छत्तीसगढ़ / तेलंगाना, मेघालय, मणिपुर और कश्मीर से आए एमबीबीएस स्टूडेंट छत्तीसगढ़ी सीख रहे, सीनियर डॉक्टर छह दिन पढ़ा रहे नि:शुल्क

सप्ताह में छह क्लास हो रही एक-एक घंटे की  । सप्ताह में छह क्लास हो रही एक-एक घंटे की ।
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सप्ताह में छह क्लास हो रही एक-एक घंटे की  ।सप्ताह में छह क्लास हो रही एक-एक घंटे की ।

  • छत्तीसगढ़ी सीखने वाले छात्रों की संख्या 50 से 55 है, जबकि अंग्रेजी की कक्षा में 10 से 15 छात्र
  • मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया ने छात्रों के लिए  स्थानीय भाषा सीखना अनिवार्य कर दिया था

दैनिक भास्कर

Jan 30, 2020, 12:49 AM IST

रायपुर. पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस छात्रों के लिए छत्तीसगढ़ी व अंग्रेजी की क्लास शुरू हो गई है। इनमें उत्तर-पूर्वी, दक्षिण भारत के छात्रों की संख्या ज्यादा हैं। कुछ छत्तीसगढ़ के भी छात्र हैं, जिन्हें छत्तीसगढ़ी व अंग्रेजी नहीं आती। छत्तीसगढ़ी सीखने वाले छात्रों की संख्या 50 से 55 है। जबकि अंग्रेजी की कक्षा में 10 से 15 छात्र। कॉलेज के दो सीनियर डॉक्टर छत्तीसगढ़ी व अंग्रेजी नि:शुल्क पढ़ा रहे हैं। मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया ने छात्रों के लिए सत्र 2019-20 से स्थानीय भाषा सीखना अनिवार्य कर दिया था। इससे मरीजों के इलाज में आसानी होगी। 

अंग्रेजी सीखने वालों में ज्यादातर छत्तीसगढ़ के छात्र हैं

एमसीआई के निर्देश के बाद कॉलेज प्रबंधन ने एनाटॉमी के सभागार में छत्तीसगढ़ी व अंग्रेजी की कक्षा शुरू कर दी है। अब तक 10 से ज्यादा कक्षा हो चुकी है। छत्तीसगढ़ी सीखने वालों में मेघालय, मणिपुर, जम्मू एंड कश्मीर, पश्चिम बंगाल, ओडीशा, राजस्थान, आंध्रप्रदेश व तेलंगाना राज्य व केंद्र शासित प्रदेश के छात्र हैं। वहीं अंग्रेजी सीखने वालों में ज्यादातर छत्तीसगढ़ के छात्र हैं। छत्तीसगढ़ी की कक्षा एनाटाॅमी विभाग के एचओडी डॉ. मानिक चटर्जी ले रहे हैं, जबकि अंग्रेजी नेत्र रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. निधि पांडेय पढ़ा रही हैं। दक्षिण व उत्तर-पूर्वी राज्य से आए ज्यादातर छात्रों को छत्तीसगढ़ी भाषा के बारे में बिल्कुल नहीं जानते। उनके लिए प्रोजेक्टर के माध्यम से बीमारी व शरीर के अंगों को छत्तीसगढ़ी में अनुवाद कर बताया जा रहा है। उदाहरण के लिए सिर को मुड़ी, सिरदर्द को मुड़ी पिराना, पैर को पांव, छाती में दर्द को छाती में पीरा, उंगली को अंगरी, अंगूठा को अंगठा समेत दूसरे जरूरी अंग व बीमारियों के बारे में बताया जा रहा है। 

इलाज करने में आसानी होती है
एक कक्षा के बाद अगली कक्षा शुरू होने के पहले  रिवीजन कराया जा रहा है। ताकि छात्र छत्तीसगढ़ी शब्दों को आसानी न भूल जाएं। हार्ट सर्जन डॉ. केके साहू व ब्लड कैंसर विशेषज्ञ डॉ.विकास गोयल का कहना है कि मरीजों की इलाज के लिए छत्तीसगढ़ी भाषा का ज्ञान अनिवार्य है। इससे इलाज में आसानी होती है।

सप्ताह में छह क्लास हो रही एक-एक घंटे की  
सप्ताह में छह दिन छत्तीसगढ़ी व अंग्रेजी की क्लास लग रही है। मंगलवार, गुरुवार व शनिवार को छत्तीसगढ़ी, जबकि साेमवार, बुधवार व शुक्रवार को अंग्रेजी की क्लास लग रही है। छत्तीसगढ़ी की कक्षा में ज्यादा छात्र होने से पढ़ाने वाले डॉक्टर भी उत्साहित है। डॉ. चटर्जी का कहना है कि अंबेडकर अस्पताल में 90 फीसदी से ज्यादा मरीज स्थानीय होते हैं। वे अपनी बीमारी छत्तीसगढ़ी में बताते हैं। ऐसे में दूसरे राज्यों से आए डॉक्टर व मेडिकल छात्रों को उनकी भाषा समझने में परेशानी होती है। कक्षा के बाद वे मरीजों की भाषा समझने लगेंगे। उन्हें बीमारी के इलाज में भी आसानी होगी। आने वाले दिनों में कंप्यूटर की क्लास भी लगाई जाएगी। ताकि छात्रों को कंप्यूटर का बेसिक ज्ञान हो जाए। इसके लिए शिक्षक की तलाश की जा रही है।  
 

एमबीबीएस में ही 700 से ज्यादा छात्र : एमबीबीएस 
फर्स्ट ईयर से लेकर फाइनल ईयर तक एमबीबीएस छात्रों की संख्या 700 से ज्यादा है। इनमें एमबीबीएस फर्स्ट ईयर की संख्या 150 है। छत्तीसगढ़ी व अंग्रेजी इन्हीं छात्रों को सिखाई जा रही है। एमसीआई की गाइडलाइन के अनुसार फर्स्ट ईयर के छात्रों को स्थानीय भाषा का ज्ञान देना है।

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