छत्तीसगढ़ / पोला : घरों में महकी ठेठरी-खुरमी, तीजहारिनों ने खाया करूभात, मुख्यमंत्री ने की नंदी पूजा



raipur Traditional festival of Chhattisgarh Pola today, mud bulls will be offered to God, Nandi Puja will be in CM house
X
raipur Traditional festival of Chhattisgarh Pola today, mud bulls will be offered to God, Nandi Puja will be in CM house

  • सीएम हाऊस में जुटे कलाकार, पारंपरिक परिधानों में बांधा नृत्य का समां
  • छत्तीसगढ़ के पारंपरिक त्यौहार पर आज रावणभाठा में बैलों की प्रतियोगिता 

Dainik Bhaskar

Aug 30, 2019, 07:30 PM IST

रायपुर. खरीफ फसल की बुआई-जुताई का जश्न 'पोला' शुक्रवार को धूमधाम से मनाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के इस पारंपरिक पर्व पर मुख्यमंत्री आवास में सुबह से ही कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धर्मपत्नी मुक्तेश्वरी बघेल के साथ भगवान शिव और नंदी की पूजा-अर्चना की। कर्मा, सुआ, राउत नाचा और पंथी के नर्तक दलों की प्रस्तुति ने तिहार कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी संस्कृति की छटा बिखेर दी। झमाझम बारिश ने कार्यक्रम के रंगों को और गहरा किया। 

एक दिन पहले से ही घरों में बनने लगे ठेठरी-खुरमी जैसे पकवान

  1. पारंपरिक खेल के दौरान महिलाओं ने चम्मच में कंचा रखकर रेस लगाई

    पोला पर्व पर गुरुवार शाम से मोहल्ले ठेठरी-खुरमी जैसे पकवानों की खुश्बू से महकने लगे थे। किसान परिवारों ने पूजा-अर्चना के लिए कृषि औजारों की सजावट और बैलों का श्रृंगार कर लिया है। मिट्टी से बने खिलौने का इस दिन खास महत्व है। प्रदेश के पारंपरिक बर्तन, जिनमें लाल रंग का चूल्हा, हंड़िया, कुरेड़ा, गंजी, टीन, कड़ाही, जाता, सील-लोड़हा आदि शामिल हैं। पोला पर इन्हीं बर्तनों को छोटे आकार में तैयार किया जाता है। पूजा-अर्चना के बाद बच्चे इससे खेलते हैं। वहीं इन खिलौनों को देवी-देवताओं को अर्पित करने की परंपरा भी है।

  2. कार्यक्रम में पारंपरिक व्यंजनों का लुत्फ लेती महिलाएं

    मुख्यमंत्री निवास में तीज मनाने आईं महिलाओं के लिए श्रृंगार की व्यवस्था भी गई थी। महिलाओं के लिए मेंहदी, आलता लगाने के साथ ही रंग-बिरंगी चूड़ियों का भी इंतजाम था। कई तरह के देसी खेल भी हुए। इनमें जलेबी दौड़, मटकी डांस, कबड्डी में महिलाओं ने  हिस्सा लिया। लोक गायिका ममता चन्द्राकर ने अरपा-पैरी के धार के जैसे लोकगीतों से माहौल में छत्तीसगढ़ की खुशबू फैलाई । कार्यक्रम में महिलाओं ने  करूभात (करेले की सब्जी के साथ पका हुआ चावल)  खाने की रस्म भी पूरी।

  3. महिलाओं को बांटी सुपोषण किट

    महिलाओं को बांटी सुपोषण किट

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कार्यक्रम के दौरान  सुपोषण अभियान की औपचारिक शुरूआत की। सीएम ने महिलाओं को सुपोषण किट बांटी। किट में मौसमी फल, खजूर, मूँग दाल, देशी चना, भाजी शामिल थीं। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर  2 अक्टूबर से इस सुपोषण अभियान को पूरे प्रदेश में चलाया जाएगा। पूरे प्रदेश को आने वाले तीन साल में कुपोषण से मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

  4. मूल रूप से खेती-किसानी से जुड़ा पर्व है पोरा

    छत्तीसगढ़ का पोरा पर्व मूल रूप से खेती-किसानी से जुड़ा है। खेती किसानी में बैल और गौ वंशीय पशुओं के महत्व को देखते गांवों में इस दिन बैलों को विशेष रूप से सजाया जाता है। उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। शीतला देवी समेत भैसासुर, ठाकुर देवता, मौली माता, साड़हा देवता, धारण देव, परेतिन दाई, बईगा बाबा, घसिया मसान, बधधरा, कचना धुर्वा, चितावर, सतबहिनी, राय देवता, घटोरिया, चिरकुटी मुनि, सियार देवता आदि को देवी-देवताओं को मिट्टी के बैल चढ़ाकर पूजा-अर्चना की जाएगी।  

  5. घरों में बच्चे मिट्टी से बने नंदी बैल और बर्तनों के खिलौनों से खेलते हैं। सभी घरों में ठेठरी, खुरमी, गुड़-चीला, गुलगुल भजिया जैसे पकवान तैयार किए जाते हैं और उत्सव मनाया जाता है। बैलों की दौड़ भी इस अवसर पर आयोजित की जाती है। प्रदेश भर में मिट्‌टी से बने बैलों के जोड़े बिक रहे हैं। इसको लेकर बच्चों में खास उत्साह है। प्रदेश में पहली बार सरकारी तौर पर छत्तीसगढ़ी परंपरा से जुड़े पर्वों का आयोजन किया जा रहा है। 

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना