--Advertisement--

महाभारत छत्तीसगढ़ / परिसीमन से सीटें आरक्षित, डेढ़ दर्जन सीटों पर दूसरे वर्ग का प्रत्याशी चुनने की मजबूरी



प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
X
प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 11:03 AM IST

जॉन राजेश पॉल

 

रायपुर. विधानसभा में जिस वर्ग की आबादी ज्यादा है, उसे प्रतिनिधित्व मिले, इसलिए परिसीमन किया गया। लेकिन राज्य में डेढ़ दर्जन सीटें ऐसी हैं, जहां जिस वर्ग के लिए सीट आरक्षित है, उससे ज्यादा संख्या में दूसरे वर्ग के वोटर हैं। इसके बाद भी दूसरे वर्ग का विधायक चुनने की मजबूरी है। सरगुजा के अंतिम छोर से लेकर बस्तर तक और मैदानी इलाकों में भी कहीं सामान्य या अन्य पिछड़ा वर्ग तो कहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के वोटरों को अपनी बहुलता के बावजूद दूसरे समाज के प्रतिनिधि को विधानसभा में भेजना पड़ रहा है। मनेंद्रगढ़ समेत डेढ़ दर्जन सीटें हैं, जहां वोटर अपनी जनसंख्या ज्यादा होने के बाद भी दूसरे वर्ग के प्रतिनिधि चुन रहे हैं। 

इस तरह की असमानता

  1. सरायपाली में केवल 15.71 प्रतिशत एससी हैं, फिर भी यहां सामान्य व ओबीसी के बहुलता वाले वोटर एससी उम्मीदवार चुनते हैं। इसके विपरीत जांजगीर में 74 फीसदी एससी हैं। सामान्य सीट होने के कारण ओबीसी या सामान्य वर्ग से विधायक बनते हैं। अकलतरा में 25 प्रतिशत, बेलतरा व बिलासपुर में 18-18 फीसदी एससी हैं। दोनों सीटों से सामान्य वर्ग के विधायक हैं। 

    सीट सामान्य, वोटर एसटी

     मनेंद्रगढ़ सामान्य है पर आदिवासी ज्यादा हैं। इसी तरह अंबिकापुर सामान्य है। यहां भी आदिवासी ही ज्यादा हैं। सारंगढ़ सीट अनुसूचित जाति के रिजर्व है, लेकिन यहां जनरल व ओबीसी वोटर 57% से अधिक हैं। कोरबा से लगी रामपुर सीट पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर की वजह से चर्चित रहती है। यह आदिवासी वर्ग के रिजर्व है, जबकि 53 % से अधिक जनरल व ओबीसी वोटर हैं। 

  2. जातिगत समीकरण में असामानता वाली सीटें (जनसंख्या % में)

    सीटें

     

    सीटें

     

  3. इन सीटों पर भी बड़ी उलझन

    मस्तूरी सीट पर 63 फीसदी सामान्य व ओबीसी वोटर हैं, जबकि 26 प्रतिशत ही अजा वोट हैं। जैजैपुर सीट में 64 फीसदी जनरल ओबीसी वोटर हैं। बस्तर की शहरी सीट जगदलपुर सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है, जबकि यहां 52.28 प्रतिशत आदिवासी वोटर हैं। डोंगरगढ़ सीट भी अजा के लिए आरक्षित है, जबकि यहां केवल 12.33 प्रतिशत ही अजा वोटर हैं। सामान्य व अन्य पिछड़ा वर्ग के वोटरों की संख्या 76.47 फीसदी है। कांकेर जिले की अंतागढ़ सीट बी भले ही आदिवासियों के लिए रिजर्व है, लेकिन सामान्य व ओबीसी ज्यादा वोटर हैं। अनुसूचित जाति वर्ग के लिए रिजर्व नवागढ़ विधानसभा में 71.43 प्रतिशत जनरल व ओबीसी वोटर हैं। रायपुर से लगा आरंग विधानसभा अजा वर्ग के लिए है, लेकिन यहां 70 प्रतिशत जनरल-ओबीसी वोटर हैं। बिलाईगढ़ व पामगढ़ भी अजा सीट है, लेकिन यहां क्रमश: 61.25 व 64.31 फीसदी जनरल व ओबीसी वोटर हैं। दिलचस्प यह भी कि गरियाबंद जिले की बिंद्रानवागढ़ सीट आदिवासी सीट है, लेकिन यहां भी सामान्य वर्ग के वोटर ज्यादा हैं। 

Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..