छत्तीसगढ़ / कम बारिश, बिजली कटौती और खाद-बीज की कमी पर चर्चा के लिए विपक्ष का हंगामा

Opposition ruckus to discuss low rainfall, power cuts and deficiency of manure seeds
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Opposition ruckus to discuss low rainfall, power cuts and deficiency of manure seeds

  • मानसून सत्र का तीसरा दिन विपक्ष का काम रोको प्रस्ताव खारिज होने पर आसंदी के सामने नारेबाजी

Jul 17, 2019, 04:30 AM IST

रायपुर .  किसानों के मुद्दे पर मंगलवार को समूचे विपक्ष ने सदन में जमकर हंगामा किया। इसके चलते पहले अध्यक्ष फिर सभापति को हंगामे के बीच ही सदन की कार्यवाही चलानी पड़ी। विपक्ष ने किसानों से वादाखिलाफी, खाद बीज की अनुपलब्धता, बिजली की कटौती जैसे मुद्दे को लेकर स्थगन प्रस्ताव लाकर चर्चा कराने की मांग की, लेकिन स्पीकर ने इसे स्वीकार नहीं किया। इस पर विपक्ष के सभी 16 विधायक आसंदी के सामने नारेबाजी करने लगे तो सभी को निलंबित कर दिया गया। शू्न्यकाल में बीजेपी के शिवरतन शर्मा ने यह मामला उठाते हुए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की मांग की।


इसके समर्थन में नारायण  चंदेल, पूर्व सीएम अजीत जोगी और  डा. रमन सिंह ने कहा कि इससे विकट स्थिति किसानों के सामने कभी नहीं आई। किसान दोतरफा मार झेल रहा है। अजय चंद्राकर ने कहा कि 8 माह में ही पाप का घड़ा भर गया है, इसलिए इंद्र देव छत्तीसगढ़ से रूठ गए हैं। इसे देखते हुए किसानों के लिए तत्काल राहत के उपाय करने चाहिए।


 बसपा के केशव चंद्रा ने कहा कि केसीसी से किसानों को कर्ज नहीं मिल रहा। कांग्रेस के धनंेद्र साहू ने अभनपुर नहर परियोजना का मामला उठाया। सौरभ सिंह ने कहा कि रामानुजगंज में किसान ने आत्महत्या की है। इस पर कांग्रेस के सचेतक कुलदीप जुनेजा ने बीजेपी पर फर्जी आरोप लगाना बंद करने की नसीहत दी। 

 

जोगी कांग्रेस के धर्मजीत सिंह ने कहा कि स्थगन की ग्राह्यता पर चर्चा को रोकने का प्रयास निंदनीय है। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि 15 जिलों में अवर्षा की स्थिति है। किसानों की मदद के लिए इसी सत्र में चर्चा कराई जाए। बृजमोहन अग्रवाल ने  कहा कि मानसून सत्र किसानों के लिए होता है, अब चर्चा नहीं होगी तो कब होगी। सभापति शर्मा ने कहा कि इस पर ध्यानाकर्षण लिया गया है, उस पर चर्चा कर लें। स्थगन को स्पीकर ने अग्राह्य कर दिया है। यह सुनते ही पहले विपक्ष और फिर सत्तापक्ष के विधायकों ने एक -दूसरे के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इसके कारण सदन को 10 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा।

 
दोबारा जब कार्यवाही शुरू हुई, तो फिर हंगामा शुरू हो गया। इस दौरान पक्ष-विपक्ष दोनों तरफ से जमकर नोंक-झोंक भी हुई। सभापति सत्यनारायण शर्मा ने स्पीकर द्वारा स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य कर दिए जाने की सूचना दी। इस पर विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी। नारेबाजी के बीच ही सभापति ने ध्यानाकर्षण पर चर्चा शुरू कर दी। इसका विषय भी खेती किसानी ही था तो कृषि मंत्री चौबे ने विपक्ष से इस चर्चा में भाग लेने का आग्रह किया लेकिन विपक्ष नहीं माना। और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वेल में आ गया।


विधानसभा के नियम के मुताबिक सभापति शर्मा ने सभी विधायकों के स्वत: निलंबित होने की घोषणा करते हुए बाहर जाने के लिए कहा।  लेकिन बीजेपी, जोगी कांग्रेस और बसपा विधायक वहीं धरने पर बैठ गये। बार-बार निर्देश मिलने के बावजूद सदन से बाहर विपक्षी विधायक नहीं गये। करीब 20 मिनट तक सदन में इसी तरह का शोर शराबा चलता रहा। इसके बाद विपक्ष के विधायकों ने बहिष्कार का ऐलान करते हुए सदन को छोड़ दिया और फिर बाद में बाहर गांधी की प्रतिमा के नीचे आकर धरने पर बैठ गये। हालांकि कार्यवाही खत्म करने से पहले सभापति ने सभी का निलंबन खत्म भी कर दिया। 

 

ये हुए निलंबित :  धरमलाल कौशिक, रमन सिंह, ननकी राम कंवर, पुन्नुलाल मोहिले, अजय चंद्राकर,नारायण चंदेल, कृष्णमूर्ति बांधी, सौरभ सिंह, डमरूधर पुजारी, विद्यारतन भसीन, रजनेश सिंह, रंजना साहू, धर्मजीत सिंह, रेणु जोगी, केशव चंद्रा और इंदु बंजारे।

 

किसानों की हो रही अनदेखी : रमन


सदन से बाहर रमन सिंह ने सरकार पर किसानों के मुद्दे पर हठधर्मिता का आरोप लगाया। रमन ने कहा कि सदन में सरकार किसानों के मुद्दे पर चर्चा नहीं करना चाहती जबकि पूरे प्रदेश के किसान सदन की तरफ आशा भरी नजरों से देख रहे हैं। विधानसभा में हम खाद बीज के मुद्दे पर चर्चा चाहते थे, वादाखिलाफी के मुद्दे पर चर्चा कराना चाहते थे, लेकिन सरकार इन सभी की अनदेखी कर रही है। सदन मंदिर है, इसे छोड़ते हुए हमें भी पीड़ा होती है, लेकिन सरकार का जिस तरह का रुख है, उससे साफ हो गया है कि ये सरकार किसान विरोधी है। इसलिए हमने बहिष्कार किया है। 

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