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छत्तीसगढ़ / मिक्की मेहता मौत मामले में डीजी मुकेश गुप्ता की भूमिका की जांच करेंगे नायक

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 12:46 AM IST


DIG Mukesh Gupta's role in Mikey Mehta death case is questionable
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DIG Mukesh Gupta's role in Mikey Mehta death case is questionable

  • 2 महीने में आएगी जांच रिपोर्ट, कंवर ने की थी शिकायत

रायपुर . मिक्की मेहता की मौत मामले में डीजी मुकेश गुप्ता के खिलाफ डीजी (जेल) गिरधारी नायक जांच करेंगे। राज्य शासन ने रविवार को नियुक्ति आदेश जारी किया। नायक से गुप्ता के खिलाफ तमाम शिकायतों की बारीकी से जांच कर दो माह के भीतर यानि  13 मार्च तक रिपोर्ट देने को कहा गया है। मुख्यमंत्री भूपेश  बघेल ने सदन में ऐलान किया था कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। इसलिए जांच रिपोर्ट सदन में भी पेश की जाएगी।  

 

पिछले दिनों विधानसभा सत्र के दौरान  पूर्व गृहमंत्री और  बीजेपी विधायक ननकीराम कंवर ने 1988 बैच के आईपीएस मुकेश गुप्ता के खिलाफ सात पेज का शिकायती पत्र मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सौंपकर जांच की मांग की थी। कंवर ने अपनी शिकायत में  मुकेश गुप्ता की कथित दूसरी पत्नी मिक्की मेहता की हुई मौत के मामले की भी जांच की मांग की थी।

 

कंवर के मुताबिक मिक्की मेहता के परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए जांच की मांग की थी, लेकिन मामले में किसी तरह की जांच नहीं हुई। उल्टा मिक्की मेहता के परिजनों पर कई तरह के गंभीर अपराध दर्ज करा दिए गए थे। कंवर ने पत्र में यह भी आरोप लगाया था कि मुकेश गुप्ता की पदोन्नति नियम विरुद्ध तरीके से की गई थी। उन्होंने अपनी शिकायत में यह भी कहा था 

 

कि ईओडब्ल्यू और एसीबी में पदस्थ सूबेदार रेखा नायर के नाम से मुकेश गुप्ता पर करोड़ों रुपए की बेनामी संपत्ति खरीदने और उसके जरिए नेताओं और अधिकारियों का फोन अवैध तरीके से इंटरसेप्ट कराया गया। इस मामले की शिकायत के बाद उसे दूसरे प्रांत भेज दिया गया। कंवर ने परिस्थितियों को देखते हुए रेखा नायर को दूसरे प्रदेश से बुलाकर बयान लिए जाने की मांग की है। कंवर ने अपने पत्र में राजनांदगांव के मदनवाड़ा में नक्सलियों से मुठभेड़ में पुलिस अधीक्षक विनोद चौबे की शहादत में मुकेश गुप्ता की भूमिका की आशंका जताते हुए इसकी भी जांच कराए जाने की मांग की थी। 


बता दें कि नई सरकार की जिम्मेदारी सम्हालने  के बाद भूपेश बघेल बड़ी फेरबदल करते हुए गुप्ता को डीजी एसीबी और ईओडब्लू से हटाकर बिना किसी विंग के पीएचक्यू में अटैच की स्थिति में रखा है। भाजपा शासन काल के दौरान गुप्ता की सरकार के आला पदाधिकारियों से निकटता रही है। वहीं गुप्ता ने बघेल और उनके परिजनों के खिलाफ जमीन मामले को लेकर जांच भी कराई थी।


तेजतर्रार अफसर हैं नायक, भाजपा शासन में हासिए पर रहे:  1983 बैच के आईपीएस अफसर गिरधारी नायक की गिनती देश के तेजतर्रार अफसरों में होती है। लेकिन पूर्ववर्ती भाजपा  सरकार ने नायक को कभी भी मुख्यधारा की पोस्टिंग नहीं दी। न हीं केंद्र में डेपुटेशन के लिए अनुमति दी।

 

वे साढ़े चार साल तक डीजीपी रहे एएन उपाध्याय से दो साल सीनियर हैं। लेकिन  सरकार ने सीनियॉरिटी को नजरअंदाज कर उपाध्याय को डीजीपी बनाए रखा। साल 2008 के चुनाव में निर्वाचन आयोग ने कार्रवाई करते हुए विश्वरंजन की जगह नायक को करीब 20-22 दिनों के लिए कार्यकारी डीजीपी बनाया था। उस कार्यकाल के दौरान नायक ने कई अफसरों के खिलाफ फाइलें खोल दी थीं। चुनाव निपटते ही पिछली सरकार ने उन्हें वापस होमगार्ड भेजकर सभी जांच को बंद करा दिया था ।

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