छत्तीसगढ़ / शहीद पिता की कसक- एक अदद स्कूल भी सरकार उसके नाम नहीं कर सकी, स्मारक भी नहीं बनवाया



father of martyr's father - even a single school, the government could not name him, not even built a memorial.
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father of martyr's father - even a single school, the government could not name him, not even built a memorial.

  • 2009 में मदनवाड़ा में शहीद 33 जवानों में नवापारा के मिथिलेश साहू भी थे

Dainik Bhaskar

Aug 14, 2019, 04:22 AM IST

सालिक सिंह ठाकुर | सुहेला . आगामी गुरुवार को देश 73वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। इस अवसर पर एक बार फिर अमर शहीदों को याद करते हुए उनके शौर्य का  गुणगान किया जाएगा परंतु यहां से 6 किलोमीटर दूर ग्राम नवापारा के शहीद मिथिलेश के माता पिता को कसक है कि उनके पुत्र द्वारा देश के लिए दिए गए बलिदान को शासन व प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया है। दशक भर पूर्व 12 जुलाई 2009 को मदनवाड़ा के कोरकोट्टी जंगल में शहीद राजनांदगांव के पुलिस अधीक्षक वीके चौबे सहित 33 शहीदों में नवापारा का लाल शहीद मिथिलेश साहू भी शामिल था।

 

शहीद के पिता बंसीलाल साहू ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि सभी वीर सपूतों के नाम व पहचान के लिए शासन-प्रशासन द्वारा कुछ ना कुछ बनाया गया है, परंतु शहीद मिथलेश के नाम पर शासकीय स्कूल प्रवेश द्वार अथवा स्मारक तो दूर कोई शासकीय भवन भी आज तक नहीं बन सका है। उन्होंने जोड़ा-मेरी तमन्ना थी कि जिस स्कूल में वह पढ़ लिखकर बड़ा हुआ, उसे ही शहीद के नाम पर कर दिया जाए जिससे उसकी पहचान बनी रहे परंतु नहीं हो पाया है। शहीद परिवार द्वारा किसान सम्मेलन कार्यक्रम में नवापारा प्रवास पर तत्कालीन कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, बलौदाबाजार के स्वतंत्रता दिवस समारोह में

 

तत्कालीन प्रभारी मंत्री पुन्नूलाल मोहले, वर्तमान नगरीय  : प्रशासन मंत्री शिवकुमार डहरिया सहित विधायकों व जिले के प्रशासनिक अधिकारियों को आवेदन दिया जा चुका है परंतु मंत्रियों द्वारा भी आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।

 

इधर, आमामोरा में पिता ने शहीद बेटे का बनवाया स्मारक, अब उद्घाटन का है इंतजार :  शहीद भोजसिंह टांडील्य के स्मारक के लिए दो लाख रुपये मिले थे, पिता जागेश्वर टांडील्य ने और 10 लाख खर्च कर 12 लाख रुपये में भव्य स्मारक बनवा दिया। एक जिद है पिता की-सीएम आकर अनावरण करें और आईटीआई का नाम शहीद बेटे के नाम पर हो। इसके लिए 5 साल रुकना पड़े तो भी इंतजार करेंगे। 2 मई 2018 को आमामोरा की पहाड़ी पर सर्चिंग के दौरान नक्सलियों द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंग की चपेट में आने से करचिया ग्राम के भोजसिंह शहीद हो गए थे।
 

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