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हेल्थ / दुर्घटना के बाद छाती के बाहर धड़क रहा था दिल, सर्जरी कर बचा ली युवक की जान



ऑपरेशन के बाद होश में आए युवक की हालत में हो रहा है तेजी से सुधार। ऑपरेशन के बाद होश में आए युवक की हालत में हो रहा है तेजी से सुधार।
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ऑपरेशन के बाद होश में आए युवक की हालत में हो रहा है तेजी से सुधार।ऑपरेशन के बाद होश में आए युवक की हालत में हो रहा है तेजी से सुधार।

  • युवक के पोल में टकराने के कारण छाती की मजबूत हड्डी (स्टर्नम) टूट गई थी
  • छाती फटने के कारण पेट में मिट्टी, कंकड़ व पत्थर के छोटे टुकड़े भी घुस गए थे

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2018, 01:16 PM IST

रायपुर। अंबेडकर अस्पताल के एडवांस कार्डिएक इंस्टीट्यूट (एसीआई) में दुर्घटना के बाद खरोरा निवासी एक 18 वर्षीय युवक की छाती से बाहर आए दिल व फेफड़ा को तत्काल सर्जरी कर बचा लिया गया। युवक बाइक फिसलने से गिर और पोल से टकरा गया। इससे उसके छाती की हड्डी टूट गई थी। उसे तत्काल अंबेडकर अस्पताल लाया गया।

 

 

बाइक से जा रहा युवक दुर्घटना में हुआ था गंभीर रूप से घायल

  1. हार्ट बाहर निकलकर धड़क रहा था

    - जब युवक अस्पताल पहुंचा, तब उसे होश नहीं था। ब्लड प्रेशर भी 60-70 से नीचे आ गया था। पल्स भी नहीं चल रहा था।

    - तुरंत कार्डियो थोरेसिक एंड वेस्कुलर सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू को बुलाया गया।

    - इसके पहले युवक का सीटी स्कैन हो चुका था। इसमें पता चला कि उसके सिर में चोट नहीं है।

    - छाती फटी हुई थी, लेकिन गनीमत थी कि हार्ट में अंदरूनी चोट नहीं आई थी।

    - युवक की स्थिति को देखकर तत्काल ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया और उसे एसीआई के ओटी में शिफ्ट किया गया। युवक के छाती से बाहर हार्ट धड़क रहा था।

    - तब डॉक्टरों को लगा कि कहीं इसमें कहीं चोट तो नहीं है, लेकिन ये अच्छी बात यह रही कि युवक की छाती व हार्ट को कोई चोट नहीं पहुंची थी। 

  2. पेट में भर गया था मिट्टी व कंकड़

    - छाती फटने के कारण पेट में मिट्टी, कंकड़ व पत्थर के छोटे टुकड़े घुस गए थे। इसे सबसे पहले निकाला गया।

    - पोल में टकराने के कारण छाती की मजबूत हड्डी (स्टर्नम) टूट गई थी। चार पसली भी टूट गई थी, जिसमें दो गायब थी।

    - टूटी पसली को जोड़ा गया और दो कृत्रिम बनाया गया। फटे डायफ्राम को सूचर से जोड़ा गया।

    - घाव को भी भर दिया गया। हार्ट व फेफड़े की जांच की गई। गनीमत रही की, दोनों अंग सामान्य ढंग से काम कर रहे थे।

    - सर्जरी रात साढ़े 12 बजे तक चली। इसके बाद युवक को वेंटीलेटर पर ही क्रिटिकल केयर यूनिट में शिफ्ट कर दिया गया।

    - ऑपरेशन के पहले एक दिन व ऑपरेशन के दो दिन वह वेंटीलेटर पर रहा। उसे सात बोतल खून की जरूरत पड़ी।
     

  3. किसी दूसरे मरीज का सामान आया काम

    - युवक को जब एंबुलेंस से अस्पताल लाया गया, तो उसके साथ कोई नहीं थी।

    - युवक की गंभीर स्थिति काे देखते हुए उसे ट्रामा में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया। युवक होश में नहीं था। ऑपरेशन के लिए जरूरी सामान की जरूरत थी।

