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उइके की भाजपा वापसी के मायने / 90 सीटों पर कौन कांग्रेस प्रत्याशी, सब जानते हैं उइके, भाजपा के लिए यह रणनीतिक बढ़त



ये तस्वीर अक्टूबर 2015 में कटघोरा के गांव हुंकरा की है। यूं तो रामदयाल उइके 2000 में जोगी के लिए सीट छोड़ने के बाद से सुर्खियों में थे। जोगी से उनकी निकटता चर्चा में रही। बीच-बीच में जोगी के खिलाफ बयान देकर वे इन चर्चाओं पर थाह पाने की कोशिशें भी करते रहे। हुंकरा की सभा में जोगी ने उइके की तारीफ करते हुए कहा था कि उइके मेरा लक्ष्मण भाई है। हर मुसीबत में मेरा साथ दिया। मेरे लिए मारवाही सीट छोड़ी। ये तस्वीर अक्टूबर 2015 में कटघोरा के गांव हुंकरा की है। यूं तो रामदयाल उइके 2000 में जोगी के लिए सीट छोड़ने के बाद से सुर्खियों में थे। जोगी से उनकी निकटता चर्चा में रही। बीच-बीच में जोगी के खिलाफ बयान देकर वे इन चर्चाओं पर थाह पाने की कोशिशें भी करते रहे। हुंकरा की सभा में जोगी ने उइके की तारीफ करते हुए कहा था कि उइके मेरा लक्ष्मण भाई है। हर मुसीबत में मेरा साथ दिया। मेरे लिए मारवाही सीट छोड़ी।
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ये तस्वीर अक्टूबर 2015 में कटघोरा के गांव हुंकरा की है। यूं तो रामदयाल उइके 2000 में जोगी के लिए सीट छोड़ने के बाद से सुर्खियों में थे। जोगी से उनकी निकटता चर्चा में रही। बीच-बीच में जोगी के खिलाफ बयान देकर वे इन चर्चाओं पर थाह पाने की कोशिशें भी करते रहे। हुंकरा की सभा में जोगी ने उइके की तारीफ करते हुए कहा था कि उइके मेरा लक्ष्मण भाई है। हर मुसीबत में मेरा साथ दिया। मेरे लिए मारवाही सीट छोड़ी।ये तस्वीर अक्टूबर 2015 में कटघोरा के गांव हुंकरा की है। यूं तो रामदयाल उइके 2000 में जोगी के लिए सीट छोड़ने के बाद से सुर्खियों में थे। जोगी से उनकी निकटता चर्चा में रही। बीच-बीच में जोगी के खिलाफ बयान देकर वे इन चर्चाओं पर थाह पाने की कोशिशें भी करते रहे। हुंकरा की सभा में जोगी ने उइके की तारीफ करते हुए कहा था कि उइके मेरा लक्ष्मण भाई है। हर मुसीबत में मेरा साथ दिया। मेरे लिए मारवाही सीट छोड़ी।

  • बड़े नेताओं के विरोध के बाद भी पुनिया ने ही रामदयाल उइके को बनाया था कार्यकारी अध्यक्ष 
  • शाह की सभा से लग रहे थे वापसी के कयास देर रात होटल में चलती रही कोर ग्रुप की बैठक 

Dainik Bhaskar

Oct 14, 2018, 09:45 AM IST

कौशल स्वर्णबेर/सूर्यकांत चतुर्वेदी। बिलासपुर/। रायपुर. कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष का पद छोड़ भाजपा में आए रामदयाल उइके जानते हैं कि कांग्रेस प्रदेश की 90 सीटों में किसे उम्मीदवार बना रही है। कांग्रेस की हर चुनावी रणनीति में वे शामिल रहे हैं। इस लिहाज से भाजपा ने रणनीतिक तौर एक बढ़त तो ले ली है।

 

