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18 के फेर में फंसी 15 साल से सत्ता से बाहर कांग्रेस, अब तक तय नहीं हुए उम्मीदवारों के नाम

2 वर्ष पहले
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  • रायपुर से राष्ट्रीय राजधानी तक बैठकों का मैराथन, फिर भी 90 में से अब तक 72 पर ही नाम तय 
  • नामांकन की अंतिम तारीख को 4 दिन शेष, जीत के गुणा-भाग ने अटकाया टिकटों का मामला
  • भाजपा ने 89 सीटों पर घोषित किए प्रत्याशी, रायपुर उत्तर पर अभी सस्पेंस
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मोहनीश श्रीवास्तव। रायपुर. छत्तीसगढ़ में 12 और 20 नवंबर को दो चरणाें में वोटिंग है। दूसरे चरण के नामांकन की अंतिम तिथि 2 नवंबर है। लेकिन, प्रदेश की 18 सीटें कांग्रेस के लिए मुसीबत बनी हुई है। नामांकन में सिर्फ चार दिन का वक्त बचा है और 15 साल से सत्ता का वनवास झेल रही कांग्रेस इन 18 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम घोषित नहीं कर पाई है। 

 

इन सीटों पर नाम घोषित न होने पाने का बड़ा कारण कहीं जातिगत फैक्टर है तो कहीं बड़े नेताओं का विवाद बताया जा रहा है। बीतते समय ने दावेदारों की सांसे तेज कर दी हैं। जिन सीटों को लेकर मुश्किल हैं, उसमें धमतरी और कुरूद सीट को लेकर वरिष्ठ नेता ही समस्या बने हुए हैं। सूत्र बताते हैं कि वर्तमान में धमतरी सीट से कांग्रेस के गुरूमुख सिंह होरा विधायक हैं। अब पार्टी उन्हें कुरूद भेजना चाहती है। इसके दो कारण माने जा रहे हैं, पहला कि होरा की कुरूद में पकड़ मजबूत है और धमतरी में विकास को लेकर उनका विरोध हो रहा है।

 

वहीं, कुरूद से भाजपा के अजय चंद्राकर विधायक हैं। कांग्रेस से टिकट दावेदारों में गुरूमुख होरा के साथ रामपाल और जिला पंचायत अध्यक्ष नीलम चंद्राकर शामिल हैं। रामपाल पैराशूट कैंडिडेट हैं ऐसे में वो दावेदारी में पिछड़ सकते हैं। जहां तक बात नीलम चंद्राकर की है तो उनके बारे में बताया जा रहा है कि उन्होंने निर्वाचन फार्म भी ले लिया है।

 

हर बार विधायक बदल देती है कुरूद की जनता

धमतरी जिले की कुरूद विधानसभा सीट चुनावी दांवपेच का अखाड़ा रही है। हर बार यहां की जनता अपना विधायक बदल देती है। अगर उनका नेता उम्मीदों पर खरा ना उतरे तो बदलने में देरी नहीं करती। कुरुद विधानसभा सीट सामान्य सीट है। पिछले चुनाव में यहां पर अजय चंद्राकर ने कांग्रेस के लेखाराम साहू को करीब 23 हजार वोटों से हराया था। 

 

2013

अजय चंद्राकर (भाजपा)

वोट : 83190

लेखाराम साहू (कांग्रेस) 

वोट: 56013

2008

लेखाराम साहू (कांग्रेस) 

वोट: 64299

अजय चंद्राकर (भाजपा)

वोट: 58094

2003

अजय चंद्राकर (भाजपा) 

वोट :56247

भूलेश्वरी दीपा साहू (कांग्रेस) 

वोट: 53538

 

इन सीटों पर भी इस कारण से उलझन में कांग्रेस: 

बाकी 16 सीटों पर भी विवाद कम नहीं है। हालांकि यहां पर सबसे बड़ा मुद्दा जातिगत समीकरण का है। इसमें

