छत्तीसगढ़ / यहां जंगली हाथियों का ऐसा खौफ कि किसान फसल की निगरानी करने के लिए पेड़ों पर मचान बनाते हैं



Here is the horror of wild elephants that can not sit on the ground for long
X
Here is the horror of wild elephants that can not sit on the ground for long

Dainik Bhaskar

Jul 26, 2019, 09:29 AM IST

दुर्गा प्रसाद बंजारा | रायगढ़ . धरमजयगढ़ नगर पंचायत का उदउदा गांव। यहां हाथियों के खौफ की वजह से किसान फसल की निगरानी पेड़ों पर करीब 25 फीट की ऊंचाई पर मचान बनाकर करते हैं। कुछ ऐसे ही हाल पास के गांव फतेहपुर के हैं। यहां जंगली हाथियों के डर की वजह से किसानों ने 60 एकड़ भूमि पर खेती करना ही छोड़ दिया है। हाथी या तो फसल उजाड़ देते हैं या यहां से गुजरते समय धान की खुशबू पाकर घरों तक पहुंच जाते हैं और तोड़फोड़ करते हैं। वनमंडल से मिली जानकारी के अनुसार बीते 6 साल में हाथियों ने क्षेत्र में 100 से अधिक लोगों की जान ली है।

 

...और इस समस्या की 2 बड़ी वजह

 

  •  धरमजयगढ़ वनमंडल में कई गांव में लोग जंगलों के बीचों-बीच खेती कर रहे हैं। यहां से धान की खुशबू पाकर हाथी बस्ती तक पहुंच जाते हैं।
  •  अब तक करोड़ों रुपए हाथियों के रहवास क्षेत्र को विकसित करने के नाम पर खर्च किए जा चुके हैं। लेकिन जंगल में हाथियों के खाने या पानी के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। इस वजह से हाथी खेत या मोहल्लों तक पहुंचने से आज तक नहीं रोके जा सके हैं।

हाथी जहां हों वहां नुकसान होता ही है
 

जनहानि रोकना हमारी पहली प्राथमिकता है। हाथियों को हटाना संभव नहीं, हम केवल ये प्रयास कर सकते हैं कि जनहानि न हो। हाथी जिस भी देश या राज्य में हों वहां नुकसान तो होता ही है। कुछ हाथियों को चिन्हित कर रेडियो कॉलर लगाने का प्रस्ताव भेजा है, कुछ को कॉलर लगा भी चुके हैं।’ -प्रणय मिश्रा, डीएफओ, धरमजयगढ़

 

...इधर, कोरबा में छाल रेंज से पकड़कर लाया गया जंगली हाथी गणेश कुदमुरा से जंजीर तोड़कर भाग गया। क्योंकि रेस्क्यू सेंटर में रखने की जगह वन विभाग के अधिकारियों ने बना लिया था बंधक। रायपुर के वन्यप्राणी विशेषज्ञ नितिन सिंघवी की याचिका पर हाईकोर्ट ने वन विभाग से 2 हफ्ते में मांगा जवाब।

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना