फोन टैपिंग / आईपीएस मुकेश गुप्ता और रजनेश पर फोन टैपिंग और षड्यंत्र रचने का दूसरा केस दर्ज



मुकेश गुप्ता और रजनेश सिंह। मुकेश गुप्ता और रजनेश सिंह।
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मुकेश गुप्ता और रजनेश सिंह।मुकेश गुप्ता और रजनेश सिंह।

  • तीन दिन पहले किए गए थे निलंबित, 5 दिन में दूसरा केस
  • 2015 में ईई आलोक के यहां छापेमारी, फोन टैपिंग की थी

Dainik Bhaskar

Feb 13, 2019, 04:08 AM IST

रायपुर. निलंबित डीजी मुकेश गुप्ता और आईपीएस रजनेश सिंह के खिलाफ ईओडब्लू ने चार दिन के भीतर दूसरा केस दर्ज किया है। इनपर फोन टैपिंग और षड्यंत्र रचकर फर्जी केस बनाने का आरोप है।

 

दोनों अफसरों पर आरोप है कि 2015 में ईओडब्लू और एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) में पोस्टिंग के दौरान बिलासपुर के प्रभारी ईई आलोक अग्रवाल की अवैध तरीके से फोन टैपिंग की। इसके अलावा  आपराधिक षडयंत्र और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर झूठे केस बनाने के आरोप में भी मुकदमा दर्ज किया गया है।  इससे पहले 7 फरवरी की रात नान घोटाले में अवैध फोन टैपिंग के मामले में दोनों पर केस दर्ज हुआ था। सरकार ने शनिवार देर रात दोनों को सस्पेंड कर दिया।

 

ईई आलोक अग्रवाल की 2015 में बिलासपुर में सिंचाई विभाग के खारंग डिविजन में पोस्टिंग थी। इसी दौरान कथित रूप से काली कमाई की शिकायत मिलने के बाद ईओडब्लू और एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने अग्रवाल के खिलाफ छापामार कार्रवाई की थी। तब उनके भाई पवन अग्रवाल के पास से पांच करोड़ रुपए से ज्यादा नकद जब्त किए गए थे। इस मामले में भी मुकेश गुप्ता और रजनेश सिंह अवैध फोन टैपिंग को लेकर जांच के घेरे में हैं। पड़ताल के दौरान जो दस्तावेजी प्रमाण मिले हैं, उसके अनुसार इस प्रकरण में भी अफसरों की पोस्टिंग के पहले ही उनके फोन सुने जा रहे थे।
 

सूत्रों का दावा- हो सकती है गिरफ्तारी, जुटाए जा रहे हैं सबूत

 

^सस्पेंड होने के बाद से दोनों अफसर मुकेश गुप्ता और रजनेश सिंह अंडरग्राउंड हैं। दोनों किसी भी सार्वजनिक स्थान पर नजर नहीं आ रहे हैं। निलंबन अवधि में उन्हें पुलिस मुख्यालय में उपस्थिति देनी है, लेकिन अब तक ज्वाइनिंग नहीं दी है। वे मुख्यालय के अफसरों के भी संपर्क में नहीं हैं। दोनों की गिरफ्तारी हो सकती है। इसके लिए अभी सबूत जुटाए जा रहे हैं।

 

हालांकि फोन टैपिंग के दस्तावेजों में डीएसपी आरके दुबे और बाकी अधिकारियों के हस्ताक्षर को बेहद मजबूत दस्तावेजी प्रमाण माना जा रहा है। फोन टैपिंग के दस्तावेजों के अाधार पर की गई प्रारंभिक जांच में ही कूटरचित और फर्जी दस्तावेज बनाने की पुष्टि हुई है। उसी के आधार पर आपराधिक केस दर्ज किया गया है।
(जैसा कि एक अधिकारी ने दैनिक भास्कर को बताया)
 

ब्लैकमेलिंग की शिकायतें मिल रही थीं, इसलिए कार्रवाई : भूपेश


सीएम भूपेश बघेल ने फोन टैपिंग को बेहद गंभीर बताया। सीएम ने मुकेश गुप्ता का नाम लिए बगैर कहा कि वह अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रहा है जबकि उसे सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो दस्तावेज मिले हैं उसमें फोन टैपिंग के रिकॉर्ड हैं। ये निजता का हनन है। राज्य सरकार की अनुमति के बिना किसी का फोन टैप नहीं किया जा सकता।

 

इसलिए इसमें शामिल एसीबी और ईओडब्लू के डीजी व एसपी को निलंबित किया है। फोन टैपिंग से पूरे प्रदेश में भय का वातावरण था। मंत्री, विधायक, नेता, पत्रकार, व्यापारी सभी फोन पर खुलकर बात नहीं करते थे। फोन टेपिंग उसी के आदेश पर हो रहा होगा जिसे हमने निलंबित किया है। ब्लैक मेलिंग की शिकायतें भी आई हैं।

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