छत्तीसगढ़ / धान के खेत से हाथियों को खदेड़ने ग्रामीणों के साथ पटाखा फोड़ रहे शिक्षाकर्मी को हाथी ने मार डाला



elephant killed the education worker bursting crackers with the villagers to drive the elephants from the paddy field
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elephant killed the education worker bursting crackers with the villagers to drive the elephants from the paddy field

  • चांदनी बिहारपुर क्षेत्र के पासल गांव में हाथी ने ग्रामीणों पर किया हमला
  •  तीन हाथियों का दल गुरुघासीदास अभयारण्य में विचरण कर रहा है
  •  शाम सात बजे के करीब प्यारे हाथी का दल पासल गांव की ओर पहुंच गया था
  •  18 घंटे पहले भी एक किसान को हाथियों ने कुचलकर मार डाला था 
  •  संभाग में हाथियों के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी एनजीओ को दी गई

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2019, 12:44 AM IST

अंबिकापुर/ओड़गी . सूरजपुर जिले के चांदनी बिहारपुर इलाके के पासल गांव में हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया और शिक्षाकर्मी विश्वनाथ तिवारी को कुचलकर मार डाला। उसका शव पांच सौ मीटर के क्षेत्र में कई टुकड़ों में सुबह बिखरा मिला। 
हाथियों को पटाखा फोड़कर भगाने के दौरान शिक्षाकर्मी के बेटे रामअधीन व दर्जनभर ग्रामीणों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई।

 

हाथियों के एक दल ने शुक्रवार की देर रात भी एक किसान को कुचलकर मार दिया था। हाथियों के बढ़ते उत्पात को रोकने के लिए वन विभाग के अधिकारियों द्वारा कोई ठोस पहल नहीं किए जाने से ग्रामीणों में गुस्सा है। ओड़गी विकासखंड मुख्यालय से 53 किलोमीटर दूर तीन हाथियों का दल गुरुघासीदास अभयारण्य में विचरण कर रहा है। हाथियों का ये दल शाम ढलते ही गांवों की ओर रुख कर रहा है। इसके बाद भी हाथी रिहायशी इलाकों में न आएं, इसके लिए वन अमला ठोस कदम नहीं उठा रहा है।

 

मजबूरी| 12 गांवों के 2 हजार परिवार कर रहे रतजगा
तीन दलों के 72 हाथियों के गुरुघासीदास अभ्यारण में आ जाने से इससे लगे गांव मोहरसोप, बसनरा, कछिया, नवडीहा, जुड़वनिया, खैरा, बघोई, पासल, रेवटी और पेंडारी गांव के लोग दहशत में जी रहे हैं। इन गांवों में करीब 2 हजार परिवार रह रहे हैं और ये जंगल किनारे खेतों में लगे धान व दूसरी फसलों के तैयार होने के बाद भी काटने जाने से डर रहे हैं। वहीं शाम ढलते ही खाना खाकर हाथियों से बचने के लिए घरों के बाहर बैठकर रात बिता रहे हैं। 

 

लापरवाही| अफसर- एनजीओ नहीं निभा रहे अपनी जिम्मेदारी 

संभाग में हाथियों के आतंक से निपटने व लोगों को जागरूक करने के लिए एक एनजीओ को इसका जिम्मा दिया गया है। एनजीओ की जिम्मेदारी है कि वह ग्रामीण इलाकों में जाकर लोगों को जागरूक करे। इसके बाद भी यहां एनजीओ व विभाग के अधिकारी हाथी व मानव संघर्ष को लेकर जागरूकता अभियान जमीनी स्तर पर नहीं चला सके हैं। सूरजपुर डीएफओ भगत का कहना है कि चांदनी बिहारपुर में विभाग लोगों को जागरूक नहीं किया जा सका है।

 

48 घंटे में दो लोगों की गई जान

48 घंटे में दो लोगों को हाथियों द्वारा कुचलकर मार डालने की घटना से लोगों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग के अफसर सूचना देने के बाद भी नहीं पहुंचते हैं। हाथियों से बचाव के कोई उपाय भी नहीं किए जा रहे। घटना के बाद डीएफओ भगत भी मृतक के घर पहुंचे और तात्कालीन सहायता के रूप में 25 हजार रुपए दिए गए।

 

लेमरू एलीफेंट रिजर्व में 100 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा रेस्क्यू सेंटर

कोरबा | लेमरू एलीफेंट रिजर्व में 100 करोड़ का रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा। यहां उत्पाती हाथियों को लाकर सुधारेंगे। जब उत्पाती हाथी की स्थिति सामान्य हो जाएगी उसे पुन: जंगल में छोड़ दिया जाएगा। 4 वन मंडल के 10 से अधिक परिक्षेत्र को शामिल कर रिजर्व बनाने सर्वे की प्रक्रिया जारी है। अभी 1995 वर्ग किलोमीटर में ही प्रस्तावित किया गया है। सर्वे के बाद कटघोरा वन मंडल के ही और भी परिक्षेत्र शामिल हो सकते हैं। 20 साल से वनमंडल कोरबा में जारी हाथी उत्पात की समस्या से निपटने चौथी बार लेमरू एलीफेंट रिजर्व बनाने की प्रक्रिया चल रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वतंत्रता दिवस पर रायपुर में इसकी घोषणा की थी।

 

शनिवार को सीएम ने 100 करोड़ में रेस्क्यू सेंटर बनाने की घोषणा की। अभी सूरजपुर जिले के तमोर पिंगला में रेस्क्यू सेंटर है जहां उत्पाती हाथियों को रखा जाता है। रेस्क्यू सेंटर बनाने के लिए सीसीएफ वन्य प्राणी गढ़उपरोड़ा क्षेत्र का निरीक्षण कर चुके हैं। रिजर्व में 4 परिक्षेत्र बालको, लेमरू, कुदमुरा, पसरखेत के 45 हजार 360 हेक्टेयर एरिया को शामिल किया गया था। अब इसका दायरा 4 वनमंडल के 10 रेंज तक बढ़ाया जा रहा है। रिजर्व का क्षेत्र 1995 वर्ग किलोमीटर में होगा। जिले के वन परिक्षेत्र कुदमुरा के जंगल में हाथियों का झुंड पहली बार 29 सितंबर 2000 को ग्राम कलमीटिकरा में पहुंचा था।

 

यह गांव रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वनमंडल के गांव खड़गांव से नजदीक है। तब से हाथी साल भर तक वनमंडल के जंगल में घूमते हुए नुकसान करते रहते हैं। वनमंडल कोरबा के 54 गांव लेमरू एलीफेंट कॉरीडोर से प्रभावित होंगे। यहां की आबादी 26 हजार है। नए नक्शे के मुताबिक सूची बनायी गई है। कुल 84 कक्ष इसमें शामिल होंगे। लेमरू के 34, बालको के 13, कुदमुरा के 17 व पसरखेत के 18 कक्ष शामिल हैं।


प्रदेश में अभी 254 हाथी, 27 जिले प्रभावित: प्रदेश में अभी हाथियों की अनुमानित संख्या 254 है। इसमें से सरगुजा वन वृत्त में 110, बिलासपुर वृत्त में 121 व रायपुर वन वृत्त में 23 हाथी हैं। वनमंडल सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, जशपुर, मरवाही, कोरबा, रायगढ़, महासमुंद आदि प्रभावित हैं।
 

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