लापरवाही / आधी रात अस्पताल में पीलिया से पीड़ित की तबीयत बिगड़ी, बुलाने पर भी नहीं आए डॉक्टर, सुबह मौत

Dainik Bhaskar

Jun 13, 2019, 01:47 PM IST



शव के पास विलाप करते परिजन। शव के पास विलाप करते परिजन।
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शव के पास विलाप करते परिजन।शव के पास विलाप करते परिजन।

  • गीदम सीएचसी का मामला, डॉक्टर बोले- मैंने समय पर पूरा इलाज किया, सीसीटीवी देख लें 
     

दंतेवाड़ा. गीदम सीएचसी में पीलिया से पीड़ित हाउरनार के ग्रामीण लुदरु की बुधवार की सुबह मौत हो गई। लुदरु की मौत के बाद परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर व नर्सों पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

 

मृतक की बुआ सुदरी ने बताया कि वह शनिवार से पेट दर्द से पीड़ित था। तबियत ज्यादा बिगड़ने पर मंगलवार की शाम करीब 6 बजे गीदम अस्पताल लेकर गए, यहां डॉ. देवेंद्र प्रताप ने इलाज कर भर्ती किया। रात 10 बजे लुदरु की तबियत बिगड़ने लगी तो नाइट ड्यूटी में तैनात डॉ. योगेश देवांगन को जब उनके चेम्बर में बुलाने गए तो वे मोबाइल पर बात कर रहे थे। व्हील चेयर के जरिए डॉक्टर ने मरीज को चेम्बर तक लाने कहा। यहां जांच कर इंजेक्शन दिया। देर रात करीब 2 बजे तबियत फिर बिगड़ी तो हमने रेफर करने का निवेदन किया, जिस पर उन्होंने सुबह देखेंगे कहकर टाल दिया और सो गए। यही हाल नर्सों का भी था। 


मृतक के परिजनों ने बताया हम सभी रातभर परेशान होते रहे। सुबह 4 बजे फिर हालत बिगड़ी, लेकिन डॉक्टर के रवैये के कारण हम उन्हें बुलाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए, क्योंकि इसके पहले जब हम उन्हें बुलाने गए थे तब उन्होंने कहा बार-बार परेशान मत करो। मृतक के साले फगनू ने बताया कि डॉक्टर को मरीज के पास न आता देख हमने मदद के लिए सुबह 4 बजे जावंगा के पूर्व सरपंच बोमडाराम को बुलाया। वे अस्पताल पहुंचे व एक अन्य डॉक्टर को फोन कर बुलाया। इसके बाद डॉक्टर योगेश देवांगन भी पहुंचे व रेफर पर्ची बनानी शुरू की तब तक लुदरु की मौत हो गई। जावंगा के पूर्व सरपंच बोमड़ाराम ने कहा कि मैं स्वयं अस्पताल पहुंचा व दरवाजा खटखटाया, लेकिन डॉक्टर नहीं जागे। डॉक्टर की इस लापरवाही की शिकायत उच्चाधिकारियों से करेंगे। 


डॉक्टर बोले- लापरवाही नहीं की, सारे आरोप गलत 
इस मामले में एएमओ डॉ. योगेश देवांगन ने कहा कि मैं रातभर हॉस्पिटल में ही था और लुदरु का इलाज लगातार कर रहा था। चाहें तो सीसीटीवी व दस्तावेजों में एक-एक रिपोर्ट देख सकते हैं। मैंने किसी तरह की लापरवाही नहीं की। जब मैंने आखिरी बार देखा तो वह ठीक था, रेफर की स्थिति में नहीं था। सुबह जब हालत बिगड़ी तब परिजनों ने मुझे नहीं बल्कि किसी अन्य डॉक्टर को फोन किया। डॉक्टर के फोन पर जब मैं जागकर मरीज को देखने पहुंच गया तो परिजनों के कहने पर मैं क्यों नहीं जाता। मैं जब पहुंचा तो केन्यूला को परिजन खुद ही निकाल चुके थे। बिगड़ती हालत देख मैंने रेफर किया। परिजन 108 के इंतजार में थे। कुछ देर बाद मरीज की मौत हो गई। मुझ पर जो भी आरोप लग रहे हैं, सब गलत हैं।

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