छत्तीसगढ़ / 29 राज्यों के रेरा एक प्लेटफार्म पर, देशभर में प्रोजेक्ट और बिल्डरों की मिलेगी जानकारी



Projects and builders will get information from across the country on a platform of 29 states
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Projects and builders will get information from across the country on a platform of 29 states

  • अभी 29 में से 20 राज्यों में स्वतंत्र रेरा है और 9 में विभागीय प्रमुख सचिव को इसकी जिम्मेदारी दी गई है
  • छत्तीसगढ़ मेें एक हजार के करीब आवासीय प्रोजेक्ट रजिस्टर्ड हैं 

Dainik Bhaskar

May 17, 2019, 01:50 AM IST

रायपुर. केंद्र सरकार रेरा को और मजबूत करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए बिल्डर्स के आवासीय प्रोजेक्ट में और पारदर्शिता लाने के लिए देश के सभी 29 राज्यों के रेरा को एक प्लेटफार्म पर फोरम ऑफ रेरा रेग्युलेटर का गठन किया जा रहा है। अभी 29 में से 20 राज्यों में स्वतंत्र रेरा है और 9 में विभागीय प्रमुख सचिव को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। 

 

छत्तीसगढ़ रेरा के चेयरमैन विवेक ढांड ने बताया कि पिछले दिनों दिल्ली में देशभर के रेरा के रेग्युलेटरों ने एक कॉन्फ्रेंस में एक-दूसरे के यहां की आवासीय गतिविधियों पर चर्चा की। रेरा के फैसलों के क्रियान्वयन में आ रही दिक्कतों पर विचार विमर्श किया गया। केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग की तर्ज पर फोरम ऑफ रेरा रेग्युलेटर के गठन पर भी चर्चा हुई। साथ ही रेरा के जरिए उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाने के प्रयासों की भी समीक्षा की गई। यह बात उभर कर सामने आई कि रेरा के फैसलों का क्रियान्वयन सबसे अच्छा छत्तीसगढ़ में हुआ है।

 

इससे परे मुंबई में काफी बेहतर काम हुआ है, लेकिन रेरा के फैसलों के क्रियान्वयन के मामले में पीछे हैं। हालांकि छत्तीसगढ़ से 22 गुना ज्यादा आवासीय प्रोजेक्ट महाराष्ट्र में चल रहे हैं। छत्तीसगढ़ मेें एक हजार के करीब आवासीय प्रोजेक्ट रजिस्टर्ड हैं। 


सभी राज्यों को एक दूसरे के प्रोजेक्ट और बिल्डरों की जानकारी मिलेगी : जानकारों का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से सभी रेरा रेग्युलेटर एक-दूसरे से लिंक हो जाएंगे। बड़ा फायदा यह है कि न सिर्फ राज्यों में चल रहे आवासीय प्रोजेक्ट की जानकारी होगी, बल्कि खरीददार, बैंकर्स-बिल्डरों के कामकाज पर भी निगाह रखी जा सकेंगे। एक-दूसरे के यहां चल रही आवासीय परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी होगी। साथ ही साथ बिल्डरों का भी ब्यौरा होगा। किसी अन्य राज्य में गड़बड़ी करने पर बिल्डरों की जानकारियां साझा होगी। साथ ही साथ इससे उपभोक्ताओं को फायदा होगा। रेरा के फैसलों की जानकारियां भी साझा होंगी। केंद्र सरकार के प्रतिनिधि होने पर क्रियान्वयन में आ रही दिक्कतों को दूर करने की दिशा में पहल की जा सकेगी। साथ ही खरीददार देश के किसी भी शहर में प्रापर्टी खरीद सकेंगे और प्लान के अनुसार निर्माण न होने की शिकायत आन लाइन कर सकेंगे।

 

27 को तय होगा कंपनी बनाएं या ट्रस्ट : फोरम ऑफ रेरा रेग्युलेटर के गठन के लिए 27 मई को दिल्ली में कॉन्फ्रेंस रखी गई है। इसमें केंद्रीय नगरीय विकास सचिव डीएस मिश्रा मौजूद रहेंगे। अभी इस बात पर विचार चल रहा है कि इसे कंपनी की तरह बनाया जाए या सोसायटी या फिर ट्रस्ट का रूप दिया जाए।

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