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निर्देश / रात 10 बजे के बाद बल्क एसएमएस और मिस्ड काल के जरिए समर्थन मांगा तो फंसेंगे प्रत्याशी



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Dainik Bhaskar

Sep 16, 2018, 02:43 AM IST

रायपुर. प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुब्रत साहू ने राजनीतिक दलों के साथ हुई बैठक में चुनाव आचार संहिता के कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिया। साहू ने बताया कि  आदर्श आचार संहिता की पाबंदिया तीन तरह से लागू होगीं।  पहला सभी राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों पर, दूसरा सत्ता पक्ष के राजनीतिक पदाधिकारियों (मंत्री आदि) और  तीसरा निर्वाचन कार्य से जुड़े प्रशासनिक अमले पर।

 

इसके तहत कोई भी प्रत्याशी  प्रत्येक व्यक्ति की निजता का पूरा सम्मान करते हुए  रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच किसी प्रकार से मतयाचना नहीं करेंगे। साहू ने कहा कि अधिकारी-कर्मचारियों को यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि वे लोकसेवक के रूप में जनता के अभिमत को निष्पक्ष और अप्रभावित तरीके से अभिव्यक्त करने में सहायक हो।

 

कोई भी दल अथवा प्रत्याशी ऐसा कोई कार्य अथवा व्यवहार नहीं करेगा, जिससे धार्मिक अथवा सामाजिक समरसता और सदभाव बिगड़े या तनाव बढ़े। कोई भी दल अथवा प्रत्याशी जनसंप्रक करते समय धार्मिक, जातिगत अथवा किसी और संकीर्ण भावना का उपयोग नहीं करेगा।

 

वोट मांगने  के लिए किसी धार्मिक स्थल या संस्थान का उपयोग नहीं किया जाएगा।  केवल मत भिन्नता के कारण किसी व्यक्ति के निवास पर कोई धरना या प्रदर्शन नहीं किया जाएगा। कोई दल या प्रत्याशी स्वयं किसी की निजी संपत्ति-भवन, भूमि अथवा परिसर पर झण्डे, पोस्टर, बैनर आदि उसकी पूर्व अनुमति के बिना नहीं लगाएंगे और न ही अपने समर्थकों को ऐसा करने देंगे। इस प्रतिबंध में दीवार लेखन भी शामिल हैं।  

 

किसी की निजी जिंदगी पर कोई टिप्पणी नहीं : 

 

कोई दल अथवा प्रत्याशी किसी अन्य दल अथवा प्रत्याशी की आलोचना करने में उसकी नीतियों और योजनाओं तक सीमित रहेगा। किसी के निजी जिन्दगी पर कोई टिप्पणी नहीं की जाएगी। किसी अन्य दल अथवा प्रत्याशी की आलोचना करते समय अपुष्ट आरोप नहीं लगाए जा सकते और न तथ्यों को विकृत करके प्रस्तुत किया जा सकता है।

 

राजनीतिक दल और प्रत्याशी जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 में अंकित सभी कदाचार से बचे रहे इसकी भी जानकारी बैठक में दी गई।  चुनावी सभा या जुलूस आयोजन के पूर्व स्थानीय पुलिस को सूचित करना आवश्यक है। यदि कोई प्रतिबंधात्मक कानून लागू है तो उसका पालन किया जाना अनिवार्य है। प्रत्याशी और राजनीतिक दलों की यह जिम्मेदारी होगी कि उनकी सभाओं या जुलूस में कोई समर्थक ऐसी वस्तु लेकर न चले, जिनका उन्माद के क्षणों में दुरुपयोग किया जा सके।
  

 


 

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