भास्कर खास / 68 साल में 110 महिलाएं उतरीं चुनाव मैदान में, 16 जीतीं, पहले पांच चुनाव में 78% और पिछले पांच चुनाव में 8% सक्सेस रेट



In 68 years, 110 women contested, 16 wins in the election
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In 68 years, 110 women contested, 16 wins in the election

  • दूसरे आम चुनाव में कांग्रेस ने दो को टिकट दिया और दोनों ही जीतीं
     

Dainik Bhaskar

Apr 16, 2019, 06:59 AM IST

राकेश पाण्डेय, रायपुर . आजादी के बाद हुए पहले चुनाव से अब तक लोकसभा में अविभाजित मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से 110 महिलाएं किस्मत आजमा चुकी हैं। इनमें से केवल 16 ही सांसद बनने में सफल रहीं हैं। यानी 68 सालों में लगभग 15 प्रतिशत महिलाएं सांसद चुनी गई हैं। पहले पांच चुनावों में जहां 78 फीसदी महिलाएं सांसद बनीं। वहीं, पिछले पांच चुनावों में 8 प्रतिशत महिलाएं ही सांसद बन सकीं। 1951 के पहले आम चुनाव में किसी भी दल ने महिला प्रत्याशी को मौका नहीं दिया था। हालांकि, 1957 के चुनाव में दो महिलाएं कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ी और दोनों को जीत मिली। यही स्थिति 1962 में भी रही। 1967 में 5 महिलाएं चुनाव लड़ीं, कांग्रेस की चार में से तीन महिलाएं सांसद चुनी गईं। 
इस चुनाव में भारतीय जनसंघ ने पहली बार महिला प्रत्याशी को उतारा लेकिन उसे जीत हासिल नहीं हुई। 

 

सबसे अधिक चार बार सांसद रहीं पुष्पा देवी : सारंगढ़ के राजा की बेटी पुष्पा देवी सिंह चार बार सांसद चुनी गईं। पहली बार वे राजनांदगांव सीट से 1967 में, इसके बाद तीन बार रायगढ़ सीट से सांसद चुनी गईं। मिनीमाता तीन बार सांसद चुनी गईं। दो बार बलौदाबाजार और एक बार जांजगीर सीट से चुनी गईं। रायपुर सीट से 1957 में पहली और अंतिम बार रानी केशर कुमारी देवी महिला सांसद के रूप में चुनी गईं हैं। 

 

दो बार तीन महिला सांसद : अब तक केवल दो बार तीन-तीन महिला सांसद चुनी गईं। पहली 1967 में और दूसरी 2009 में। 1967 में तीनों सांसद कांग्रेस से थीं। 2009 में दो भाजपा, एक कांग्रेस से। 

 

2009 से भाजपा को बढ़त : भाजपा से पहली महिला सांसद जांजगीर से 2004 में करुणा शुक्ला बनीं थीं। 2009 में बीजेपी ने दो सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को केवल एक सीट से संतोष करना पड़ा।

 

इस लोकसभा चुनाव में 20 महिलाएं मैदान में : 2019 के लोकसभा चुनाव में 20 प्रत्याशी मैदान में हैं। लोकसभा और राज्यसभा में 33 फीसदी प्रतिनिधित्व की वकालत करने वाली कांग्रेस ने भी इस चुनाव में केवल 18 फीसदी महिलाओं को ही टिकट दिया है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों ने दो-दो प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। बसपा से तीन और अन्य राजनीतिक दलों से 8 महिलाएं चुनाव लड़ रही हैं। इसके अलावा पांच महिलाएं निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं।

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