छत्तीसगढ़ / मुकेश गुप्ता-रजनेश को नोटिस; धरमलाल की हाईकोर्ट में याचिका- एसआईटी जांच रोकी जाए

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2019, 04:32 AM IST


Petition in Dharamlal's High Court - SIT probe should be stopped
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Petition in Dharamlal's High Court - SIT probe should be stopped
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रायपुर/बिलासपुर . नान घोटाले से जुड़े मामलों में बुधवार को 2 बड़े घटनाक्रम हुए। पहला- फोन टेपिंग के आरोपी डीजी मुकेश गुप्ता और एसपी रजनेश को ईओडब्लू ने नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया। दूसरा- एसआईटी जांच के खिलाफ नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौिशक ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगा जांच रोकने की मांग की है। डीजी गुप्ता और रजनेश अपने-अपने घर पर नहीं थे, इसलिए नोटिस तामील नहीं हो सका।

 

ईओडब्लू अफसरों के अनुसार दो बार नोटिस और दिया जाएगा, फिर भी दोनों उपस्थित नहीं हुए तो फरार घोषित कर दिए जाएंगे। गुप्ता और रजनेश को जब से फोन टेपिंग सहित आधा दर्जन धाराओं में आरोपी बनाया गया है, दोनों तभी से गायब हैं। दोनों को सस्पेंड कर पुलिस मुख्यालय अटैच किया गया है, पर न तो दोनों ने आमद नहीं दी है और न छुट्टी का आवेदन। डीजी गुप्ता और एसपी रजनेश 9 फरवरी को सस्पेंड किए गए थे।


 दोनों पर नान घोटाले की जांच के दौरान की गई गड़बड़ी के एवज में 7 फरवरी को पहला केस दर्ज किया गया। वहीं, बिलासपुर के ईई के खिलाफ की गई जांच में भी फोन टेपिंग करने और बाद में केस बनाने के लिए फर्जी दस्तावेज कोर्ट में पेश करने पर 11 फरवरी को दूसरा कस दर्ज किया गया। दोनों किसी सार्वजनिक स्थान पर भी नजर भी नहीं आए हैं, इसलिए उनके प्रदेश से बाहर होने के कयास लगाए जा रहे हैं।


डीएसपी की छुट्टी की अर्जी : ईओडब्लू में पदस्थ डीएसपी आरके दुबे ने छुट्टी का आवेदन भेजा है। डीएसपी दुबे 7 फरवरी से गायब हैं। 7 फरवरी को दुबे ने अफसरों को बताया था कि डीजी गुप्ता और रजनेश के दबाव में आकर उन्होंने फोन टेपिंग मामले में गड़बड़ी की। बयान देने के कुछ घंटों के बाद दुबे ने कोर्ट में हलफनामा देकर कहा कि ईओडब्लू आईजी एसआरपी कल्लूरी और एसपी कल्याण ऐलेसेला ने बंधक बनाकर जबरन उनसे बयान लिखवाए।

 

पूर्व प्रमुख सचिव अमन सिंह के खिलाफ एसआईटी जांच पर हाईकोर्ट की रोक : हाईकोर्ट से पूर्व प्रमुख सचिव अमन सिंह को राहत मिली है। कोर्ट ने उनके खिलाफ एसआईटी जांच के आदेश पर रोक लगा दी है। अमन सिंह द्वारा बिना किसी एफआईआर के एसआईटी गठन को नियम विरुद्ध बताते हुए, जांच पर रोक लगाने की याचिका लगाई थी।

 

जस्टिस प्रशांत मिश्रा की बेंच में मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी। अमन सिंह ने याचिका में कहा था कि जिस मामले में सरकार ने पहले ही उन्हें एनओसी दे दी, उसकी फिर जांच का कोई औचित्य नहीं है। इसलिए जांच निरस्त की जाए। दरअसल, दिल्ली की विजया मिश्रा ने अमन सिंह के खिलाफ पीएमओ में शिकायत की थी।

 

 इसमें कहा गया था आरईएस से वीआरएस लेने के बाद अमन सिंह को छत्तीसगढ़ में संविदा नियुक्ति दी गई। इस दौरान उन्होंने पूर्व में खुद प दर्ज प्रकरण की जानकारी छिपाई। जबकि 2001-02 में बैंगलुरू में पोस्टिंग के दौरान उन पर भ्रष्टाचार मामले की जांच की हुई, चार्जशीट भी पेश हुई थी। पीएमओ ने विजया की शिकायत छत्तीसगढ़ सरकार को भेजी।

 

जिसके बाद प्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग की सचिव रीता शांडिल्य ने ईओडब्ल्यू के महानिदेशक को पीएमओ से मिली शिकायत का हवाला देते हुए अमन सिंह के खिलाफ एसआईटी जांच के आदेश दिए थे।


सिंह की तरफ से पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता किशोर भादुड़ी ने तर्क प्रस्तुत किया कि एफआईआर दर्ज किए बगैर एसआईटी जांच शुरू नहीं की जा सकती। इधर, अधिवक्ता विकास सिंह ने रायपुर में मीडिया को बताया कि हमने अपनी याचिका में कहा कि बिना एफआईआर के एसआईटी का गठन अवैधानिक है। कोई अपराध हुआ है या नहीं सिर्फ यह पता लगाने के लिए एसआईटी गठन किया गया, जो सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट जहां एफआईआर होगी, वहीं इन्वेस्टिगेशन हो सकती है। पीएमआे की भूमिका मामले में सिर्फ पोस्ट आॅफिस की रही है।

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