नागरिका संशोधन कानून / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, 'सीएए संविधान की भावना के खिलाफ, इसे वापस लिया जाए'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (फाइल फोटो) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (फाइल फोटो)
नागरिकता संशोधन कानून को वापस लेने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लिखा प्रधानमंत्री को पत्र। नागरिकता संशोधन कानून को वापस लेने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लिखा प्रधानमंत्री को पत्र।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (फाइल फोटो)प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (फाइल फोटो)
नागरिकता संशोधन कानून को वापस लेने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लिखा प्रधानमंत्री को पत्र।नागरिकता संशोधन कानून को वापस लेने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लिखा प्रधानमंत्री को पत्र।

  • पीएम नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री बघेल ने अधिनियम को अनुच्छेद 14 के विपरीत बताया
  • पत्र में कहा- अधिनियम का वर्तमान संशोधन धर्म के आधार पर अवैध प्रवासियों का विभेद करता है

दैनिक भास्कर

Jan 30, 2020, 05:36 PM IST

रायपुर. नागरिकता संशोधन कानून को वापस लेने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। पत्र में मुख्यमंत्री बघेल ने अधिनियम को संविधान के अनुच्छेद 14 के विपरीत बताया है। उन्होंने लिखा है कि इस अधिनियम का वर्तमान संशोधन धर्म के आधार पर अवैध प्रवासियों का विभेद करता है। संविधान के समक्ष सभी संप्रदाय समान होते हैं। संसद के द्वारा अधिनियमित नागरिकता (संशोधन) अधिनियम(सीएए) धर्म निरपेक्षता के इस संवैधानिक आधारभूत भावना को खंडित करता दिखाई दे रहा है। 

संविधान की मूल भावना के विपरीत कोई कानून न बनाया जाए

मुख्यमंत्री बघेल ने पत्र में कहा है कि भारत के पड़ोसी देशों, जैसे श्रीलंका, म्यांमार, नेपाल और भूटान इत्यादि देशों से आने वाले प्रवासियों के संबंध में इस अधिनियम में कोई भी प्रावधान नहीं किया गया है। संविधान का अनुच्छेद-14 देश के सभी वर्गों के व्यक्तियों के समानता का अधिकार और कानून के अंतर्गत समानता की गारंटी को सुरक्षित रखता है। इसके लिए जरूरी है कि संविधान की इस मूल भावना के विपरीत कोई भी कानून नहीं बनाया जाए। छत्तीसगढ़ में इस अधिनियम के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हो रहे हैं। 

आगे लिखा है कि विरोध में विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए। छत्तीसगढ़ में मूलतः अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़े वर्ग के निवासी हैं।  इनमें बड़ी संख्या में गरीब, अशिक्षित और साधनविहीन हैं। इनको इस अधिनियम की औपचारिकता को पूर्ण करने में कठिनाइयों का निश्चित रूप से सामना करना पड़ सकता है। जनमानस में विरोध प्रदर्शन को देखते हुए, गरीब तबके व असाक्षर लोगों को असुविधा न हो, देश में शांति बनी रहे और संविधान की मूल अवधारणा सुरक्षित रहे, इन सबको देखते हुए सीएए को वापस लिए जाने का प्रदेशवासियों की ओर से आपसे अनुरोध है। 

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