छत्तीसगढ़ / समय पर प्रतिवेदन नहीं बंटा, सिंहदेव ने विभाग के बजट पर चर्चा के लिए 1 दिन और मांगा

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2019, 04:43 AM IST


singh dev asked for 1 day and discussion for  department's budget
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singh dev asked for 1 day and discussion for  department's budget
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रायपुर . विधानसभा में पहली बार बजट की अनुदान मांगों पर चर्चा सिर्फ इसलिए दूसरे दिन के लिए टाल दी गई, क्योंकि समय पर विभागीय प्रतिवेदन न तो विधानसभा सचिवालय को भेजा गया था आैर न ही सभी सदस्यों को। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री टीएस सिंहदेव ने विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत से इसके लिए अपने आैर अफसरों की आेर से खेद प्रकट करते हुए विभाग के बजट पर चर्चा किसी अन्य दिन कराने का आग्रह किया। इसे अध्यक्ष में स्वीकार 
करते हुए सदन की कार्यवाही गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी।

 

प्रश्नकाल के बाद जैसे ही स्पीकर डा. चरणदास महंत ने स्वास्थ्य एवं पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव का नाम पुकारा।  सिंहदेव खड़े होते ही अपने बजट प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं कर पाने पर खेद प्रकट किया। इसे लेकर विपक्षी सदस्यों ने इसे अफसरों आैर मंत्री के बीच तालमेल की कमी बताते हुए इसे सदन का अपमान भी करार दिया। तय कार्यसूची के मुताबिक बुधवार को बजट मांग पर विभागवार चर्चा होनी थी। पहले दिन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के बजट पर चर्चा होनी थी। लेकिन मंत्री टीएस सिंहदेव ने विभाग की तैयारी पूरी नहीं होने की बात कहकर चर्चा को आगे बढ़ाने की मांग कर दी। 

 

सिंहदेव बोले- विपक्ष तैयार नहीं था इसलिए तिथि बढ़ाने की मांग की सिंहदेव ने सदन के बाहर कहा कि सभी सदस्यों तक प्रतिवेदन मंगलवार शाम तक पहुंच गया था। लेकिन विपक्षी सदस्यों ने कहा कि वे अभी इसके लिए तैयार नहीं है। बुधवार सुबह भी उनकी भाजपा विधायक अजय चंद्राकर से बात हुई थी जिसमें उन्होंने खुद इस पर चर्चा एक दिन बढ़ाने की बात कही थी। प्रतिवेदन की छपाई में देरी भी कारण माना जा सकता है। 

 

ये गंभीर लापरवाही है: पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ये गंभीर चूक है। विधायकों को समय पर प्रतिवेदन नहीं दिया गया, तो चर्चा कैसे होगी। ऐसी चूक पहले कभी नहीं हुई, ये गंभीर लापरवाही है।

 

पहले एेसा कभी नहीं हुआ : जोगी कांग्रेस के विधायक दल के नेता धर्मजीत सिंह ने कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। विधायकों को विभागीय प्रतिवेदन पहले ही दे दिया जाता है, ताकि वो तैयारी के साथ सदन में आ सके, अपनी बातों को कह सकें, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। ये सरकार की बहुत भारी भूल है। 
 

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