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रायपुर / विवि ने रोका था 40 छात्राओं का रिजल्ट, हाईकोर्ट ने कहा- 10 हजार रुपये अदा करें



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  • आयुष विवि ने 2016 में एडमिशन की आखिरी तारीख 11 नवंबर के बाद प्रवेश लिए छात्राआें का रिजल्ट रोक दिया था
  • कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा- आधारहीन तथ्यों के आधार पर इन छात्राआें का रिजल्ट रोका गया, पहुंची मानसिक पीड़ा

Dainik Bhaskar

Oct 12, 2018, 10:55 PM IST

रायपुर. पं. दीनदयाल उपाध्याय आयुष विवि ने सरकारी नर्सिंग कॉलेज जगदलपुर की 40 छात्राआें का रिजल्ट रोक दिया था। इस पर हाईकोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि आधारहीन तथ्यों के आधार पर इन छात्राआें का रिजल्ट रोका गया। इससे छात्राआें को मानसिक पीड़ा हुई है। यही नहीं उनका करियर भी दांव पर लग गया है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता छात्राओं को 10-10 हजार रुपए देने के निर्देश भी दिए हैं।

 

यह राशि राज्य शासन व विवि को आधी-अाधी देनी होगी। आयुष विवि ने 2016 में एडमिशन की आखिरी तारीख 11 नवंबर के बाद प्रवेश लिए छात्राआें का रिजल्ट रोक दिया था। इनमें रायपुर समेत जगदलपुर व दूसरे सरकारी नर्सिंग कॉलेज की छात्राएं शामिल हैं।

 

विवि के निर्णय के खिलाफ जगदलपुर नर्सिंग कॉलेज की 40 छात्राओं ने हाईकोर्ट में आठ याचिका लगाई थी। इस पर सुनवाई करते हुए जज प्रशांत कुमार मिश्रा ने आयुष विवि को खूब खरी खोटी सुनाई है। जज ने कहा कि विवि ने आधारहीन तथ्यों के आधार पर छात्राआें का रिजल्ट रोकना न्यायसंगत नहीं था।

 

2016 में चिकित्सा शिक्षा संचालनालय के अधिकारियों ने एडमिशन की आखिरी तारीख बीत जाने के बाद भी 1500 से ज्यादा छात्राओं को एडमिशन दे दिया था। इसमें लेन-देन का आरोप भी लगा है। मामले में शासन ने डेढ़ साल पहले तत्कालीन काउंसिलिंग प्रभारी डॉ. सुमीत त्रिपाठी, काउंसिलिंग अधिकारी डॉ. ओंकार खंडवाल को सस्पेंड कर दिया था। वहीं, काउंसिलिंग में नर्सिंग प्रभारी संविदा प्रोफेसर सबीना बेन की सेवाएं खत्म कर दी गई थीं।

 

डॉ. त्रिपाठी व डॉ. खंडवाल की बहाली अभी तक नहीं हुई है। इन अधिकारियों ने लेन-देन कर निजी ही नहीं सरकारी कॉलेजों के प्राचार्यों को एडमिशन देने के लिए दबाव बनाया था। रायपुर व अंबिकापुर की प्राचार्य अपने बयान में इस बात की पुष्टि कर चुके हैं।

 

आयुष विवि ने इस मामले में सरकारी कॉलेज की छात्राआें को परीक्षा में बिठाया था, लेकिन निजी कॉलेजों की 600 छात्राओं को परीक्षा से वंचित कर दिया था। इन छात्राओं ने भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इस पर सुनवाई चल रही है।

 

एडमिशन की तय तारीख के बाद भी छात्राओं को एडमिशन देने में काउंसिलिंग अधिकारियों के साथ निजी कॉलेज प्रबंधनों की सांठगांठ थी। मामले का खुलासा तब हुआ था, जब इंडियन नर्सिंग काउंसिल आईएनसी ने इस मामले में आपत्ति की थी।

 

दरअसल जब कॉलेजों ने एडमिशन की पूरी जानकारी आईएनसी को भेजी, तब तारीख पकड़ में आ गई। इस पर डीएमई कार्यालय को कड़ा पत्र भी लिखा गया था। नर्सिंग घोटाले में चिकित्सा संचालनालय के बड़े अधिकारियों के शामिल होने की आशंका है।

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