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मुरिया दरबार में नंदराज पहाड़ पर बोले लोग- खुदाई पर राय नहीं ली

एक वर्ष पहले
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  • मांझियों ने देवी-देवताओं के लिए शेड बनाने की 15 साल पुरानी मांग फिर दुहराई
  • मांझियों ने उठाईं कई समस्याएं लेकिन समाधान करने वाला कोई नहीं था

जगदलपुर. बस्तर दशहरा में बाहर रैनी के बाद गुरुवार की दोपहर सिरहासार में आयोजित मुरिया दरबार दाेपहर 1 बजे शुरू हुअा जाे करीब पाैने 3 बजे बिना किसी समाधान के खत्म हाे गया। दशहरा पर्व से जुड़े मांझी-चालकी मेंबरिन समेत सभी महत्वपूर्ण लोगों ने अपनी समस्याओं को दरबार में प्रस्तुत किया। इस दौरान दंतेवाड़ा के प्रेमलाल मांझी ने नंदराज पहाड़ का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि इसे अडानी को दिया जा रहा है। इसे पुजारी, पटेल, गायता, मांझी सभी जानते हैं लेकिन किसी ने भी खदान देने से पहले इनकी राय लेने की कोशिश नहीं की। उन्होंने जोर देकर कहा कि बैलाडीला का पहाड़ सबको पाल रहा है, इसका कार्यालय भी यहीं होना चाहिए। उपाध्यक्ष अर्जुन मांझी ने कहा कि इस बार दशहरे में एक पैसे की उधारी नहीं की गई है। सारी व्यवस्था नगदी ही पूरी की गई।
 
हमीरगढ़ के टहलसिंह मांझी ने कहा कि सुकमा जिले के देवी-देवता नहीं आ पा रहे हैं। समय रहते इन्हें भी आमंत्रित करना चाहिए। कोंडागांव के मांझी मनेर सिंह कोर्राम ने मांझियों को और भी ज्यादा सक्रिय होने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मांझी अपने क्षेत्र से ज्यादा से ज्यादा लोगों को दशहरा में शामिल होने के लिए लाने को कहें। मांझियों ने विभिन्न इलाकों से आए देवी- देवताओं के लिए शेड बनाने की अपनी 15 साल पुरानी मांग इस साल फिर एक बार उठाई। मांझियों ने कहा कि मावली परघाव की शाम हुई जमकर बारिश से टाउन क्लब के सामने बनाए गए स्थल में पानी भर गया और कीचड़ हो गया था।
 
कमलचंद्र ने कहा- रथ खींचने वाले 500 लोगों के लिए 60 बोरी चावल कम, इसे बढ़ाया जाना चाहिए
 
मुरिया दरबार में आए बस्तर राज परिवार के सदस्य कमलचंद्र भंजदेव ने ग्रामीणों की ओर से आई कई मांगों का जिक्र करते हुए कहा कि पर्व के अंतिम दो दिन विजय रथ खींचने आए 500 ग्रामीणों के लिए सिर्फ 60 बोरी चावल दिया गया जो अपर्याप्त है। इसे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि रथ खींचने वाले इन माड़िया लोगों को लूटपाट का अधिकार है, लेकिन दुकानें बंद हो जाने से अब यह भी बंद हो गया है। दशहरा में संभाग भर से देवी-देवता शामिल होते हैं, लेकिन निमंत्रण नहीं मिलने से बहुत जगह से नहीं आ पाते हैं। संभाग स्तरीय बैठक कर सभी जगह निमंत्रण पत्र भेजा जाना चाहिए। बाहर से आने वालों ठहरने की व्यवस्था की जानी चाहिए क्योंकि दशहरा में सेवा की दृष्टि से लोग आते हैं और सेवा का मूल्य पैसे से नहीं आंका जा सकता।
 
 
यातायात पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल
मुरिया दरबार में यातायात पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए। राज परिवार के सदस्य कमलचंद्र भंजदेव ने कहा कि एक स्कार्पियो समेत कई बाइक इस बार रथ के रास्ते में होने से क्षतिग्रस्त हो गए। पुलिस को रथ परिक्रमा के पूरे मार्ग को नो पार्किंग जोन बनाया जाना चाहिए, क्योंकि बाहर से आए लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती है। 
 
सभी बड़े अफसर शहर में मौजूद थे पर आए नहीं
चित्रकोट चुनाव के चलते बस्तर में लागू आदर्श आचार संहिता का असर मुरिया दरबार पर दिखा। हालांकि इससे पहले भी आचार संहिता के दौरान भले ही राजनेता शामिल न होते हों लेकिन सरकार की ओर से अफसर जरुर शामिल होते रहे हैं। इस बार सभी बड़े अफसर शहर में होने के बावजूद यहां नहीं पहुंचे।

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