    - एक अन्य मरीज के छाती की सर्जरी अगले दिन होने वाली थी, वही सामान युवक के लिए काम आया।

    - सीएमओ डॉ. रोहित दुबे की तत्परता ने भी इस सफलता में मदद दिलाई।

    - इस क्रिटिकल ऑपरेशन में एनीस्थिसिया के डॉ. मुकेश, जूडो डॉ. रमेश स्टाफ नर्स राजेंद्र साहू व कैथरीना ने भी अपनी भूमिका निभाई। 

     

    कंटेंट/फोटो : पीलूराम साहू 

  4. हार्ट बाहर निकलकर धड़क रहा था

    - जब युवक अस्पताल पहुंचा, तब उसे होश नहीं था। ब्लड प्रेशर भी 60-70 से नीचे आ गया था। पल्स भी नहीं चल रहा था।

    - तुरंत कार्डियो थोरेसिक एंड वेस्कुलर सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू को बुलाया गया।

    - इसके पहले युवक का सीटी स्कैन हो चुका था। इसमें पता चला कि उसके सिर में चोट नहीं है।

    - छाती फटी हुई थी, लेकिन गनीमत थी कि हार्ट में अंदरूनी चोट नहीं आई थी।

    - युवक की स्थिति को देखकर तत्काल ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया और उसे एसीआई के ओटी में शिफ्ट किया गया। युवक के छाती से बाहर हार्ट धड़क रहा था।

    - तब डॉक्टरों को लगा कि कहीं इसमें कहीं चोट तो नहीं है, लेकिन ये अच्छी बात यह रही कि युवक की छाती व हार्ट को कोई चोट नहीं पहुंची थी। 

  5. पेट में भर गया था मिट्टी व कंकड़

    - छाती फटने के कारण पेट में मिट्टी, कंकड़ व पत्थर के छोटे टुकड़े घुस गए थे। इसे सबसे पहले निकाला गया।

    - पोल में टकराने के कारण छाती की मजबूत हड्डी (स्टर्नम) टूट गई थी। चार पसली भी टूट गई थी, जिसमें दो गायब थी।

    - टूटी पसली को जोड़ा गया और दो कृत्रिम बनाया गया। फटे डायफ्राम को सूचर से जोड़ा गया।

    - घाव को भी भर दिया गया। हार्ट व फेफड़े की जांच की गई। गनीमत रही की, दोनों अंग सामान्य ढंग से काम कर रहे थे।

    - सर्जरी रात साढ़े 12 बजे तक चली। इसके बाद युवक को वेंटीलेटर पर ही क्रिटिकल केयर यूनिट में शिफ्ट कर दिया गया।

    - ऑपरेशन के पहले एक दिन व ऑपरेशन के दो दिन वह वेंटीलेटर पर रहा। उसे सात बोतल खून की जरूरत पड़ी।
     

  6. किसी दूसरे मरीज का सामान आया काम

    - युवक को जब एंबुलेंस से अस्पताल लाया गया, तो उसके साथ कोई नहीं थी।

    - युवक की गंभीर स्थिति काे देखते हुए उसे ट्रामा में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया। युवक होश में नहीं था। ऑपरेशन के लिए जरूरी सामान की जरूरत थी।

    - एक अन्य मरीज के छाती की सर्जरी अगले दिन होने वाली थी, वही सामान युवक के लिए काम आया।

    - सीएमओ डॉ. रोहित दुबे की तत्परता ने भी इस सफलता में मदद दिलाई।

    - इस क्रिटिकल ऑपरेशन में एनीस्थिसिया के डॉ. मुकेश, जूडो डॉ. रमेश स्टाफ नर्स राजेंद्र साहू व कैथरीना ने भी अपनी भूमिका निभाई। 

     

    कंटेंट/फोटो : पीलूराम साहू 

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