लोक कथा / श्रीराम की माता कौशल्या का इकलौता मंदिर, मां की गोद में बैठे हैं भगवान; तालाब के बीच में है यह सुरम्य स्थान



मंदिर में स्थापित भगवान श्रीराम और कौशल्या माता की मूर्ति। दाईं और नथ पहने हुए माता कौशल्या व बाईं ओर प्रभु श्रीराम। मंदिर में स्थापित भगवान श्रीराम और कौशल्या माता की मूर्ति। दाईं और नथ पहने हुए माता कौशल्या व बाईं ओर प्रभु श्रीराम।
Diwali Deepavali Special 2019: Chhattisgarh Chandkhuri, the Birthplace of the Lord Rama's mother Kausalya
Diwali Deepavali Special 2019: Chhattisgarh Chandkhuri, the Birthplace of the Lord Rama's mother Kausalya
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मंदिर में स्थापित भगवान श्रीराम और कौशल्या माता की मूर्ति। दाईं और नथ पहने हुए माता कौशल्या व बाईं ओर प्रभु श्रीराम।मंदिर में स्थापित भगवान श्रीराम और कौशल्या माता की मूर्ति। दाईं और नथ पहने हुए माता कौशल्या व बाईं ओर प्रभु श्रीराम।
Diwali Deepavali Special 2019: Chhattisgarh Chandkhuri, the Birthplace of the Lord Rama's mother Kausalya
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  • छत्तीसगढ़ का यह क्षेत्र पौराणिक काल में कौशल राज्य कहलाता था, यह भगवान राम की ननिहाल
  • इस मंदिर को 8वीं शताब्दी में सोमवंशी राजाओं ने बनवाया था, 1973 में हुआ था जीर्णोद्धार

Dainik Bhaskar

Oct 27, 2019, 11:44 AM IST

रायपुर (सुमन पांडेय). 14 वर्ष का वनवास खत्म कर भगवान श्रीराम अयोध्या लौटे तो उनके स्वागत में घर-घर प्रज्ज्वलित हुए दीपों के कारण दीपावली का पर्व मनाया जाता है। दीपावली के बाद भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में उनके मंदिर को लेकर चल रहे विवाद का सुप्रीम कोर्ट से फैसला आएगा। देश-दुनिया में भगवान श्रीराम के लाखों मंदिर हैं, लेकिन उनकी माता कौशल्या का एक मात्र मंदिर छत्तीसगढ़ में है। जानिए श्रीराम की माता के सुरम्य मंदिर के बारे में।

 

छत्तीसगढ़ को पौराणिक काल में कौशल राज्य कहा जाता था। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 27 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है चंदखुरी गांव। इसे भगवान राम की मां कौशल्या का जन्म स्थान माना जाता है। यहां जलसेन तालाब के बीचोंबीच माता कौशल्या का सुंदर मंदिर बना हुआ है, जिसमें भगवान श्रीराम की माता की गोद में बैठे हुए मूर्ति है। 

 

आठवीं शताब्दी का है मंदिर
मंदिर के पुजारी संतोष चौबे बताते हैं कि इस मंदिर को 8वीं शताब्दी में सोमवंशी राजाओं ने बनवाया था। लोक कथाओं के अनुसार 8 वीं शताब्दी में यहां राजा को मां कौशल्या ने सपने में दर्शन दिए थे। सपने में उन्होंने कहा कि वो इस स्थान पर हैं। राजा ने अपने लोगों से खुदाई कराई। खुदाई में मिली मूर्ति को भव्य मंदिर बनवाकर उसमें स्थापित कराया गया। 1973 में इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था। मंदिर तक पहुंचने के लिए पाथ बनाया गया है। मुख्य दरवाजे पर हनुमान जी की विशाल प्रतिमा बनी हुई है।

 

मंदिर में मूर्तियां कहती है पौराणिक कथाएं
जलसेन तालाब के बीचोंबीच बने मंदिर में कई मूर्तियां आकर्षण का केंद्र हैं। यहां राजा दशरथ के दरबार को मूर्त रूप दिया गया है, जिसमें राजा अपनी रानियों व प्रमुख मंत्रियों के साथ विराजमान हैं और बीच में भगवान राम बाल रूप में अपने चारों भाइयों के साथ खेल रहे हैं। तालाब के बीच में समुद्र मंथन का दृश्य दिखाती हुई मूर्ति है, जिसमें देवता और दानव समुद्र मंथन कर रहे हैं। इसके अलावा कई अन्य कहानियों की मूर्तियां बनी हैं।

 

दीपावली का पहला दीया मंदिर में जलाते हैं ग्रामीण
तालाब के टापू पर मां कौशिल्या विराजमान हैं। अरसे पहले यहां लोग तैरकर या नाव से मंदिर तक पहुंचा करते थे। महिलाओं को इस मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं थी। इसके पीछे मान्यता थी कि यहां भगवान राम एक बच्चे की तरह मां की गोद हैं, ऐसे में अन्य महिलाएं यहां आकर भगवान को नजर लगा देंगी। हालांकि, बीतते वक्त के बाद इस रोक को हटा दिया गया। दीपावली मनाने की शुरूआत गांव के लोग इसी मंदिर से करते हैं। ग्रामीण सबसे पहले यहां आकर दीपक जलाते हैं, इसके बाद ही अपने ही घरों पूजा करते हैं।


रामायण में चंदखुरी 

इतिहास विद् डॉ. हेमु यदू ने बताया कि रामायण के बालकांड के सर्ग 13 श्लोक 26 में आरंग विकासखंड के तहत आने वाले गांव चंदखुरी का जिक्र मिलता है। तब इसका नाम चंद्रखुरी हुआ करता था, जो बाद में बोलचाल में चंदखुरी हो गया। रामायण में छत्तीसगढ़ के इलाके को दक्षिण कौशल कहा गया है। रामायण के मुताबिक कौशल के राजा भानुमंत थे। भानुमंत आरंग में ही रहा करते थे। उनकी पुत्री का नाम भानुमति था। इनका विवाह राजा दशरथ से हुआ। शादी के बाद कौशल क्षेत्र की राजकुमारी होनी की वजह से उनका नाम कौशिल्या पड़ा।
 

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