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रायपुर / हैकिंग में बैंक से भी पासवर्ड लीक का शक, जिन 26 खातों में पैसे गए; अब उनकी खोज



Hacking suspect of password leak from bank
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Hacking suspect of password leak from bank
  • पेंडिंग निपटाने कर्मचारी छुट्टी में बैंक नहीं जाता तो कई राज्यों से निकल जाते लाखों

Dainik Bhaskar

Nov 10, 2018, 03:44 AM IST

रायपुर . पंडरी के कामर्शियल कोऑपरेटिव बैंक से 2.47 करोड़ रुपए किस तरह हैकरों ने महाराष्ट्र, पं. बंगाल और आंध्रप्रदेश, उत्तरप्रदेश समेत आधा दर्जन राज्यों के 26 खातों में टुकड़े में कैसे ट्रांसफर किए, इसे लेकर पुलिस ने तीन बिंदुओं पर जांच की है।

 

एक्सपर्ट्स के मुताबिक हैकरों ने या तो बैंक के सिस्टम पर सेंध लगाई, या फिर साफ्टवेयर हैक किया गया। तीसरा बिंदु ये भी है कि कहीं बैंक से पासवर्ड वगैरह तो लीक नहीं हुआ, जिसका फायदा हैकरों ने उठा लिया। पुलिस ने आईपी एड्रेस आदि से हैकर की तलाश शुरू कर दी है। हालांकि फोकस उन 26 खातों पर भी है, जिनमें हैकरों ने पैसे ट्रांसफर कर दिए।
अब तक गिरोह की जो कार्यशैली पुलिस को समझ आ रही है, उसके अनुसार बैंक के खाते में सेंध लगाने के छुट्टी का दिन चुना गया। हैकरों को पता था कि बुधवार और गुरुवार छुट्टी रहेगी। खातों में रकम ट्रांसफर होने के बाद जब शुक्रवार को बैंक खुलेगा और हैकिंग का पता चलेगा, तब तक इन 26 खातों से अलग-अलग राज्यों में एटीएम के जरिए बड़ी रकम निकाली जा चुकी होगी।  यह बैंक की खुशकिस्मती थी कि त्योहार में बैंक बंद होने के बावजूद कुछ कर्मचारी बचा हुआ काम निपटाने पहुंच गए और उन्हें पता चल गया कि बैंक का खजाना खाली कर लिया गया है।

 

खातों में ट्रांसफर जांच को उलझाने के लिए : साइबर और बैंकिंग क्राइम के एक्सपर्ट पुलिस अफसरों का मानना है कि हैकर कभी भी हैक की गई पूरी रकम एक खाते में ट्रांसफर नहीं करते। वजह ये है कि एक खाते से बड़ी रकम निकालना बेहद मुश्किल है।

एटीएम से एक खाते से केवल लिमिट में ही रकम निकाली जा सकती है। हैकिंग के मामले में पुलिस को यह भी पता चल जाता है कि ट्रांजेक्शन किस प्लेटफार्म से या किस खाते में हुआ है। पुलिस यह पता लगाने के तुरंत बाद ट्रांजेक्शन रोक लेती है और हैकरों को कुछ नहीं मिलता। इसलिए पुलिस और बैंक को उलझाने के लिए हैकरों ने इतने खातों में पैसे डाले।

 

बैंकों के सुरक्षा घेरे पर सवाल : साइबर एक्सपर्ट ने इंटरनेट पर बैंकों के सुरक्षा घेरे पर सवाल उठाया है। इसी का फायदा हैकर्स उठाते हैं। सॉफ्टवेयर को अपडेट नहीं किया गया है। उनकी सुरक्षा कोडिंग मजबूत नहीं है। एक्सपर्ट के अनुसार इसी वजह से सिस्टम में आसानी से वायरस एंटर कर जाता है। वायरस के माध्यम से ही सिस्टम को हैक किया जाता है। हैकर्स सिस्टम को हैक करने के लिए क्रैक वाले सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे हैं।

 

बैंकिंग सिस्टम, साफ्टवेयर या पासवर्ड से हैकिंग : एक्सपर्ट साइबर एक्सपर्ट मोहित साहू ने बताया कि बैंक का खाता हैक करना आसान नहीं है। हैकर्स ने या तो बैंक का कंप्यूटर सिस्टम हैक किया होगा या फिर बैंकिंग सॉफ्टवेयर। दोनों को हैक करके ही हैकर्स खातों से पैसे का ट्रांजेक्शन कर सकते है।

खाता हैक करने का एक और तरीका आईपीएस एड्रेस और पासवर्ड है। दोनों की जानकारी होने पर हैकर्स पैसे निकाल सकते है। कुछ मामलों में हैकरों के बैंक कर्मियों से भी संपर्क करने और उन्हें झांसा देकर पासवर्ड वगैरह हासिल करने की बात सामने आई है। इसलिए तीनों बिंदुओं की जांच से ही हैकर तक पहुंच सकते हैं। मोहित के अनुसार हैकर्स लगातार वेबसाइट पर नजर रखते हैं और उसमें वायरस (रेट टूल्स) छोड़ते रहते हैं। हैकिंग इसी से की जा रही है।

 

बैंकों से खाते का ब्योरा मांगा : पुलिस उन सभी 26 खातों का संबंधित बैंकों से ब्योरा मांगा है, जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे। संबंधित आधा दर्जन बैंकों से खाते के मालिक का नाम, पता समेत पूरी जानकारी मांगी है। पुलिस ने यह भी पूछा है कि अब तक इन खातों से कहां-कहां पैसे निकाले गए और किन स्त्रोतों से इनमें पैसे डाले जा रहे हैं। पुलिस ने ई-वायलेट में रमक जमा करने वाली ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कंपनियों से भी ब्योरा मांगा है। साइबर विशेषज्ञों की एक टीम बैंकों के सिस्टम से हैकर्स का कंप्यूटर आईपी एड्रेस निकालने की कोशिश कर रही है।
 

रात 2 बजे तक पैसे वापस : देवेंद्र नगर थानेदार अंशुमान सिंह ने बताया कि बैंक ने गुरुवार की शाम 5 बजे शिकायत की। वरिष्ठ अफसरों को सूचना दी गई। तब क्राइम ब्रांच और साइबर सेल ने जांच शुरू की। फर्जीवाड़ा सामने के बाद रात 9:20 बजे एफआईआर की गई। साइबर टीम ने पैसों का ट्रांजेक्शन रोकने और उसे वापस लाने की कार्रवाई शुरू कर दी थी। इसके लिए कई बैंकों के अफसरों से संपर्क किया गया। सर्विस प्रोवाइडर कंपनी के अफसरों 

 

 

 

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