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हेल्थ / सिलेंडर धमाके से कटा पैर अंबेडकर के डॉक्टरों ने जोड़ा

Dainik Bhaskar

Jan 12, 2019, 01:06 AM IST


Doctors added chopped legs
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Doctors added chopped legs

  • दो माह पहले मौदहापारा में गुब्बारा भरने वाला सिलेंडर फटने से हुई थी घटना
  • 10 साल के भूरा की जिंदगी के साथ-साथ उसका एक पैर भी बचा लिया गया,दूसरे पैर को भी जोड़ने के प्रयास हुए

रायपुर . मौदहापारा में 13 नवंबर को गुब्बारा फुलाने वाला सिलेंडर फटने से कटकर अलग हुए निर्मला और संतोषी के पैर को दोबारा जोड़ दिया गया। 10 साल के भूरा की जिंदगी के साथ-साथ उसका एक पैर भी बचा लिया गया। दूसरे पैर को भी जोड़ने के प्रयास हुए।

 

हड्डी रोग और प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डाक्टरों ने 10 घंटे से भी ज्यादा समय तक सर्जरी की। भूरा का एक पांव और महिलाओं के दोनों पैर बचा लिए गए। डाक्टरों के अनुसार सिलेंडर फटने के बाद उसमें भरी हवा 150 से 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से निकली। महिलाएं और बच्चे वहीं आस-पास थे। इस वजह से वे चपेट में आए।

 

एक बच्चे की घटना में मौत हो गई थी। हादसे के फौरन बाद सभी को अंबेडकर अस्पताल में दाखिल कराया गया था। इस घटना की सूचना मिलते ही सभी विभाग के एचओडी अपनी टीम के साथ पहुंच गए थे। ऑर्थोपीडिक विभाग के एचओडी डॉ. एसके फुलझेेले और उनकी टीम ने उनकी स्थिति देखकर पैरों को दोबारा जोड़ने का फैसला किया।

 

सर्जरी बेहद रिस्की थी। रात ढाई बजे घायल महिला निर्मला के उखड़े हुए पैर को मशीन की मदद से बिठाया गया। उसके बाद पैर में सेंसेशन आने के बाद इसे जोड़ने के लिए अलग से सर्जरी की गई। दूसरी घायल महिला संतोषी के घुटने के नीचे से पैर उखड़कर अलग हो गया था।

 

अगल हुए पैर को अस्पताल ले जाया गया था। संतोषी के पैर को एक्सटर्नल सक्सेसर मशीन लगाकर उसकी जगह पर बिठाया गया। उसमें सेंसेशन आने पर प्लास्टिक सर्जन डॉ. दक्षेस शाह की मदद से जोड़ा गया। निर्मला का एक पैर भी पूरी तरह उखड़ गया था। लेकिन मांसपेशी क्षत-विक्षत होने के कारण टूटे हुए हिस्से को मशीन के सहारे बिठाया नहीं जा सका। उसके लिए खुद प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डाक्टरों ने प्रयास किया।

 

उसके पैर को भी सर्जरी कर बचा लिया गया। 10 साल के भूरा खान का पैर जांघ के पास से अलग हो गया था। खून ज्यादा बह होने के कारण व ब्लास्ट में क्षतिग्रस्त होने के कारण इसके पैर को नहीं जोड़ा जा सका। डॉ. फुलझेले ने बताया कि क्रश इंजुरी में पैर कटकर पूरी तरह उखड़ गया था। मांसपेशी व नस सामान्य होने के कारण इसे प्लास्टिक सर्जन की मदद से जोड़ लिया गया।

 

उन्होंने कहा कि उनकी टीम की ये बड़ी कामयाबी है। इससे वे जीवनभर अपंग होने से बच गए। वेस्कुलर सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि क्षत-विक्षत खून की नसों को दोबारा जोड़ा जा सकता है। इसके लिए विशेष तकनीक अपनाई जाती है। 

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