महाभारत छत्तीसगढ़ / पिछले चुनाव की मांगें फिर उछलीं, इनमें ऐसे मुद्दे जो इस बार भी बनेंगे गेम चेंजर, सड़क-पानी हर सीट पर

Dainik Bhaskar

Oct 16, 2018, 08:32 PM IST
विधानसभाओं में चेहरों के साथ मुद्दों की भी चर्चा, जानिए- संभागों में क्या-कुछ चल रहा

बस्तर और सरगुजा इलाके में स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल हैं। आज भी मरीजों को खाट पर ढोकर लाना पड़ता है। बस्तर और सरगुजा इलाके में स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल हैं। आज भी मरीजों को खाट पर ढोकर लाना पड़ता है।
X
बस्तर और सरगुजा इलाके में स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल हैं। आज भी मरीजों को खाट पर ढोकर लाना पड़ता है।बस्तर और सरगुजा इलाके में स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल हैं। आज भी मरीजों को खाट पर ढोकर लाना पड़ता है।

  • छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार 15 बरस पूरे करने वाली है
  • कई मांगें ऐसी भी जाे 18 सालों में भी पूरी नहीं हो सकीं

पी.श्रीनिवास राव/मनोज व्यास

 

रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य का चौथा विधानसभा चुनाव सिर पर खड़ा है। दलों की रणनीति करवट लेने लगी है। विधायक, हारे हुए प्रत्याशी और नए चेहरे मतदाताओं के मन की थाह लेने में जुटे हैं। पार्टियों की टिकट जब कटे, अभी तो हर दल से कई-कई दावेदार जनसंपर्क में लगे हुए हैं। ऐसे में मतदाताओं और दावेदारों के बीच बातचीत का केंद्र हैं वे मुद्दे जो तकरीबन राज्य बनने के बाद से आज तक बने हुए हैं। पिछले पांच सालों में कुछ नए मुद्दे भी पैदा हुए। छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार 15 बरस पूरे करने वाली है। इसके पहले कांग्रेस के तीन साल और...। लगभग दो दशक होने को है नया राज्य बने। इस लंबे दौर में शहर से लेकर गांव और मझरे-टोलों तक विकास के पर्याय काफी बदल चुके हैं। दैनिक भास्कर ने राज्य के पांच संभागों की सभी 90 सीटों की नब्ज टटोली। पता चला कि स्कूल-आंगनबाड़ी जैसी मांगों की जगह अब मेडिकल, इंजीनियरिंग कॉलेज, मोबाइल कनेक्टिविटी ने ले ली है। हां, भीतरी इलाकों में सड़क, पुल-पुलिया, अस्पताल और सिंचाई सुविधाओं की शाश्वत मांगें आज भी चुनावी मुद्दे बने हुए हैं। एक महीने बाद राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। हमने रियलिटी चेक की कि आखिर विधायकों ने अपने दावों-वादों पर कितना काम किया। इन विधानसभाओं की जनता और पराजित प्रत्याशियों से भी जाना कि क्षेत्र की जरूरतें क्या हैं? 

COMMENT