छत्तीसगढ़ / बी कॉम ग्रैजुएट ठग चला रहा था मेडिकल कॉलेज, घर पर छापता था एमबीबीएस की फर्जी डिग्री

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपीपुलिस की गिरफ्त में आरोपी

  • रायपुर पुलिस ने किया गिरफ्तार, 40 से 60 हजार वसूलकर देता था डिग्री 
  • कई 12वीं पास युवाओं को दे चुका है बीएएमएस, एमबीबीएस और डीएएमएस

दैनिक भास्कर

Oct 23, 2019, 02:35 PM IST

रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी से फर्जी मेडिकल कॉलेज चलाने वाले आरोपी को पुलिस ने पकड़ा है। बीकॉम और डीएड की पढ़ाई करने वाले शैलेंद्र ग्वालरे ने पैसे कमाने के मकसद से फर्जी डिग्री बेचने का करोबार शुरू किया। साल 2013 से यहा रैकेट चलाया जा रहा है। हाल ही में एक मध्यप्रदेश के रहने वाले एक युवक की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ले ग्वालरे को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने अब तक कितने लोगों को इस तरह से फर्जी डिग्री बेची इसकी जानकारी ली जा रही है। बुधवार को आरोपी को पुलिस ने मीडिया के सामने पेश किया। सिटी एसपी प्रफुल्ल ठाकुर ने बताया कि आरोपी 40 से 60 हजार रुपए में बिना किसी तरह का कोर्स करवाए, बीएएमएस, डीएएमएस और एमबीबीएस तक की डिग्री बेरोजगारों को दे दिया करता था।

2013 से जारी है फर्जी डॉक्टर बनाने का खेल

पुलिस ने बताया कि आरोपी ने साल 2013 में शहर के पंडरी इलाके में इंडियन अल्टरनेटिव मेडिकल कॉलेज खोल रखा था। कुछ 12वीं पास युवकों ने आरोपी से संपर्क किया। 40 हजार में डिग्री देने का सौदा तय हुआ। 6 अक्टूबर को आरोपी ने युवक को डिग्री देने घड़ी चौक पर बुलाया, फर्जी डिग्री थमाई और रुपए लेकर चला गया। जब पीड़ितों को डिग्री के फर्जी होने की जानकारी उसके दोस्तों ने दी तब मामला पुलिस के पास पहुंचा।  रायपुर की रहने वाली सुनीता उपाध्याय और सुरेखा गोस्वामी नाम की युवतियों को भी इसी तरह ठगा गया। यह मामला सिविल लाइंस थाने में दर्ज है।

आरोपी के खिलाफ मिली शिकायतों के बाद उसकी तलाश में पुलिस ने अपने मुखबीरों को लगाया। सुंदर नगर में आरोपी के होने की जानकारी मिलने पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने धोखाधड़ी की बात कबूली। आरोपी के पास से 40,000 रूपये, 01 नग हीरो होण्डा मोटर सायकल, 11 नग मोबाईल फोन और दर्जनों फर्जी डिग्री और सर्टिफिकेट बरामद किए गए हैं। सिटी एसपी ने बताया कि आरोपी अपने घर ही डिग्री छाप लिया करता था। कई संस्थानों का नाम भी डिग्री पर लिखा होता था। जांच में पता चला कि किसी भी मान्यता प्राप्त मेडिकल इंस्टीट्यूट से इस आरोपी या इसके संस्थान का कोई आधिकारिक अनुबंध वगैरह नहीं है। अब आगे की जांच में अन्य खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।
 

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