मुस्लिमाें के लिए जैसा मक्का है, वैसा ही हिंदुअाें के लिए अयोध्या

Raipur News - नई दिल्ली | अयोध्या विवाद पर सुप्रीम काेर्ट में मंगलवार को पांचवें दिन की सुनवाई हुई। पांच जजों की संविधान पीठ ने...

Bhaskar News Network

Aug 14, 2019, 07:35 AM IST
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नई दिल्ली | अयोध्या विवाद पर सुप्रीम काेर्ट में मंगलवार को पांचवें दिन की सुनवाई हुई। पांच जजों की संविधान पीठ ने रामलला विराजमान के वकील से पूछा कि विवादित जगह पर भगवान राम के जन्म का सही स्थान कौन-सा है? वकील ने कहा कि इलाहाबाद हाईकाेर्ट ने ढहाई गई मस्जिद के केंद्रीय गुंबद के नीचे वाली जगह काे जन्म स्थान माना था। हिंदू पक्ष ने कहा कि मुस्लिमाें के लिए जाे महत्व मक्का मदीना का है, हिंदुअाें के लिए वैसा ही महत्व अयाेध्या का है। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने रामलला विराजमान के वकील की दलीलाें पर अापत्ति जताई। धवन ने कहा कि यह लाेग हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के फैसले और रिपोर्ट ही दिखा रहे हैं। कोई सबूत नहीं रखा। इस पर चीफ जस्टिस गाेगाेई ने धवन को फटकारते हुए कहा कि अाप अपनी बारी पर ही दलीलें रखें। शेष|पेज 10



सुप्रीम काेर्ट लाइव
चीफ जस्टिस रंजन गाेगाेई की अध्यक्षता में पांच जजाें की संविधान पीठ ने सुबह 10.45 बजे सुनवाई शुरू की। मंगलवार काे रामलला विराजमान की अाेर से वरिष्ठ वकील के परासरन की दलीलें खत्म हाेने के बाद सीएस वैद्यनाथन ने दलीलें रखीं। पढ़िए लाइव कार्यवाही...

वैद्यनाथन: मैं इस बारे में दलीलें दूंगा कि हिंदू धर्म में जन्मस्थान कैसे देवता की तरह पूजनीय है। राम मंदिर के अस्तित्व और जमीन पर कब्जे काे लेकर भी मैं बातें रखूंगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन जजों की बेंच ने माना था कि विवादित जगह पर मंदिर था।

जस्टिस अशाेक भूषण: विवादित जगह पर कौन से क्षेत्र को भगवान राम का जन्म स्थान कहते हैं?

वैद्यनाथन: हाईकोर्ट ने मस्जिद के केंद्रीय गुंबद को राम जन्म का असली स्थान माना है। 16 दिसंबर 1949 से पहले विवादित जगह पर नमाज हाेती थी। तब वहां कोई मूर्ति नहीं थी। मस्जिद से पहले वहां मंदिर था। हाईकोर्ट के अनुसार विवादित भूमि पर हिंदू और मुस्लिम दोनों का कब्जा था। वक्फ बोर्ड का दावा है कि मस्जिद खाली जमीन पर बनी। परंतु हाईकोर्ट ने माना है कि वहां मस्जिद से पहले एक मंदिर था। आर्कियोलॉजिकल सर्वे आॅफ इंडिया की जांच में मंदिर के प्रमाण मिले थे। विवादित जगह खुद एक देवता की तरह है। जैसे कैलाश मानसरोवर और विभिन्न नदियां, जिन्हें हम देवता की तरह पूजते हैं। इनकी कोई मूर्ति नहीं है।

जस्टिस भूषण: मस्जिद में क्या नमाज के साथ पूजा-पाठ भी होती थी?

