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पॉलिटिक्स ऑन हाईवे-2 / चेहरा कौन, मुद्दा क्या... जैसे सवाल पूछते ही लोग कहते हैं- जिसने बूथ जीता वही बादशाह, दारू-मुर्गा तो देंगे ही



छत्तीसगढ़ चुनाव : डमी फोटो छत्तीसगढ़ चुनाव : डमी फोटो
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छत्तीसगढ़ चुनाव : डमी फोटोछत्तीसगढ़ चुनाव : डमी फोटो

  • एनएच से लगी कुरुद, धमतरी, सिहावा और कांकेर विधानसभा सीटों की लाइव रिपोर्ट 
  • लोगों के लिए मुद्दा और सवालों के मायने नहीं, चेहरे बदलते  रहते हैं, स्थिति वैसी ही 

Dainik Bhaskar

Oct 14, 2018, 12:23 PM IST

निकष परमार। रायपुर. छत्तीसगढ़ में 12 और 20 नवंबर को मतदान होंगे। 11 दिसंबर को नई सरकार का फैसला होगा। पिछले 15 वर्षों से प्रदेश में भाजपा की सरकार है। इन वर्षों में आम लोगों की अपेक्षाएं कितनी पूरी हुईं या मुद्दों को लेकर उठ रहे सवाल ज्यों के त्यों हैं। इन सभी सवालों के तह तक जाने के लिए हमने राज्य के उन विधानसभा सीटों को चुना जो नेशनल हाईवे से लगते हैं।


एनएच से लगी कुरुद, धमतरी, सिहावा और कांकेर विधानसभा के गांवों में लोगों से जब चुनाव पर बात की गई तो उनके लिए चेहरा कौन, मुद्दा क्या होगा मायने नहीं रखता। उनका सीधा कहना था-जिसने बूथ जीत लिए वही बादशाह होगा, बाकि दारू और मुर्गा तो नेता बांटते ही रहते हैं..पढ़ें चार सीटों की रिपोर्ट।

कुरुद विधानसभा : काम तो हुुए हैं, लेकिन कुछ गांव अब भी विकास से अछूते

  1. तस्वीर स्वास्थ्यमंत्री के क्षेत्र की हैं। यहां भाखारा गांव के बाहर ऐसा नजारा आम है।

     

    पुराने धमतरी रोड पर भखारा कृषि प्रधान साहू बहुल बस्ती है। स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर का इलाका। पानी भरपूर है। कुछ किसान डबल फसल लेते हैं। विधानसभा मुख्यालय में बस्ती से होकर चौड़ी सड़क बनी है। कुछ को छोड़ दें तो करीब हर गांव में पक्की सड़कें बनी हैं। सिहाद में 132 केवी का सब स्टेशन शुरू हुआ है, और भी कई सब स्टेशन बने हैं। बिजली की समस्या हल हुई है। कानामुका के रपटे की जगह बड़ा पुल बन रहा है। पूर्व विधायक लेखराम साहू के गांव सिलौटी में कालेज खुल गया है। शराब दुकानों में लगे मेले बताते हैं कि इसका चलन भरपूर है। नारी गांव को छोड़ दें तो कहीं इसका कोई विरोध नहीं नजर आता। चर्चा है कि चंद्राकर के तोड़ के रूप में इसी समाज से कांग्रेस भी कोई प्रत्याशी उतारेगी। 

    जीते हारे
    अजय चंद्राकर लेखराम साहू
    वोट : 83,190 वोट: 56,013 

  2. धमतरी विधानसभा : गंगरैल का पानी रायपुर को, यहां बांध से लगे खेत प्यासे

    धमतरी के लोगों को पड़ोसी विधानसभा क्षेत्र कुरुद में हुआ काम दिख रहा है। कुरुद में एम्स का रूरल रिसर्च सेंटर तक खुल गया है। कॉलेज में विषय और फैकल्टी धमतरी से बेहतर है। कुरुद जैसा स्टेडियम नहीं है। धमतरी जिले की हालत देख यहां इन दिनों प्रचलित मजाक ध्यान आता है कि कुरुद को जिला घोषित कर धमतरी को उसकी तहसील बना देना चाहिए। इधर, किसानों में नाराजगी है कि गंगरेल बांध का पानी रायपुर-भिलाई तक को जा रहा है, लेकिन बांध से लगे खेत प्यासे हैं। 2009 में नक्सलियों ने पुलिस की गाड़ी उड़ा दी थी, जिसमें 11 जवान शहीद हो गए थे। तब से धमतरी जिला भी नक्सल प्रभावित जिलों में शामिल हो गया है। 

    जीते हारे
    गुरुमुख होरा इंदर चोपड़ा
    वोट : 70,960 60,460

     

  3. कांकेर विधानसभा : अब चौकन्ने हो जाइए, आप बस्तर में हैं

    लोगों का जीवन जंगल से जुड़ा है। गांवों में उज्जवला योजना के सिलेंडर रीफिल नहीं करवाए जा रहे। लोगों का कहना है- इतने पैसे नहीं हैं।

     

    धमतरी से कांकेर जाने के दौरान मचांदुर बस्तर का पहला गांव पड़ता है। यह कभी छोटी सी बस्ती हुआ करती थी। अब यहां लैंप पोस्ट से सजा हाईवे है। चारामा के बस स्टैंड पर अलग-अलग पेशे से जुड़े कुछ मित्र बता रहे हैं..चुनाव में इस बार भी पिछले मुद्दे ही हैं। बस्तर रोड पर दसेक किलोमीटर बाद जंगल शुरू हो जाता है। अचानक नजर झाड़ियों के पीछे एके 47 लिए एक साए पर जाती है। कैमोफ्लाज ड्रेस में वह सुरक्षा बल का जवान है। लेकिन दिल की धड़कनें तेज हो चुकी हैं। इससे पहले कि आप सामान्य हो सकें, एक और सशस्त्र जवान नज़र आता है। यह सिलसिला कुछ दूर तक चलता है। जगतरा के आसपास फिर चौकन्ने जवान। बस्तर में फोर्स भेजी जा रही है। नक्सली चुनाव बहिष्कार के लिए धमकी जो दे रहे हैं। 

    जीते हारे
    शंकर ध्रुवा संजय कोडपी
    वोट : 50,586 45,961

     

  4. सिहावा विधानसभा : हर चुनाव में बदले हैं नतीजे, इस बार नए चेहरे की मांग

    कुरुद से गाय खरीदकर सिहावा जा रहे लोगों ने जेब से बिल निकालकर दिखा दिया कि ये देखो, सब वैध है। गोरक्षा वाले रोकते हैं।

     

    सिहावा में हाल ही में मां महामाया के दर्शन के लिए आकर अमित शाह ने इस क्षेत्र को राजनीतिक चर्चाओं में ला दिया। स्थानीय लोग नया चेहरा चाहते हैं। सीतानदी टाइगर रिजर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में गिना जाता है। नक्सलियों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया है। चमेदा में सब स्टेशन बड़ी राहत है। इससे डेढ़- दो सौ गांवों की लो वोल्टेज की समस्या दूर हुई है। चंद सड़को को छोड़ दें तो विकास के मामले में इलाका पिछड़ा है। सोंढूर डैम तो बना, लेकिन नहर बनाने के लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिल रहा है। इसके चलते 45-50 गांवों के हजारों एकड़ खेत असिंचित हैं। सिंचाई इस इलाके का प्रमुख मुद्द

    जीते हारे
    श्रवण मरकाम अंबिका मरकाम
    वोट : 53,894 46,407

     

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