड़ा मुद्दा : कांग्रेस झीरम घाटी हत्याकांड को हर जगह उठा रही है 

    2013 विधानसभा चुनाव से पहले झीरम घाटी में हुए नक्सल हमले में कांग्रेस के दिग्गज नेता शहीद हो गए थे। नक्सल हिंसा का असर पिछली बार देखने को मिला था। इस बार भी झीरम कांड बस्तर में बड़ा मुद्दा है। कांग्रेस लगातार नक्सली घटनाओं को लेकर जनता के बीच जा रही है। पांचवीं अनुसूची का भी मुद्दा उठाया जा रहा है। कांग्रेस लोगों को यह बता रही है कि जल, जंगल और जमीन उनकी है। उनसे पूछे बिना वे नहीं लेंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी अपनी सभा में झीरम हमले का जिक्र किया तो आदिवासियों के हक की बात की। बस्तर के बड़े प्रोजेक्ट्स में फंसी जमीन लौटाने की बात कही जा रही है। 

  3. टिकट भी काटे : कांग्रेस 3, भाजपा ने एक विधायक का टिकट काटा 

    2013 चुनाव में पहले चरण में कांग्रेस ने जबर्दस्त प्रदर्शन किया था। बस्तर में एक सीट से बढ़कर कांग्रेस सात सीटों पर पहुंच गई थी, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के गृह जिले राजनांदगांव की छह में से चार सीटों पर कब्जा किया था। इस बार बस्तर की दस सीटों पर फोकस कर कांग्रेस ने कांकेर से विधायक का टिकट काटकर रिटायर्ड आईएएस को टिकट दिया है। राजनांदगांव से भी दो विधायकों को टिकट काटा है। इसके विपरीत भाजपा ने अंतागढ़ को छोड़कर बाकी जीते हुए विधायकों को फिर से मौका दिया है। हालांकि भाजपा ने छह सीटों पर अपने प्रत्याशी बदले भी हैं। 

  4. पहला चरण अहम : 18 सीटों के रुझान से तय होगी अगली 72 सीटों की दिशा 

    भाजपा और कांग्रेस के लिए पहला चरण इसलिए अहम है, क्योंकि पिछली बार के रुझान को देखकर भाजपा ने रणनीति बदली और मैदानी इलाकों से जीत हासिल की थी। इसके विपरीत कांग्रेस पहले चरण के अच्छे प्रदर्शन के बाद मैदानी इलाकों में अच्छा काम नहीं कर पाई, इसलिए हार का सामना करना पड़ा। इस बार पहले चरण के मतदान के 8 दिनों बाद दूसरे चरण का मतदान होना है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह पहले चरण में अपनी सीट से फ्री हो जाएंगे। इसके विपरीत कांग्रेस के सभी प्रमुख नेता भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव और डॉ. चरण दास महंत की सीटों पर दूसरे चरण में मतदान होना है।

  5. कल इन 18 सीटों पर होना है मतदान 

    पहले चरण की इन 18 सीटों पर 12 नवंबर को मतदान होना है। इनमें बस्तर की 12 सीटें अंतागढ़, भानुप्रतापुर, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव, केशकाल, बस्तर, चित्रकोट, जगदलपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर आैर कोंटा शामिल हैं। वहीं राजनांदगांव जिले की 6 सीटें राजनांदगांव, डोंगरगढ़, डोंगरगांव, खुज्जी, मोहला-मानपुर आैर खैरागढ़ शामिल हैं। 

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