छत्तीसगढ़ बोर्ड / परीक्षा में फेल होने पर छात्र ने खुदकुशी की तो आईएएस ने फेसबुक पर शेयर किए अपने मार्क्स

X

  • कबीरधाम कलेक्टर ने लिखा- ये सिर्फ नंबर गेम, आपकी काबीलियत आपको देती है बेहतरीन मौका
  • रायगढ़ में 18 वर्षीय छात्र ने छत्तीसगढ़ की बोर्ड परीक्षा में दोबारा फेल हो जाने पर कर ली थी खुदकुशी

May 15, 2019, 12:20 PM IST

रायपुर. परीक्षा में नंबर कम आना या फिर फेल हो जाना यह आपकी काबीलियत को नहीं बताता। यह महज के एक नंबर गेम है। आपके अंदर छिपी काबीलियत आपको आगे कई बेहतरीन मौके देती है। करीब दो साल पहले बेटी को प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने और उसके साथ मिड डे मील खाने को लेकर चर्चा में आए प्रदेश के आईएएस अधिकारी अवनीश कुमार शरण ने अब फेसबुक पर अपनी मार्क्सशीट साझा करते हुए यह बातें लिखी हैं। छत्तीसगढ़ बोर्ड परीक्षा के परिणाम आने के बाद फेल होने पर रायगढ़ में 18 वर्षीय एक छात्र ने आत्महत्या कर ली थी। 

 

कबीरधाम जिले के कलेक्टर अवनीश कुमार शरण 2009 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। 10 मई को परीक्षा परिणाम आने और 11 मई को छात्र के आत्महत्या की खबर पढ़कर उन्होंने फेसबुक पर लिखा, "आज मैंने अखबार में एक चौंकाने वाली खबर पढ़ी कि एक छात्र ने परीक्षा में फेल हो जाने के कारण आत्महत्या कर ली। मैं सभी छात्रों और उनके माता-पिता से अपील करता हूं कि वे परिणाम को गंभीरता से न लें। यह एक नंबर गेम है। आपको अपने कैलिबर को साबित करने के कई और मौके मिलेंगे।" 

 

छात्रों को मोटिवेट करने के उद्देयश्य से आईएएस अफसर ने अपनी कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं, कॉलेज के नंबर भी फेसबुक पर शेयर किए। उन्होंने कक्षा 10वीं में 44.5 फीसदी, 12वीं की परीक्षा में 65 % और स्नातक में 60.7 % नंबर हासिल किए थे। अफसर ने अपने संदेश में यह भी बताया है कि उन्होंने 10वीं की परीक्षा 1996 में, 12वीं की परीक्षा 1998 और स्नातक की डिग्री साल 2002 में पूरी की थी। भले ही अवनीश कुमार शरण के नंबर कम आए हों, लेकिन उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर दिखा दिया कि काबिलियत नंबर देखकर नहीं मापी जा सकती। 


बेटी को पहले आंगनबाड़ी में पढ़ाया, फिर सरकारी स्कूल में 
वर्ष 2017 में पहली बार आईएएस अवनीश कुमार शरण चर्चा में आए थे। बलरामपुर के कलेक्टर रहते हुए उन्होंने बेटी वेदिका का दाखिला सरकारी स्कूल प्रज्ञा प्राथमिक विद्यालय में कराया था। जहां वे उससे अक्सर मिलने जाते थे। वहां पर बेटी के साथ मिड डे मील खाते उनकी फोटो काफी वायरल हुई थी। उनका मानना है कि हमें सरकारी संस्थाओं में यकीन करना चाहिए तभी उनकी हालत सुधर सकती है। इसके पहले उन्होंने वेदिका को आंगनबाड़ी भी भेजा था। 


प्रज्ञा प्राथमिक विद्यालय में काफी सुविधाएं भी हैं। यहां बच्चों को समझाने के लिए क्लासरूम में प्रोजेक्टर और एलईडी स्क्रीन भी लगाई गई हैं। पूरे जिले में इस तरह के 6 स्कूल खोलने की योजना थी। जिसे उन्होंने वहां रहते पूरा भी किया। आईएएस अवनीश शिक्षा के मामले में हमेशा सजग रहते हैं। जब सरकारी स्कूल के अध्यापक हड़ताल पर चले गए थे तो उन्होंने कहा था कि इस हालत में गांव के पढ़े-लोगों को आगे आना चाहिए और स्कूलों में जाकर पढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि किसी भी हालत में स्कूल बंद नहीं होने चाहिए और पढ़े-लिखे लोग स्कूलों में जाकर कक्षाएं लें।

 

संघर्षों से भरा रहा है आईएएस अवनीश का जीवन 
दरअससल आईएएस अधिकारी अवनीश शरण का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके घर में बिजली की सुविधा नहीं थी, इसलिए उन्हें लालटेन की रोशनी में पढ़ाई की थी। मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के केवटा गांव के रहने वाले आईएएस अवनीश के पिता और दादाजी भी शिक्षक थे। अवनीश कहते हैं कि हमें एक जिंदगी मिलती है और जितना हो सके अच्छे काम करते रहने चाहिए। मीडिया से दूरी बनाकर रखने वाले अवनीश अपनी बेटी को सरकारी स्कूल में पढ़ाने के बारे में ज्यादा बात नहीं करते। वे इसे व्यक्तिगत मामला बताते हैं। 

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना