भास्कर एक्सक्लूसिव / राजधानी देश में पहली, जहां तीन साल पानी की जांच करेगा रुड़की का संस्थान, गंदगी का ढूंढेंगे समाधान



Institute of Roorkee will seek water for three years
X
Institute of Roorkee will seek water for three years

  • 70-80 ग्रिड में बांटकर हर सीजन में लिए जाएंगे सैंपल, इनकी अत्याधुनिक तकनीक से होगी जांच

Dainik Bhaskar

Jul 27, 2019, 08:26 AM IST

अमिताभ अरुण दुबे| रायपुर . देश के किसी भी उभरते या यानी इमर्जिंग शहर में ग्राउंड वॉटर को लेकर पहली बार व्यापक स्टडी की शुरुआत रायपुर और नवा रायपुर में होगी। देश का अत्याधुनिक संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट अाफ हाईड्रोलाॅजी (एनअाईएच) रुड़की के विशेषज्ञ और हाईटेक मशीनें यहां इस बात की जांच करेंगी कि अाखिर 20 साल राजधानी में पानी की गुणवत्ता कि तरह खराब हुई है, इसकी वजह क्या है और कैसे दूर की जा सकती है? 


रायपुर के पानी में गंभीर प्रदूषण की शिकायत के बाद प्रदेश का जलसंसाधन विभाग और एनअाईएच मिलकर विश्व बैंक की मदद से लगातार तीन साल यहां के पानी की जांच करते रहेंगे, ताकि स्थायी समाधान निकला जा सके। एनएचआई भूजल और सरफेस वाटर का अध्ययन करने वाला देश का अत्याधुनिक संस्थान है। इसके साइंटिस्ट जीसीएमएस तकनीक से यहां के पानी की गुणवत्ता जांचेंगे। इसकी पहल प्रदेश सरकार की ओर से ही हुई है। एनअाईएच 8 या 9 अगस्त को इस पूरे स्टडी प्रोजेक्ट का प्रजेंटेशन देगा। जांच का विषय यही रहेगा कि रायपुर शहर में बीते 20 साल में हर वार्ड में पानी की क्वालिटी में किस तरह गिरावट आई है। 

 

तीन साल की इस स्टडी में पूरे शहर को 70 से 80 ग्रिडों में बांटा जाएगा और हर हिस्से से बार-बार सैंपल लिए जाएंगे। इस तरह, हर इलाके में ग्राउंड वॉटर की गुणवत्ता की जांच बारीकी से होगी। जिन मशीनों से शहर के पानी को परखा जाएगा, वह डेढ़-दो करोड़ रुपए तक की हैं। एक बार पानी टेस्ट करने में करीब 10 से 15 हजार रुपए खर्च आएगा।

 

पता चलेगा, अच्छा पानी कहां : तीन साल की इस मैराथन स्टडी के बाद रायपुर या नवा रायपुर में ये बताना आसान हो जाएगा कि किस हिस्से में कहां बोर करवाना चाहिए, ताकि अच्छी क्वालिटी का पानी मिले। इससे राजधानी में पानी को लेकर योजना बनाने में मदद मिलेगी। पानी की क्वालिटी सुधारने के लिए क्या किया जाना चाहिए ये भी पता चल जाएगा। इस व्यापक अध्ययन के बाद साइंटिस्ट शहर में पानी की क्वालिटी सुधारने के लिए सुझाव भी दे पाएंगे। ये सुझाव अाधुनिक होंगे, ताकि घरों में साफ पानी की उपलब्धता बढ़ाई जा सके। विशेषज्ञों के मुताबिक ग्राउंड वॉटर पर इस तरह की स्टडी शहर के भविष्य के लिहाज से एक अच्छा संकेत भी है। 

 

कितनी गहराई में भूजल की क्वालिटी कैसी है, जांच में यह भी पता चलेगा : लगातार प्रदूषित होता पानी रायपुर शहर में एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। अभी जिन तरीकों से पानी की जांच हो रही है, वो सतह के अंदर एक्वीफर के किस स्तर पर कितना खराब हुआ है, ये बताना मुमकिन नहीं होता है। पहली बार भूजल के अलग-अलग स्तर पर पानी कितना अच्छा या खराब है, इसकी जांच हो सकेगी। आम तौर पर जब घरों में बोर का पानी खराब आने लगता है, तब अक्सर बोर को और ज्यादा गहरा करने की सलाह लोग देते हैं। ग्राउंड वॉटर की चार लेयर या स्तर होते हैं। पहला स्तर 70 से 100 फीट के अंदर का होता है। इसे ऊपरी हिस्सा कह सकते हैं। इसके बाद 100 से 200 फीट, फिर 200 से 600 फीट और इसके बाद 600 से 1200 फीट। इस प्रोजेक्ट में ग्राउंड वॉटर की चार स्तरों पर जांच की जाएगी।

 

 नाॅलेज ये है जीसीएमएस तकनीक : गैस क्रोमेटोग्राफी मॉस स्पेक्ट्रोमेट्री तकनीक पानी की क्वालिटी को टेस्ट करने की सबसे एडवांस तकनीक है। इसके जरिए प्रदूषण के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाता है। प्री और पोस्ट मानसून, दोनों सीजन में पानी का डाटा लेकर इनडैप्थ स्टडी की जाती है। हर सीजन में प्रदूषण के कारण पता चल सकते हैं।

 

रायपुर और नवा रायपुर शहर में भूजल से जुड़ी दिक्कतों की जांच के लिए पहले रोडमैप बनाएंगे, फिर शहर को अलग-अलग ग्रिड में बांटेंगे। 3 साल की जांच में बेहतर समाधान देंगे।

-एमके शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक, एनआईएच रुड़की

 

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना