छत्तीसगढ़ / मोबाइल, टीवी, कम्प्यूटर देर तक चलाने से बिगड़ रही आंखों की सहेत, एक वर्ष में सरगुजा के 1825 विद्यार्थी दृष्टि दोष व आंखों में सूखापन से पीडि़त



Mobile, TV and computer are running late due to deteriorating eyes
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Mobile, TV and computer are running late due to deteriorating eyes

  • मेडिकल काॅलेज अस्पताल में दृष्टि दोष व ड्राई आई सिंड्रोम के 10 से 15 मरीज रोजाना आ रहे

Dainik Bhaskar

Oct 10, 2019, 04:35 AM IST

राजेश िसंह| अंबिकापुर  . सरगुजा जिले में छात्र-छात्राओं में दृष्टि दोष के साथ आंखें में सूखापन (ड्राई आई सिंड्रोम) की बीमारी के केस बढ़ रहे हैं। 6 वर्ष में ही प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में ऐसे मरीजों की संख्या डेढ़ गुना बढ़कर 1825 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं की स्वास्थ्य जांच में ये आंकड़े सामने आए हैं। विभाग द्वारा 2013 में 38,963 विद्यार्थियों की आंखों की जांच कराई गई थी। इसमें 1374 विद्यार्थी दृष्टि दोष से पीड़ित मिले थे और इनमें कई सूखापन  की बीमारी से भी पीड़ित थे। वर्ष 2018 में सिर्फ 28,259 विद्यार्थियों की आंखों की जांच कराई गई। जिसमें पीड़ित विद्यार्थियों की संख्या बढ़कर 1825 हो गई। 


गुरुवार को विश्व दृष्टि दिवस है। इसको लेकर भास्कर ने बुधवार को आंखों में बढ़ रही बीमारी को लेकर पड़ताल की, जिसमें ये आंकड़े सामने आए हैं। अस्पताल की ओपीडी में रोजाना दृष्टि दोष व सूखापन  की बीमारी के 5 से 10 विद्यार्थी सामने आ रहे हैं। अंबिकापुर से 9 वीं का छात्र दीपक कुमार गुरुवार को आंखों का चेकअप कराने मेडिकल काॅलेज अस्पताल पहुंचा था। उसने बताया कि उसकी आंखों में जलन व भारीपन की शिकायत रहती है। जांच में पता चला कि उसे ड्राई आई सिंड्रोम की शिकायत है।

 

डाॅक्टर बताते हैं कि इसकी मुख्य वजह टीवी, मोबाइल, कम्प्यूटर पर ज्यादा समय देना है। इस दौरान पलकें कम झपकती हैं, जिससे आंखों को रेस्ट नहीं मिलता। इसके अलावा विटामिन ए व डी की कमी से यह बीमारी होती है। रोजाना ओपीडी में दृष्टि दोष के इतने  मरीज मिल रहे हैं। मेडिकल काॅलेज अस्पताल में 6 से 9 अक्टूबर के बीच 103 मरीज आंखों की परेशानी से जांच कराने पहुंचे। इसमें  38 मरीज दृष्टि दाेष व आंखों मेंे सूखापन की बीमारी से पीड़ित मिले। इनमें मोतियाबिंद के मरीज शामिल नहीं हैं।

 

जानिए: क्या है ड्राई आई सिंड्रोम और दृष्टि दोष : ड्राई आई सिंड्रोम व दृष्टि दोष दोनों अलग-अलग बीमारी हैं। ड्राई आई सिंड्रोम में आंसू ग्रंथी से पानी कम आने से आंख की तरलता कम होने लगती है। इससे आंखों में जलन व भारीपन होने लगता है। दृष्टि दोष में नजदीक व दूर की चीजें देखने में परेशानी होती है। विद्यार्थियों में दूर दृष्टि की समस्या ज्यादा आती है। इसमें दूर की वस्तु देखने में परेशानी होती। इसे चश्मे से दूर किया जाता है।

 

ड्राई आई सिंड्रोम से बचने आंखों को रेस्ट मिलना जरूरी : आंखों की पलक एक मिनट में 15 से 20 बार झपकनी चाहिए। इससे आंखों को आराम मिलता है। आंसू ग्रंथी से आंखों की तरलता बनी रहती है। टीवी, मोबाइल, कम्प्यूटर के सामने बैठकर देखने से पलकें नहीं झपकती हैं। टीवी, मोबाइल व कम्प्यूटर से निकलने वाली अल्ट्रा वायलेट किरणें आंखों की आंसू ग्रंथी को प्रभावित करती हैं। इससे ड्राई आई सिंड्रोम की बीमारी होती है। इसके साथ ही इससे दृष्टि दोष भी होता है। इससे बचने लोगों को ज्यादा समय तक टीवी, मोबाइल, कम्प्यूटर के सामने नहीं बैठना चाहिए। कुछ समय के अंतराल में आंखों को पानी से धोना चाहिए। इससे आंखों को आराम मिलता है और तरलता बरकरार रहती है।
डाॅ. रजत टोप्पो, नेत्र रोग विशेषज्ञ, मेडिकल काॅलेज अस्पताल अंबिकापुर

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