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दंतेवाड़ा. हर क्षेत्र में पुरुषों की बराबरी करने वाली महिलाएं नक्सलियों से मोर्चा लेने में भी किसी से पीछे नहीं हैं। छत्तीसगढ़ के बस्तर में मई 2019 में महिला पुलिसकर्मियों और सरेंडर महिला नक्सलियों की खास टीम “दंतेश्वरी फाइटर्स” का गठन किया गया था। डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड्स (डीआरजी) के तहत काम करने वाली यह 30 सदस्यीय टीम ऑपरेशन के लिए जंगलों में भी जाती है। कॉन्स्टेबल सुनैना पटेल भी इस टीम में शामिल हुई थीं। कमांडो ट्रेनिंग के बाद टीम को लीड कर रहीं सुनैना को कुछ महीने बाद पता चला कि वे प्रेग्नेंट हैं। प्रेग्नेंसी के चलते ऑपरेशन पर असर न पड़े, इसलिए सुनैना ने साढ़े छह महीने तक अफसरों को इस बात की जानकारी नहीं दी।
जब सुनैना को प्रेग्नेंसी का पता चला, तो उनकी चिंता यह थी कि ऐसी हालत में उन्हें ऑपरेशन पर नहीं भेजा जाता। लिहाजा, सुनैना ने अफसरों को इस बात की जानकारी नहीं देने का फैसला किया। डॉक्टर से सलाह लेने के बाद उन्होंने फैसला किया कि वह सुरक्षित रहते हुए काम जारी रखेंगी। ऑपरेशन के लिए एके-47 राइफल और जरूरी सामान से भरा करीब 25 किलो वजनी बैग कंधों पर लटकाकर जाना होता है। सुनैना नदी-नालों, जंगल-झाड़ियों और पहाड़ों में कई किलोमीटर पैदल चलकर ऑपरेशन में शामिल होती रहीं। इसी हालत में उन्होंने साढ़े 6 महीने का समय गुजारा। जब बाकी लोगों को उनकी प्रेग्नेंसी के बारे में पता चला, तो हैरानी के साथ सबने उनके जज्बे की सराहना की।
बेटी हुई तो उसे दंतेश्वरी फाइटर कहेंगे
प्रेंग्नेंसी के कठिन दिनों में ड्यूटी के लिए सुनैना के समर्पण की सभी तारीफ करते हैं। पुलिस की बनाई शॉर्ट फिल्म 'नई सुबह का सूरज' में सुनैना ने लीड रोल किया है। सुनैना की साथी महिला कमांडोज कहती हैं कि अगर उन्हें बेटी हुई, तो सब उसे दंतेश्वरी फाइटर ही कहेंगी। सात महीने पूरे होने के बाद उन्होंने फील्ड ऑपरेशन पर जाना बंद कर दिया है। सुनैना मां बनने के बाद एक बार फिर ऑपरेशन पर जाने की इच्छा रखती हैं।
पति के सपोर्ट से यह मुमकिन हुआ: सुनैना
भास्कर से बात करते हुए सुनैना ने कहा- मैं नक्सल ऑपरेशन पर जाना चाहती थी। गर्भवती होने की जानकारी पर मुझे रोक दिया जाता। इसलिए मैंने किसी को नहीं बताने का निर्णय लिया। मेरे पति ने मुझे बहुत सपोर्ट किया। मैं डिलीवरी के बाद एक बार फिर फील्ड में जाने के लिए तैयार हूं। वहीं, डीआरजी टीम की प्रभारी डीएसपी शिल्पा साहू ने कहती हैं कि सुनैना काे काम का जुनून है। जब हमें उसकी प्रेग्नेंसी का पता चला, तो सेहत काे देखते हुए हमने उसे फील्ड ऑपरेशन पर भेजना बंद कर दिया है।
प्रेग्नेंसी के दौरान नक्सल क्षेत्र में चुनाव ड्यूटी की
नक्सलियों के गढ़ में जब सुरक्षा बलों का कैंप शुरू हुआ, तो यहां महिला डीआरजी की तैनाती की गई थी। इस टीम के साथ सुनैना 45 दिन तक कैंप में ही रहीं। उस वक्त वे साढ़े 4 महीने की गर्भवती थीं। इस दौरान वे नदी के दूसरी तरफ स्थित पाहुरनार गांव में मेगा हेल्थ कैंप और चिकपाल कैंप ओपनिंग समेत मड़कामीरास, जंगमपाल जैसे कई नक्सल प्रभावित गांवों में सर्चिंग और ऑपरेशन में भी शामिल रहीं। चुनाव के समय अंदरूनी इलाकों में ड्यूटी करने में भी सुनैना हमेशा आगे रहीं।
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