  • रायपुर उत्तर : कांग्रेस इस इंतजार में है कि भाजपा के उम्मीदवार के सामने पार्टी कौन सा चेहरा लेकर आए। हालांकि कुलदीप जुनेजा, पार्षद अजीत कुकरेजा और प्रमोद दुबे ने अपनी दावेदारी यहां से पेश कर दी है। 
  • रायपुर दक्षिण :  शहर के वरिष्ठ पत्रकार रुचिर गर्ग पैराशूट कैंडिडेट के तौर पर उभरे हैं। पार्टी में आते समय कार्यकर्ताओं ने उनका जमकर स्वागत किया था। अब उनके समर्थक टिकट की मांग कर रहे हैं तो पुराने उलझ गए हैं। 
  • बेमेतरा 2012 में ही जिला बने बेमेतरा की विधानसभा सीट हमेशा से कांग्रेस के कब्जे में रही। हालांकि वर्ष 2013 के चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस के निवर्तमान विधायक ताम्रध्वज साहू को हराया औरअवधेश चंदेल विधायक चुने गए। सांसद बन चुके ताम्रध्वज साहू अपने बेटे को यहां से टिकट दिलाना चाहते थे, लेकिन बात हाथ से निकलती देख अब उन्होंने खुद की दावेदारी ठोक दी है। 
  • कोंटा:  यहां से पूर्व मुख्यमंत्री और छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस सुप्रीमो अजीत जाेगी की पत्नी रेणु जोगी कांग्रेस से विधायक हैं। इन दिनों चल रहे हालात और पति के साथ कई बार मंच पर नजर आ चुकी रेणु जोगी पर पार्टी की नजर थोड़ी टेड़ी है। ऐसे में नए दावेदार की तलाश और उनके विरोध के सामने पार्टी अटक गई है। 
  • बिलासपुर: यहां से भाजपा के वरिष्ठ नेता अौर सूबे के कद्दावर मंत्री अमर अग्रवाल विधायक हैं। वह 4 बार से लगातार चुनाव जीत रहे हैं और 15 सालों से सरकार में मंत्री हैं। उनके सामने कांग्रेस को अपना चेहरा तय करने में दिक्कत आ रही है। वहीं इस बार जोगी कांग्रेस भी मुसीबत बनकर उभर रही है। 
  • धरसींवा : यहां से भी भाजपा के देवजी भाई 15 साल से विधायक हैं। कांग्रेस के लिए यह सीट नेताओं की पसंद की चक्कर में अटक गई है। एक ओर छाया वर्मा ने दावेदारी की है, वहीं रायपुर की मेयर रह चुकी किरणमयी नायक भी बड़ी दावेदार बनकर उभरी हैं। 
  • रायगढ़ : इस सीट पर कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा भी फंस गई है। हालांकि भाजपा ने वर्तमान विधायक रोशनलाल काे फिर प्रत्याशी बनाया है, लेकिन इससे पूर्व विधायक विजय अग्रवाल नाराज हो गए हैं और उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। अब भाजपा के बागी हुए नेता ने कांग्रेस का भी जातिगत समीकरण बिगाड़ दिया है। ऐसे मेंं फिर नए सिरे से प्रत्याशी चयन में फंस गई है। 
  • बिल्हा : कांग्रेस जिन्हें अपना चेहरा बनाना चाहती वही वर्तमान विधायक सियाराम कौशिक बागी हो गए। उन्होंने जोगी कांग्रेस का हल पकड़ा और नामांकन फार्म ले लिया। अब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी समस्या दावेदारों की भीड़ से सही चेहरा तलाशने की है। 
  • गुंडरदेही : आरके राय के जोगी कांग्रेस में जाने से कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। अब जोगी कांग्रेस ने राय को अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं कांग्रेस के घनाराम साहू ने निर्वाचन फार्म ले लिया है। ऐसे में कांग्रेस के सामने असमंजस की स्थिति है। 
  • बसना : यहां से उम्मीदवार के नाम को लेकर ही कांग्रेस के लिए संकट हो गया है। वह समझ नहीं पा रही है कि हारे हुए उम्मीदवार पर फिर दांव लगाया जाए या फिर नया चेहरा सामने लेकर आएं। 
  • लैलूंगा : यहां पर जातिगत समीकरण और उस पर दावेदारों की भीड़ परेशानी का कारण बन गई है। कांग्रेस समझ नहीं पा रही कि दावेदारों के उठते इस शोर में किसे टिकट देकर प्रत्याशी तय करें। 

यही हाल कांग्रेस के साथ प्रेमनगर, जैजैपुर, संजारी-बालोद, वैशाली नगर और नवागढ़ को लेकर भी है।

 

इन सीटों पर कई-कई दावेदार हैं। कुछ सीटें ऐसी भी हैं जहां जातिगत समीकरण बहुत काम करता है। समस्या ये आ रही है कि जहां जातिगत समीकरण काम करता है, वहां भी कई दावेदार सामने अा रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस को उम्मीदवार तय करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

रवि भोई, वरिष्ठ पत्रकार, रायपुर।

 

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