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कुतुल / 40 आदिवासियों की हत्या के बाद अबूझमाड़ का बंद साप्ताहिक बाजार दो साल बाद शुरू



Market open after 2 years in Abujhmad
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Market open after 2 years in Abujhmad

  • आदिवासियों के हौसले के सामने हारे नक्सली

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2018, 03:01 AM IST

कुतुल, मोहम्मद इमरान नेवी. पथरीली सड़क, चारों ओर घने जंगल सड़क के बीच नक्सलियों के द्वारा लगाए गए आईईडी और बारूदी सुरंगें चारों ओर नक्सली पर्चे और बैनर अटे पड़े, दूर दूर तक ना कोई गांव ना सड़क पर कोई व्यक्ति।

 

ये नजारा था अबूझमाड़ के सरहद के अंदर प्रवेश के बाद का भास्कर की टीम नक्सलियों के पीएलजीए सप्ताह के बीच उनकी राजधानी कहे जाने वाले कुतुल तक पहुंची। जगह जगह कुछ टूटे तो कुछ खड़े नक्सलियों के स्मारक नजर आए।
 
ऐसे समझे अबूझमाड़ को: अबूझमाड़ नारायणपुर जिले में स्थित है। इसका कुछ हिस्सा महाराष्ट्र तथा कुछ आंध्रप्रदेश मे पड़ता है। यह भारत के 6 प्रमुख बाघ आश्रय स्थलों क्रमश: इन्द्रावती, नल्ला-मल्ला कान्हा, नागझीरा, ताडोबा और उदन्ती सीतानदी राष्ट्रीय उद्यान से जंगलों के द्वारा संपर्क में है। 

 

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है अबूझ मतलब जिसको बूझना संभव ना हो और माड़ यानि गहरी घाटियां और पहाड़। यह एक अत्यंत दुर्गम इलाका है। लगभग 5000 वर्ग किलोमीटर के इस इलाके में कोई सड़क नहीं  है।
 
गांव वालों की जिद के सामने हारे अफसर : दो सालों से बंद पड़े साप्ताहिक बाजार को नक्सली खतरे और अफसरों की नाराजगी के बीच खुद के दम पर लोगों ने शुरू किया है। दरअसल, दो साल पहले यहां नक्सलियों ने एक के बाद एक 40 आदिवासियों की हत्या कर दी थी इसके बाद बाजार बंद हो गया था। दो साल तक इंतजार के बाद लोगों ने खुद ही अपनी परेशानी का हल ढूंढा और बाजार चालू करने की घोषणा कर दी।

 

ऐसा माना जा रहा है कि 40 गांवों के लोग यहां से खरीदारी करेंगे। शुक्रवार को दो साल बाद शुरू हुए कुतुल के साप्ताहिक बाजार के पास ही अाश्रम शाला हाेने से वहां के बच्चे भी पहुंच गए थे। 

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