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छत्तीसगढ़  / इस चुनाव की पॉलिटिक्शनरी; ए फॉर अंतर्कलह, बी फॉर बगावत, सी फॉर चुनौती और डी फॉर डैमेज कंट्रोल



Chhattisgarh Election: Political dictionary of this election
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Chhattisgarh Election: Political dictionary of this election

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 11:47 PM IST

रायपुर (मनोज व्यास) .  भाजपा और कांग्रेस के लिए चुनाव अपनों में अंतर्कलह, टिकट नहीं मिलने वालों की बगावत, हर हाल में जीतने की चुनौती और डैमेज कंट्रोल में ही सिमट गया है, लेकिन जोगी कांग्रेस और बसपा गठबंधन ने कई सीटों पर जबर्दस्त त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति पैदा कर दी है। भाजपा बूथ मैनेजमेंट और कांग्रेस पुराने कार्यकर्ताओं के दम पर जीत के लिए आश्वस्त हैं। 

 

 

हालांकि, सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के ही विधायक एंटी इंकम्बेंसी से जूझ रहे हैं। जोगी परिवार का फोकस अपने परिवार की तीन सीटों पर है। दोनों प्रमुख पार्टियों ने जातिगत समीकरण को साधने के हिसाब से टिकट बांटे हैं। ऐसे में कौन सी जाति किस दल को जनमत देती हैं, वह भी काफी अहम होगा।

 

चुनावी माहौल में कुछ खास शब्द हर किसी की जुबां से निकलते हैं। इन शब्दों में ही चुनाव में हार-जीत का गणित छिपा रहता है। इन्हीं शब्दों के जरिए समझिए की इस बार के चुनाव में क्या चल रहा है... 

 

छत्तीसगढ़ की चुनावी फिजां में तैर रहे शब्दों से ऐसे आप जानिए इस चुनाव में कहां-क्या चल रहा... 

  • अंतर्कलह: कांग्रेस ने करीब दो दर्जन सीटों पर अंतर्कलह को खत्म करने की कोशिश की है। भाजपा ने दर्जनभर सीटों पर मान-मनौवल कर कलह खत्म करने की कोशिश की है। 
  • भितरघात: कांग्रेस को राजनांदगांव, रायपुर दक्षिण, रायपुर उत्तर जैसी सीटों पर डर तो भाजपा को दुर्ग ग्रामीण, पाटन, बसना, खरसिया अादि सीटों पर डर सता रहा है। 
  • पैराशूट: बिलासपुर में पिछले डेढ़ से सक्रिय शैलेष पांडेय तो राजनांदगांव में करुणा को विरोधियों ने पैराशूट बताया है। खरसिया में ओपी चौधरी को भी पैराशूट उम्मीदवार माना जा रहा है। 
  • बगावत: रायगढ़ से भाजपा के पूर्व विधायक विजय अग्रवाल, बसना से संपत अग्रवाल बागी हो गए हैं। साजा सीट से भी एक बागी ने भाजपा के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। कांग्रेस भी दो-तीन सीटाें पर बगावत से जूझ रही है। 
  • जातिगत समीकरण: छत्तीसगढ़ की 39 सीटें एसटी-एससी हैं, लेकिन ओबीसी की 95 जातियों में से सबसे ज्यादा आबादी के प्रभाव से 22 साहू प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। भाजपा से सर्वाधिक 14 साहू चुनाव लड़ रहे हैं। 
  • त्रिकोणीय संघर्ष: राज्य में जोगी कांग्रेस और बसपा के बीच गठबंधन के बाद दिग्गज नेताओं की करीब 25 सीटों पर त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति है। अब तक के चुनाव भाजपा-कांग्रेस के बीच ही होते रहे हैं। 
  • राजनीतिक घराने: दर्जनभर राजनीतिक घराने चुनाव मैदान में हैं। सिंहदेव, सिंह, वोरा, जूदेव, जोगी आदि घराने सक्रिय हैं तो कई राजनीतिक घराने धीरे-धीरे राजनीतिक नक्शे से गायब होते जा रहे हैं। 
  • बूथ मैनेजमेंट: भाजपा ने प्रोफेशनल्स हायर किए हैं, जो वोटर लिस्ट की पर्ची भेजने से लेकर झंडे-बैनर तक की निगरानी कर रही। पन्ना प्रभारी बनाए गए हैं। कांग्रेस ने अपने पुराने कार्यकर्ताओं को मैनेजमेंट का काम दिया है।
  • लामबंद: सिंधी समाज ने लामबंद होकर दोनों दलों के लिए चेतावनी दी कि जो समाज के नेता को टिकट देगा, उसे वोट देंगे। भाजपा ने फिर श्रीचंद सुंदरानी को टिकट दिया। साहू समाज का भी प्रभाव दिखा। 
  • वोट बैंक: कांग्रेस ने एससी वोट साधने सतनामी समाज के गुरु बालदास को साथ जोड़ा तो भाजपा ने कबीर पंथ के गुरु प्रकाश मुनि और शदाणी दरबार में मत्था टेककर वोटबैंक को भुनाने की कोशिश की। 
  • डैमेज कंट्रोल: मुख्यमंत्री रमन सिंह और सौदान सिंह ने बागियों को बातचीत कर मनाया। रामप्रताप सिंह को जिम्मेदारी दी गई। कांग्रेस से पीएल पुनिया, भूपेश बघेल, सिंहदेव और महंत बातचीत कर रहे हैं। 
  • वोटकटवा: जोगी कांग्रेस-बसपा का गठबंधन कुछ सीटों पर दोनों दलों को नुकसान पहुंचा सकता है। इनमें राज्य की तकरीबन 25 सीटें शामिल हैं। कुछ सीटों पर प्रादेशिक दल और निर्दलीय प्रत्याशी भी असर डालेंगे। 

ये शब्द भी चर्चा में : आचार संहिता, खेमेबाजी, गठबंधन, सरपरस्ती, आका, परिवारवाद, सिफारिश, दलबदल, समर्थन, मुद्दा, एंटी इन्कम्बेंसी, बहिष्कार, निर्वाचन तत्काल। 

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