छत्तीसगढ़ / जरूरतमंदों को ब्लड देने से इंकार, ओवर स्टॉक बताकर दानदाताओं को भी लौटाया



Refusal to give blood to the needy, Over Stock, as well as giving donations to the donors
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Refusal to give blood to the needy, Over Stock, as well as giving donations to the donors

  • अंबेडकर अस्पताल के ब्लड बैंक में प्राइवेट अस्पतालों जैसा सिस्टम
     

Dainik Bhaskar

Jul 14, 2019, 06:33 AM IST

रायपुर . अंबेडकर अस्पताल के ब्लड बैंक में अजीबोगरीब सिस्टम चल रहा है। ओ- पॉजीटिव ग्रुप का ब्लड ओवर स्टॉक होने का हवाला देकर दान देने पहुंच रहे रक्तदाताओं को लौटाया जा रहा है। उसके एवज में मरीजों को कितनी भी जरूरत हो दूसरे ग्रुप का ब्लड भी नहीं दिया जा रहा है।

 

ब्लड बैंक के स्टाफ की इस मनमानी के कारण कई मरीजों का ऑपरेशन टल रहा है। जगदलपुर-सरगुजा जैसे दूर दराज के इलाकाें से आने वाले मरीज किसी तरह दान दाता का इंतजाम करके जब ब्लड बैंक में पहुंच रहे तो उन्हें ये कहकर लौटा दिया जा रहा कि ओ-पॉजीटिव तो इतना ज्यादा हो गया है कि दान नहीं लेंगे। मरीज चाहे कितनी भी मिन्नत करे। ये तर्क भी दे कि वह कहां से मरीज के ग्रुप का ब्लड लेकर आएगा? लेकिन किसी पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। 


हालांकि अंबेडकर अस्पताल में किसी भी सूरत में इलाज नहीं रोकने के सख्त निर्देश हैं। मरीज को ब्लड की जरूरत पड़ने पर उसके परिजन जिस ग्रुप का ब्लड उपलब्ध कराएं, उसके बदले में ब्लड बैंक से उस ग्रुप का रक्त देने का सिस्टम है जो मरीज के लिए जरूरी है। अचानक ही इस सिस्टम को बदल दिया गया है।

 

चौंकाने वाली बात है कि आला अफसर और जिम्मेदार इस सिस्टम से हाथ खड़े कर रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसा तो कोई नियम ही नहीं है। किसी को ब्लड देने से रोका नहीं जा रहा है। हालांकि आला अफसरों के इस तर्क को लेकर सीधे सवाल उठाए जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि जिम्मेदार अफसरों की मर्जी के बिना कोई भी तकनीशियन या स्टाफ खुद इतना बड़ा फैसला नहीं ले सकता। अब आला अफसर इस मामले की जांच करवाने की घोषणा कर छुट्‌टी पा रहे हैं।

 

इधर कर्मचारियों ने कहा- बहुत ब्लड है, नहीं लेंगे : गुरुवार की शाम 4 बजे वार्ड नंबर 18 में भर्ती जगदलपुर की मरीज के परिजन ब्लड बैंक पहुंचे। उन्हें बी-पॉजीटिव ब्लड की जरूरत थी। ब्लड बैंक के बाहरी हिस्से में बरामदे में बैठी महिला तकनीशियन ने पूछा आपका ब्लड ग्रुप क्या है? डोनर ने बताया- ओ पॉजीटिव। तकनीशियन ने कहा- अरे आजकल ओ पॉजीटिव तो नहीं ले रहे हैं। मरीज के परिजनों ने कहा- शुक्रवार को ऑपरेशन है। उसने कहा- ठीक है आप शुक्रवार को सुबह 10 बजे आईये। शुक्रवार को सुबह 8 बजे मरीज के परिजन फिर ब्लड बैंक पहुंचे। तकनीशियन से पूछकर डोनर को बुलवाा लिया। जब ब्लड देने पहुंचे तो ब्लड ग्रुप सुनते ही तकनीशीयन ने ब्लड देने से मना कर दिया।  

 

उधर एचओडी का दावा- डोनर लाना जरूरी नहीं : पैथालॉजी विभाग की एचओडी डॉ. रेणुका गहिने का कहना है कि उन्हें मरीजों की शिकायत नहीं मिली है। उनका तर्क है कि जरूरतमंद मरीजों को डोनर लाए बिना भी ब्लड दिया जाता है। जमीनी हकीकत इससे अलग है। गंभीर मरीज के इलाज में जुटे परिजन जब ब्लड बैंक पहुंचते हैं तो उन्हें साफ मना कर दिया जाता है कि ब्लड देंगे तभी मिलेगा। उस मुश्किल के समय में उन्हें ये कोई नहीं बताता कि वे कहां शिकायत करें। ब्लड बैंक में कहीं भी ऐसा कोई बोर्ड नहीं लगा है कि कोई दिक्कत हो या ब्लड न मिलें तो यहां शिकायत करें। ऐसे में वे आला अफसरों तक शिकायत करने कैसे पहुंच सकते हैं।

 

नोटिस में लिखा- डोनर इंतजार न करें पर यहां घंटों सिर्फ चक्कर : ब्लड बैंक के बाहर बाकायदा नोटिस चस्पा की गई है कि ब्लड दान देने वाले इंतजार न करें। अस्पताल में उल्टा हो रहा है। मरीज के परिजनों ही नहीं डोनरों को एक-एक घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। कोई भी डोनर के पहुंचने पर तुरंत फार्म नहीं दिया जाता। मरीज के परिजनों से कहा जाता है पहले वार्ड की पर्ची लेकर आओ। वार्ड की पर्ची लेकर पहुंचने पर कहते हैं अरे... आपने तो सैंपल लाया ही नहींं। जाइये पहले सैंपल लेकर आइए। उसके बाद ब्लड डोनर का फार्म भरकर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। ब्लड बैंक से कोई भी वार्ड करीब नहीं है। दूर तक पैदल जाना पड़ता है। ऐसे बुजुर्ग और महिलाएं जिन मरीजों की तिमारदारी में लगी रहती हैं, उन्हें हताश होना पड़ जाता है। ये कहने पर कि एक बार में सारी जानकारी क्यों नहीं देते? उल्टे कड़े शब्दों में जवाब मिलता है।

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