छत्तीसगढ़ / नर्स ने 50 हजार में घर पर की थी नसबंदी, जा चुकी है एक और जान



Nurse had stabilized at home in 50 thousand
X
Nurse had stabilized at home in 50 thousand

Dainik Bhaskar

May 26, 2019, 01:46 AM IST

पलारी . खैंदा के सरकारी अस्पताल की नर्स डागेश्वरी यादव का एक और कारनामा सामने आया है। जैसे ग्राम गुमा की पूर्णिमा पाल (26) की गलत तरीके से नसबंदी के बाद मौत हुई, इसी तरह एक और महिला जान गंवा चुकी है। 

 

भास्कर में पूर्णिमा की खबर छपने के बाद एक और पीड़ित ने अपनी व्यथा साझा की है। छेरकापुर निवासी दुर्पति फेकर पति विजय (30) ने भी डागेशवरी से प्रसव के बाद 2 सितंबर 2018 नसबंदी कराई थी। उसके 5 दिन बाद डागेश्वरी के घर पर ही इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। इसके बाद बिन मां के बच्चे को बाहर का दूध पिलाने से उसके बच्चे की भी मौत हो गई। दुर्पति को 1 सितंबर को प्रसव पीड़ा हुई तो वह भी अपने पति के साथ डागेश्वरी यादव के घर पहुंची जहां उसका प्रसव कराकर नर्स ने दूसरे दिन दो तारीख को ही दुर्पति की नसबंदी कर दी।

 

एक दिन बाद 3 सितंबर को 2018 को उसकी छुट्टी भी कर दी। इसके एवज में उसने 50 हजार रुपए लिए। 6 सितंबर के दुर्पति की तबीयत बिगड़ गई तो वह फिर डागेश्वरी के घर इलाज कराने पहुंची। पूरे एक दिन उसके घर पर ही भर्ती रही जहां डागेश्वरी उसका इलाज करती रही। बिना मेडिकल सुविधा के 7 सितंबर 2018 को दुर्पति की डागेश्वरी के घर पर मौत हो गई।  

 

डागेश्वरी का यह ऐसा पहला मामला नहीं : बताना जरूरी है कि डॉ. प्रमोद तिवारी एवं डागेश्वरी यादव का इस तरह का कोई पहला मामला नहीं है। इसके पूर्व भी ऐसे ही मामलों में नर्स के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है जिससे दो बार उसे जेल भी जाना पड़ा था। दुर्पति का बच्चा भी बिन मां के 15 दिन ही जिंदा रह पाया, बाहर का दूध पिलाने से उसकी मौत हो गई। दुर्पति के पति विजय और ससुर खेदूराम फेकर ने कहा कि गलत उपचार से दुर्पति की मौत हुई है।

COMMENT