छत्तीसगढ़ / घर बसाने के लिए छोड़ा नक्सलवाद, 7 लाख के ईनामी नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण



पुलिस अधिकारियों के साथ आत्मसमर्पित नक्सली पुलिस अधिकारियों के साथ आत्मसमर्पित नक्सली
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पुलिस अधिकारियों के साथ आत्मसमर्पित नक्सलीपुलिस अधिकारियों के साथ आत्मसमर्पित नक्सली

 

  • सुकमा पुलिस के सामने आए तीन ईनामी नक्सली और एक नक्सल सहयोगी 
  • नक्सलियों की नीतियों से तंग आकर अब शुरु करेंगे सामान्य जीवन 

Dainik Bhaskar

Oct 09, 2019, 06:30 PM IST

सुकमा. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जिले सुकमा में 4 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें से 3 पर कुल सात लाख के ईनाम की घोषणा सरकार ने कर रखी थी। बुधवार को पुलिस महकमे के आला अधिकारियों के सामने आकर इन्होंने नक्सलवाद को छोड़कर एक आम शहरी की जिंदगी बिताने की इच्छा जताई। आत्मसमर्पित नक्सलियों में 5 लाख की ईनामी माड़वी गंगी, 1 लाख की ईनामी मड़कम हुंगी, 1 लाख का ईनामी कुड़ामी गंगा और नक्सलियों का सहयोगी सोड़ी जोगा शामिल हैं।

नक्सली ऐसे करते हैं अपने ही साथियों का शोषण

  1. आत्मसमर्पण करने वाली माड़वी को बचपन में ही नक्सली उठाकर ले गए थे। ट्रेनिंग ली और नक्सलियों के लिए काम किया। माड़वी ने  साल 2012 में गंधारपारा- सिंघमपारा के बीच पुलिस पर हमला किया था। मार्च 2018 में माधोपारा इलाके के हमले में भी शामिल थी। उप पुलिस अधिक्षक श्याम मधुकर ने बताया कि माड़वी शादी करना चाहती थी। नक्सली इसके खिलाफ थे। नक्सली न सिर्फ महिलाओं का शोषण करते हैं, बल्कि उन्हें शादी करने औ मां बनने की इजाजत नहीं होती। इन्हीं बातों से तंग आकर और एक सामान्य जिंदगी जीने की मंशा से उसने नक्सलवाद छोड़ दिया।

  2. मड़कम हुंगी 2014 में नक्सलवाद से जुड़ी। उसके साथी कई नक्सली नेता आत्मसमर्पण कर चुके हैं। कुड़ामी गंगा 2008 में नक्सली बना। 2015 में इसने दुधीरास के पास पुलिस पार्टी पर हमला किया था सोड़ी जोगा नक्सलियों के लिए रोजमर्रा की चीजों के बंदोबस्त का काम किया करता था। अधिकारी मधुकर ने बताया कि इन्हें किसी तरह का वेतन या अन्य कोई भी फायदा नक्सली नहीं देते हैं। न रिश्तेदारों से मिलने की इजाजत होती है न ही आम लोगों में घुलने मिलने की। दूसरी तरफ सरकार इन्हें नई जिंदगी देने के मकसद से योजनाएं चला रही है, जिससे नक्सली प्रभावित हो रहे हैं।

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