छत्तीसगढ़ / गरीब ने बेटे की आर्य समाज मंदिर में शादी की, समाज ने 21 हजार का दंड और भोज का फरमान सुनाया



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  • सात माह बाद सामाजिक रीति-रिवाज से शादी का बनाया दबाव, मना करने पर किया बहिष्कृत
  • अध्यक्ष के समझाने पर भी तुमगांव के पदाधिकारी नहीं माने तो 9 लोगों के खिलाफ दर्ज कराया मामला

Dainik Bhaskar

Jul 13, 2019, 05:55 PM IST

महासमुंद. एक व्यक्ति ने अपने ही समाज की युवती के साथ बेटे की शादी सामाजिक रीति-रिवाज के बजाए आर्य समाज के मंदिर में जाकर कर दी। इसके चलते समाज के ठेकेदारों ने उस पर भोज कराने और 21 हजार रुपए का अर्थदंड लगाने का फरमान जारी कर दिया। परिवार ने इससे इनकार किया तो उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। समाज के अध्यक्ष ने भी पदाधिकारियों को समझाया, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद परिवार की ओर से 9 लोगों के खिलाफ डीजीपी से शिकायत की गई है। सारा मामला तुमगांव पंचायत का है। 

मिन्नतें की तो अर्थदंड 16 हजार किया, बोले- भोज कराना जरूरी

  1. महासमुंद मुख्यालय से 12 किमी की दूरी पर तुमगांव नगर पंचायत है। पंचायत के वार्ड नंबर 13 के रहने वाले है रमेश निर्मलकर धोबी समाज से हैं। उनका बेटा नागेश्वर निर्मलकर एक पेट्रोल पंप में काम करता है। रमेश की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। वह मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करता है। आर्थिक तंगी के कारण रमेश ने अपने बेटे नागेश्वर की शादी अपने ही समाज की युवती से 3 दिसंबर 2018 को रायपुर के आर्य समाज के मंदिर में कर दी। रायपुर नगर निगम में शादी का पंजीयन भी करावा लिया।

  2. समाज के लोगों ने शुरू में तो कुछ नहीं बोला, लेकिन सात महीने बाद एक चपरासी रमेश के घर आया और उसे बैठक में बुलाए जाने की जानकारी दी। रमेश अपने बेटे नागेश्वर को लेकर सामाजिक बैठक में गया तो आरोप है कि वहां पदाधिकारियों ने नागेश्वर की शादी सामाजिक रीति रिवाज से नहीं करने और समाज को भोज नहीं देने के कारण उसे अवैध बता दिया। साथ ही रमेश पर 21 हजार का अर्थदंड और समाज के लोगों को भोज कराने का फैसला सुनाते हुए दो माह का समय दिया। 

  3. रमेश ने अर्थदंड और समाज को भोज कराने में असमर्थता जाहिर की तो पदाधिकारियों ने उसके परिवार को समाज से बहिष्कृत कर दिया। रमेश के मिन्नतें करने पर अर्थदंड 21 हजार रुपए से घटाकर 16 हजार रुपए कर दिए गए, लेकिन भोज कराने को कहा। उसके बाद रमेश ने अपने प्रदेश अध्यक्ष से मदद की गुहार लगाई। प्रदेश अध्यक्ष के समझाने के बाद भी तुमगांव के पदाधिकारी नहीं माने। वहीं समाज के पदाधिकारी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने केवल भोज कराने के लिए कहा है। 

  4. समाज के प्रमुख गोविंद निर्मलकर ने बताया कि पीड़ित को बहिष्कृत और अर्थदंड नहीं लगाया गया है। सिर्फ समाज को भोज कराने के लिए कहा गया है। वहीं, एसपी संतोष सिंह ने कहा- प्राथमिक जांच में अर्थदंड लगाना और बहिष्कृत करना सही पाया गया है। समाज के नौ लोगों पर मामला दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। 

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