डीबी ओरिजनल / छत्तीसगढ़: एक्सप्रेस-वे की जांच रिपोर्ट में खुलासा- तेजी से निर्माण हुआ, लेकिन क्वालिटी का ध्यान नहीं रखा गया

सड़क बनाने से पहले तैयार किया जाने वाला बेस इतना कमजोर है कि डामर-गिट्टी अनुपात 32 फीसदी तक कमजोर पाया गया है। सड़क बनाने से पहले तैयार किया जाने वाला बेस इतना कमजोर है कि डामर-गिट्टी अनुपात 32 फीसदी तक कमजोर पाया गया है।
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सड़क बनाने से पहले तैयार किया जाने वाला बेस इतना कमजोर है कि डामर-गिट्टी अनुपात 32 फीसदी तक कमजोर पाया गया है।सड़क बनाने से पहले तैयार किया जाने वाला बेस इतना कमजोर है कि डामर-गिट्टी अनुपात 32 फीसदी तक कमजोर पाया गया है।

  • रिपोर्ट में कहा- सड़क बनाने के लिए पहले तैयार किया जाने वाला बेस इतना कमजोर रखा किपूरी सड़क ही जगह-जगह से धंस रही
  • रिपोर्ट में कहा- एक्सप्रेस-वे की फाफाडीह, देवेंद्रनगर, पंडरी, शंकरनगर और तेलीबांधा फ्लाईओवर्स पर बनी सभी सड़कें को उखाड़कर बनाना होगा

Dainik Bhaskar

Jan 15, 2020, 08:43 AM IST

रायपुर (अमनेश दुबे). राजधानी और प्रदेश में सड़क निर्माण के सबसे चर्चित घोटाले एक्सप्रेस-वे की 138 पेज की जांच रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। यह रिपोर्ट सबसे पहले दैनिक भास्कर ने हासिल की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक्सप्रेस-वे के फाफाडीह, देवेंद्रनगर, पंडरी, शंकरनगर और तेलीबांधा फ्लाईओवर्स पर बनी सभी सड़कें, जिनकी लंबाई लगभग साढ़े 3 किमी है, उन्हें पूरी तरह उखाड़कर फिर से बनाना होगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सड़क निर्माण की रफ्तार तो तेज रखी गई, लेकिन क्वालिटी की पूरी तरह अनदेखी हो गई। सड़क बनाने से पहले तैयार किया जाने वाला बेस इतना कमजोर है कि डामर-गिट्टी यानी कंपेक्शन का अनुपात 32 फीसदी तक कमजोर पाया गया है। इस वजह से पूरी सड़क ही जगह-जगह से धंस रही है। इनके धंसने से सभी फ्लाईओवर की रीटेनिंग वाॅल एक तरफ झुक रही हैं और दीवारें झुकने से पुलों की रेलिंग बैंड हो गई हैं। जांच रिपोर्ट का सबसे अहम हिस्सा वह सलाहकार कंपनी है, जो ऐसे निर्माण को एनओसी देती रही फिर एग्रीमेंट के तहत 3 करोड़ रुपए का पेमेंट लेकर रवाना हो गई।  

  
रिपोर्ट में मुख्य तकनीकी परीक्षक (सीटीअाई) और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान एनआईटी की साझा जांच का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि स्टेशन से तेलीबांधा के बीच बने 12 किमी एक्सप्रेस-वे के सभी 5 फ्लाईओवरों में घटिया निर्माण हुअा है। यह इतना घटिया है कि मरम्मत नहीं हो सकती। रिपोर्ट में दोनों जांच एजेंसियों के जांच के तरीके का भी जिक्र है। इसमें बताया गया है कि सीटीअाई ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने से पहले एक्सप्रेस-वे पर करीब 13 जगह ओपन पिट मैथड से एक-एक फीट गहरे वर्गाकार गड्ढे खोदकर सैंपल निकाले। इसकी जांच के आधार पर कहा गया कि पुल पर बनी सड़कों की परतें जल्दबाजी में भरी गईं डामर चढ़ा दिया गया। इसलिए वह धंसने लगी और दरारें भी पड़ गईं। जल्दबाजी का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि जिन परतों को सेट करने में कम से कम एक माह लिया जाना चाहिए, ठेका कंपनी ने उसे एक हफ्ते में पूरा कर दिया। इसलिए सड़कें ट्रैफिक शुरू होने से पहले ही टिक नहीं पाईं और उखड़ने लगीं। 

एक्सप्रेस-वे : 138 पेज की जांच रिपोर्ट भास्कर के पास

1. एक माह से ज्यादा में बनने वाला बेस एक हफ्ते में पूरा
2. पुलों की ऊपरी रोड में डामर गिट्टी का अनुपात गड़बड़
3. पुलों की रीटेनिंग वाॅल और रेलिंग इसी कारण कमजोर
4. कंसल्टेंट ने ओके किया, 3 करोड़ पेमेंट लेकर रवाना