वैद्यनाथन: नमाज सिर्फ अंदरूनी हिस्से में होती थी। मुस्लिमाें ने माना था कि मस्जिद के बाहरी हिस्से में तीन गैर इस्लामिक ढांचे थे। वहां हिंदू पूजा करते थे। सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि मंदिर के अस्तित्व के लिए मूर्ति की माैजूदगी जरूरी नहीं है।

जस्टिस भूषण: जैसे चित्रकूट में कमदगिरी पर्वत की परिक्रमा। लोगों का मानना है कि वनवास में भगवान राम, लक्ष्मण और सीता वहां गए थे।

वैद्यनाथन: बिलकुल सही। मूर्ति या मंदिर तोड़कर वहां मस्जिद बनाने से उस जगह को देवता और मंदिर के स्वामित्व से वंचित नहीं कर सकते। मुस्लिम पक्ष ने अभी तक न तो मालिकाना हक के दस्तावेज पेश किए हैं और न ही वहां अपना कब्जा साबित किया है।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तो तीनों ही पक्षों काे विवादित जमीन पर कब्जा दिया था। हम केवल आपकी बात किस आधार पर मानें?

वैद्यनाथन: वहां हिंदू देवता की स्थापना साबित नहीं हुई। मुस्लिम पक्षकारों का कब्जा भी साबित नहीं हुआ। जब भी हिंदुओं को वहां पूजा से रोकने की मांग की गई तो वहां प्रदर्शन अाैर झगड़े हुए।

जस्टिस भूषण: मुस्लिम पक्षकारों ने भी ताे कब्जे का दावा किया था।

वैद्यनाथन: परंतु उसे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वीकार नहीं किया। यह जमीन न कभी मुस्लिम पक्ष को अलॉट हुई और न ही निर्मोही अखाड़े को। हिंदुओं ने कभी जमीन से निष्कासन स्वीकार नहीं किया। मुस्लिम पक्षकारों ने माना है कि हिंदुओं के पास जमीन थी और उन्हें कभी वहां से हटाया नहीं गया।

जस्टिस चंद्रचूड़: हाईकोर्ट से डिक्री किस आधार पर हुई? क्या यह लिमिटेशन पर आधारित थी? जमीन पर पक्षों का अस्तित्व कैसे स्थापित किया गया?

चीफ जस्टिस: यह बताएं कि अगर विवादित स्थल पर मुस्लिम पक्षकार के साथ अापका भी कब्जा था ताे आपका एक्सक्लूसिव राइट कैसे हो सकता है?

वैद्यनाथन: पूरे मामले को देखने की तीन अवधारणाएं हैं। पहली देवता का निवास, दूसरी देवता की संपत्ति और तीसरी स्वयं स्थान का देवता हाेना। हमारा दावा है कि वह जगह खुद देवता की तरह है। वहां संयुक्त कब्जा नहीं हो सकता।

जस्टिस चंद्रचूड़: आपके अनुसार जमीन खुद देवता है। दूसरा पक्ष यह है कि यह पूजा का स्थान है और उसके अपने कुछ अधिकार हैं। यहां दो अलग-अलग विचार हो सकते हैं।

वैद्यनाथन: सुप्रीम कोर्ट और प्रीवी काउंसिल ने कहा है कि देवता की संपत्ति विभाजित नहीं की जा सकती। इसलिए देवता भी विभाजित नहीं किए जा सकते। यहां मस्जिद बनाने से लोगों का विश्वास और आस्था देवता के प्रति कभी कम नहीं हुई।

जस्टिस बोबडे: आपका कहना है कि यहां मंदिर था। उसे तोड़ने के बावजूद जगह देवता है।

वैद्यनाथन: हां। मंदिर का ढांचा तोड़ने के बाद भी श्रद्धालु बने रहे। इतिहासकार पी कार्नेजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस तरह मुस्लिमाें के लिए मक्का है, वैसे ही हिंदुओं के लिए अयोध्या है। जन्मस्थान देवता है और देवता का बंटवारा नहीं हो सकता।


  

5वां दिन

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