अमित गुप्ता, को-फाउंडर एवं सीईओ, ट्रेंडिंग बेल्स

Raipur News - इन्वेस्टमेंट ऑप्शन

Bhaskar News Network

Sep 13, 2019, 07:15 AM IST
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इन्वेस्टमेंट ऑप्शन

अमित गुप्ता, को-फाउंडर एवं सीईओ, ट्रेंडिंग बेल्स

किसी भी देश के शेयर बाजार आम तौर पर उसकी अर्थव्यवस्था किस तरह का प्रदर्शन कर रही है इसकी झलक दिखलाते हैं। शॉर्ट टर्म में शेयर बाजार सेंटीमेंट और डिमांड/सप्लाई के कारकों से प्रभावित हो सकते हैं। लेकिन लॉन्ग टर्म में शेयर बाजार बुनियादी कारकों के आधार पर चलते हैं। एक स्थिर सरकार आर्थिक सुधारों और कारोबारी गतिविधियों में सुधार के लिए तेजी से फैसले ले सकती है। ऐसे निर्णय बाजार के लिए सकारात्मक होते हैं। केंद्रीय बजट में सरकार द्वारा किए आर्थिक सुधारों, टैक्स रिफॉर्म का ऐलान किया। हाल में सरकारी बैंकों के विलय का भी निर्णय लिया है। ऐसे फैसले शेयर बाजार पर जल्द और व्यापक सकारात्मक असर डालते हैं।

भारत में खपत बहुत अधिक है। यहां सिर्फ खाद्यान्न उत्पादन तक सीमित नहीं है; एजुकेशन, हेल्थकेयर, बिजली, ऑटो, दूरसंचार जैसे कई उद्योग क्षेत्र हैं जहां खपत बहुत अधिक है। लेकिन इनकी डिमांड और सप्लाई के बीच अंतर बहुत अधिक है। इन क्षेत्रों में कारोबार की कई संभावनाएं हैं। कर्ज आसानी से मिलने पर इन क्षेत्रों का उत्पादन बढ़ेगा। इससे न सिर्फ इन क्षेत्र की कंपनियों का रेवेन्यू और मुनाफा बढ़ेगा। बल्कि नई नौकरियां और रोजगार पैदा होने से लोगों की खर्च करने की ताकत भी बढ़ेगी। कंपनियों की ओर से अच्छे वित्तीय आंकड़े पेश करने के साथ इनके शेयरों में तेजी देखने को मिलेगी। छोटे निवेशकों को गिरते बाजार में कम भाव पर अच्छी कारोबारी संभावनाओं वाली कंपनियों के शेयरों में निवेश करना चाहिए। हालात सुधरने पर एजुकेशन, हेल्थकेयर, बिजली, ऑटो जैसे विभिन्न कारोबारी संभावनाओं वाले क्षेत्र के शेयरों मेंे निवेश से अच्छा मिल सकता है।

अमेरिका-चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर न सिर्फ भारतीय शेयर बाजारों को, बल्कि विश्व अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर रहा है। हमारा मानना है कि यह घटनाक्रम शेयर बाजारों को शॉर्ट टर्म में ही प्रभावित करेगा। लॉन्ग टर्म में इसका शेयर बाजारों पर बहुत मामूली असर होगा।

फिलहाल अच्छी कारोबारी संभावनाओं वाली कंपनियों के शेयरों में निवेश करें

अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर घरेलू कंपनियों के लिए बड़ा मौका

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका-चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के चलते कई मल्टीनेशनल कंपनियां चीन से अपना उत्पादन अन्य देश में शिफ्ट करने का मन बना रही हैं। यहां भारत के लिए बड़ा मौका बन रहा है। यदि ये कंपनियां अपनी उत्पादन गतिविधियों को भारत में शिफ्ट करती हैं तो उनसे जुड़ी कंपनियों के शेयरों में जी तेजी देखने को मिलेगी।

- ये लेखकों के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।

संदीप सिक्का, ईडी व सीईओ, रिलायंस निप्पॉन लाइफ एएमसी

पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में रिटेल इन्वेस्टर्स ने निवेश करना शुरू किया है। लेकिन उन्हें अपने पोर्टफोलियो में निगेटिव रिटर्न मिला है। अर्थव्यवस्था में सुस्ती, अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर, भू-राजनैतिक तनाव, एनबीएफसी का नकदी का संकट आदि के बीच शेयर बाजार भारी उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहे हैं। इस दौरान भारतीय निवेशकों की विश्वास की परीक्षा भी हो रही है। पिछले कुछ मासिक सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिये निवेश का प्रवाह तेजी से बढ़ा है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में इसकी रफ्तार मंद पड़ी है। इसके बावजूद एसआईपी के निवेश में निरंतरता बनी हुई है। इसे रिटेल निवेशकों की एक बड़ी उपलब्धि कहा जा सकता है क्योंकि यह उनकी इन्वेस्टिंग अप्रोच में मैच्योरिटी को प्रदर्शित करता है।

उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक सोच रहे होंगे क्या उन्हें अपने एसआईपी को जारी रखना चाहिए या फिर इसे बंद कर देना चाहिए? यदि आप बाजार पर भरोसा रखें तो एसआईपी से लॉन्ग टर्म में अच्छा पैसा बना सकते हैं। बाजार में उतार-चढ़ाव असाधारण घटना नहीं है। इसे स्वस्थ वित्तीय बाजारों के लिए एक अभिन्न अंग के रूप में देखा जाता है। इसलिए निवेशकों को उतार-चढ़ाव के बीच निवेश के मौके तलाशते हुए निवेश जारी रखना चाहिए। बाजार शॉर्ट टर्म में अस्थिर बने रह सकते हैं। इससे निपटने के लिए एसआईपी एक बेहतरीन टूल हो सकता है। इससे आपको कम कीमत पर अधिक यूनिट हासिल करने में मदद मिलती है। साथ ही निवेश की लागत की एवरेजिंग भी कर सकते हैं। बाजार के बढ़त हासिल करने पर आपके पोर्टफोलियो का मूल्य बढ़ जाता है। साथ ही बढ़त के समय ऊंचे भाव पर यूनिट खरीदने की जरूरत भी नहीं होगी। मसनल, यदि आप एसआईपी जरिये हर महीने 10,000 रुपए निवेश कर रहे हैं। पहले महीने एनएवी 20 रुपए है, इसमें आपको 500 यूनिट मिलती हैं। अगले महीने भी बाजार गिरता है और एनएवी 16 रुपए हो जाता है तो आपको 625 यूनिट मिलेंगी।

बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बावजूद एसआईपी निवेश को जारी रखना चाहिए

नियमित बचत से लॉन्ग टर्म में बड़ी रकम बन सकती है

एसआईपी से आपको अपने वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बचत करने में भी मदद करता है। इसके जरिये आप लॉन्ग टर्म में एक अच्छी बड़ी रकम जोड़ सकते हैं। मसलन, यदि आप हर महीने 3,000 रुपए निवेश करते हैं तो यह मानते हुए कि सालाना 12% रिटर्न मिलेगा, 30 साल में 1.06 करोड़ रुपए जोड़ सकते हैं।

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