चार बार लगातार जीत चुके हैं चुनाव 

उइके उन चंद नेताओं में हैं जो लगातार चार बार चुनाव जीत चुके हैं। उइके पाली-तानाखार से लगातार तीन बार जीते। गोंगपा से कांग्रेस की बढ़ती नजदीकियों को देखते हुए उइके का मन बदल गया। भाजपा में शामिल होने के बाद उइके ने कहा 'मैं कांग्रेस में बिना पॉवर का कार्यकारी अध्यक्ष था। जब तक बघेल के जैसे लोग अध्यक्ष रहेंगे, तब तक पार्टी का कुछ नहीं हो सकता। मैं अपनी बात किसे बताता। चार दिन से राहुल गांधी से मिलने का समय मांग रहा था लेकिन नहीं मिला। भाजपा में कार्यकर्ता के रूप में काम करूंगा। टिकट की कोई मंशा नहीं है।' 


भाजपा के लिए फायदेमंद ऐसे

  1. रामदयाल उइके, कार्यकारी अध्यक्ष होने के कारण प्रत्याशी चयन के लिए कांग्रेस चुनाव समिति की अंतिम बैठक में भी वे मौजूद थे। किस सीट पर सिंगल नाम है, कहां पैनल, यह बखूबी जानते हैं। 
  2. अब तक विपक्षी दल के टिकट वितरण के बाद अपने प्रत्याशी घोषित करने वाली भाजपा को पता चल गया है कि कौन, कहां से कांग्रेस प्रत्याशी होगा। उनके काट भी ढूंढ़े जाने लगे हैं। 
  3. उइके मरवाही के पूर्व विधायक हैं। ऐसे में जोगी के खिलाफ उन्हें उतारना भी भाजपा की रणनीति हो सकती है। 

 

कांग्रेस-गोंगपा दोस्ती की राह आसान, भाजपा की यह रणनीति पाली-तानाखार सीट के लिए 

18 साल बाद ठीक उसी अंदाज में विधायक रामदयाल उइके का भाजपा प्रवेश हुआ, जैसे 2000 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी की मौजूदगी में कोटमी में वे कांग्रेस में आए थे। इस बार उइके की वापसी के लिए अमित शाह, डाॅ. रमन सिंह समेत 10 दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में बिलासपुर के होटल में देर रात तक मंथन चला। बृजमोहन अग्रवाल को रायपुर से बुलाया गया। 

 

18 साल पहले जोगी के लिए छोड़ी थी मरवाही सीट

उइके ने 18 साल पहले जोगी के लिए मरवाही सीट छोड़ी थी। अब कहा जा रहा है कि उन्होंने पाली-तानाखार सीट बचाने के लिए भाजपा ज्वाइन की है। इधर उइके के जाने से कांग्रेस-गोंगपा के बीच गठबंधन की राह आसान हो गई है। गोंगपा से गठबंधन होने पर कांग्रेस को सोनहत, मनेंद्रगढ़, बैकुंठपुर, प्रेमनगर, प्रतापपुर, बिंद्रानवागढ़, कांकेर, सिहावा आदि सीटों पर फायदा हो सकता है। गोंगपा प्रमुख हीरासिंह मरकाम के मुताबिक 14 अक्टूबर को दिल्ली में आदिवासी समुदाय की बैठक के बाद ही कांग्रेस आलाकमान से चर्चा होगी। 


ऐसे बदले समीकरण 

  1.  गोंगपा अध्यक्ष मरकाम पिछले तीन चुनावों से तानाखार सीट से दूसरे नंबर हैं। उइके की सहमति के अभाव में गोंगपा-कांग्रेस का गठबंधन असंभव था। 
  2. 17 मई 2018 को कोटमी में राहुल गांधी की मौजूदगी में गोंगपा व एकता परिषद के साथ गठबंधन की घोषणा हुई थी। तभी से उइके के सुर बदल गए थे। उइके को जोगी का सिपहसालार माना जाता है। 
  3. जोगी कांग्रेस बनी तो कांग्रेस ने उइके को जोड़े रखने के लिए कार्यकारी अध्यक्ष बनाया। जोगी ने उइके को तानाखार से उतारा था। लेकिन कांग्रेस इस बार उन्हें मरवाही से उतारने वाली थी, जो राजनीतिक दृष्टि से घाटे का सौदा होता। 
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