कंपेक्शन के 51 सैंपल, अधिकांश फेल
सीआईटी के अलावा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) ने भी पूरी सड़क और फ्लाइओवरों पर 22 जगह सैंपल लिए थे। एनअाईटी के विशेषज्ञों ने भी डामर-गिट्टी का अनुपात यानी कंपेक्शन के फेल होने की पुष्टि की और कहा कि सबसे ऊपरी डामर की परत के नीचे बोल्डर, छोटी गिट्टी, रेत और मिट्टी समेत बेस में काम अाने वाली सामग्री का अनुपात बिलकुल गलत था। कंपेक्शन में ही 28 से 32 फीसदी तक गड़बड़ी पाई गई है। हर लेयर में कंपेक्शन में गड़बड़ी मिली है। यही वजह है कि सड़क धंसने लगी है। कंपेक्शन का मामला इतना इतना खराब है कि सड़क को उखाड़े बिना ट्रैफिक शुरू नहीं किया जा सकता।


रीटेनिंग वाॅल इसलिए झुक गई
इस सड़क के फ्लाईओवर सतह से पूरी ऊंचाई तक रीटेनिंग वाॅल बनाकर और उसमें मुरुम भरकर तैयार किए गए हैं। नीचे वाली सड़कें धंसने से सभी फ्लाईओवर की रीटेनिंग वाॅल ही बैंड हो रही है। इस वजह से फ्लाईओवर के दोनों किनारे पर जो रेलिंग लगाई गई है, उसके जोड़ छूट रहे हैं। देवेंद्रनगर फ्लाईओवर से नीचे की सड़क पर रेलिंग का एक टुकड़ा गिर भी चुका है। हादसे में एक महिला गंभीर रूप से घायल हुई थी। जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पुलों के निर्माण के दौरान इंजीनियर पूरे समय तैनात रहने का विशेष जिक्र है। फ्लाईओवर्स की पूरी सड़कें फिर बनेंगी तो पूरे कंक्रीट पैनल हटाकर फिर लगाने होंगे। इसके बिना सड़क शुरू नहीं कर सकते। 

कंसल्टेंट ने 12 किमी सड़क के हर निर्माण को सही बताया, इसलिए कठघरे में
एक्सप्रेस-वे का निर्माण पिछली सरकार के समय शुरू हुअा था और ठेका गुजरात की कंपनी अायरन ट्राईएंगल लिमिटेड ने 256 करोड़ रुपए में लिया था। निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी के लिए तत्कालीन सरकार ने भोपाल की पीएमसी कंसल्टेंट को बतौर सलाकार नियुक्त किया। कंसल्टेंट ने 12 किमी तक के पूरे निर्माण को ओके करार दिया और उसे 3 करोड़ रुपए का पेमेंट भी हो गया। लेकिन जांच रिपोर्ट में कंसल्टेंट की इन ओके रिपोर्टों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। अब जांच में कंसल्टेंट नियुक्त करने के मामले में अफसरों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

अफसरों पर कार्रवाई की अनुशंसापर इसके अमल में कई रुकावटें
एक्सप्रेस-वे की जांच रिपोर्ट में निर्माण के जिम्मेदार अफसरों, ठेकेदारों और कंसल्टेंट पर सीधी कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। दिलचस्प बात ये है कि जिस वक्त यह निर्माण चल रहा था, सीअारडीसी के एमडी अाईएफएस अनिल राय थे और अब भी इसी पद पर हैं। जांच रिपोर्ट के अाधार पर केवल उन्हें क्लीनचिट दी गई, उनके नीचे के अफसरों को कार्रवाई के घेरे में ले लिया गया है। राय पीडब्ल्यूडी सचिव भी हैं। अफसरों पर कार्रवाई की अनुशंसा की फाइल उन्हीं के पास जाएगी। इन विरोधाभासों को लेकर पूरे प्रशासनिक गलियारे में कई तरह की चर्चाएं हैं। दूसरा, जानकारों के अनुसार कार्रवाई की जो अनुशंसा भेजी गई है, केवल उस अाधार पर अफसरों और कंसल्टेंट पर सीधी कार्रवाई नहीं हो सकती। वजह ये है कि जांच रिपोर्ट के पहले पन्ने पर जांचकर्ताओं ने लिखा है कि जो तथ्य उन्हें मिले हैं, उनका सत्यापन करवाया जाए तभी कार्रवाई की जाए। अब पूरा सरकारी अमला पहले सत्यापन करने की लाइन पर केंद्रित हो गया है। सत्यापन करने के लिए वह सारे 51 नमूने जो एनअाईटी और मुख्य तकनीकी परीक्षक (सीटीअाई) के एक्सपर्ट ने लिए थे, उन्हें दोबारा जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। इसके नतीजे अाने तक कुछ नहीं होगा और नतीजे कब अाएंगे, इस पर अफसर चुप हैं। 


मई-जून से पहले शुरू नहींकी जा सकेगी पूरी सड़क
एक्सप्रेस-वे की जांच रिपोर्ट में जितनी खामियां सामने अाई हैं, उनकी मरम्मत संभव नहीं है। इसलिए पांचों फ्लाईओवर की सड़कों के साथ-साथ बाकी हिस्सों को भी तोड़कर बनाना होगा। सीआरडीसी के चीफ इंजीनियर एसके कोरी ने बताया कि तेलीबांधा फ्लाईओवर से काम की शुरुअात की जा रही है। इसके बाद एक-एक कर सभी पुलों की सड़कों उखाड़कर बनाएंगे। इस दौरान जांच रिपोर्ट में जो और खामियां बताई गई हैं, उन्हें ठीक करना का काम चलेगा। कुल मिलाकर इस काम में हर हाल में पांच से छह माह तक लग जाएंगे। इसलिए मई-जून से पहले इस सड़क को दोबारा शुरू कर पाना मुश्किल ही है। 
 

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